महाराष्ट्र के पुणे जिले में युगांडा की तीन महिलाएं वीजा की तय अवधि से खत्म होने के बाद भी भारत में रह रही थीं. पुलिस ने तीनों को हिरासत में लेकर उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. अधिकारियों के मुताबिक, उन्हें तीनों महिलाओं के वीजा की तय अवधि खत्म होने के बाद भी भारत में रहने की जानकारी मिली. इसके बाद मंगलवार को हिंजवडी पुलिस स्टेशन की सीमा में आने वाले मारुंजी के एक रिहायशी परिसर में जांच अभियान चलाया गया और तीनों महिलाओं को पकड़ा गया.
जानकारी के मुताबिक, महिलाओं की पहचान डोरेक अहैस्बिवे, प्रोसी अंकुंडा और अमीना कटुसीमे के रूप में हुई है. जांच के दौरान उन्होंने पासपोर्ट और वीजा के मूल दस्तावेजों के बजाय उनकी फोटो कॉपी पेश की.
पुलिस ने इमिग्रेशन, वीजा, फॉरेनर्स रजिस्ट्रेशन एंड ट्रैकिंग प्रणाली के जरिए उनके दस्तावेजों की जांच की. इसके बाद पुष्टि हुई कि तीनों महिलाएं युगांडा की नागरिक हैं.
तीनों महिलाओं ने नहीं बढ़ाई अवधि
पुलिस ने बताया कि अहैस्बिवे स्टूडेंट वीजा पर भारत में रह रही थीं, जो कि 7 अक्टूबर, 2026 तक ही वैध था. अंकुंडा का मेडिकल वीजा 29 दिसंबर, 2025 को खत्म हो गया था, जबकि कटुसीमे के मेडिकल वीजा की अवधि पिछले साल 11 नवंबर को खत्म हो गई थी.
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इसके बावजूद तीनों महिलाओं में से किसी ने भी अपने वीजा की अवधि नहीं बढ़वाई थी. अब इस मामले में उन्हें हिरासत में ले लिया गया है और पिंपरी चिंचवड के फॉरेनर्स रजिस्ट्रेशन ऑफिस के जरिए भारत से वापस भेजने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है.
यह कार्रवाई पिंपरी चिंचवड पुलिस की स्पेशल ब्रांच के विदेशी पंजीकरण कार्यालय ने की. भारत में वीजा की अवधि से ज्यादा समय तक रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान करने के निर्देश के बाद जांच अभियान चलाया गया था. फिलहाल जांच के बाद तीनों महिलाओं को हिरासत में लिया है. अब विदेशी पंजीकरण कार्यालय के जरिए उन्हें भारत से वापस भेजने की प्रक्रिया जारी है.