सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त एमिकस क्यूरी (Amicus Curiae)) ने झारखंड सरकार द्वारा डीजीपी नियुक्ति के लिए बनाए गए नए नियमों और प्रक्रिया को शीर्ष अदालत के दिशा-निर्देशों के खिलाफ माना है. कोर्ट की ओर से नियुक्त न्याय मित्र (एमिकस क्यूरी) ने इस संबंध में अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी है.
इसके बाद मामले की अगली विस्तृत सुनवाई 7 सितंबर 2026 को तय की गई है. सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता बाबू लाल मरांडी की पैरवी करने वाले वकील अभिषेक राय और ज्ञानंत सिंह के मुताबिक, झारखंड में डीजीपी की नियुक्ति को लेकर विवाद इसलिए हुआ क्योंकि इस पूरी प्रक्रिया में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं किया.
झारखंड सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक प्रकाश सिंह मामले (2006) के दिशा-निर्देशों का पालन करने के बजाय 'झारखंड डीजीपी चयन और नियुक्ति नियमावली, 2024' तैयार की थी.
सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार, राज्य सरकारों को वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नाम संघ लोक सेवा आयोग को भेजने होते हैं. उनको तीन अधिकारियों का एक पैनल शॉर्टलिस्ट करता है. झारखंड के नए नियमों में यूपीएससी की इस निष्पक्ष भूमिका को हटाकर एक राज्य-नियंत्रित चयन समिति बना दी गई थी.
कार्यवाहक और तदर्थ नियुक्तियां की गईं. राज्य सरकार पर लगातार नियमित डीजीपी नियुक्त करने के बजाय कार्यवाहक या तदर्थ यानी एडहॉक नियुक्तियां करने का आरोप लगा. उन नियुक्तियों को सुप्रीम कोर्ट पहले ही पूरी तरह खारिज कर दिया था.
प्रकाश सिंह मामले में दिए सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के तहत डीजीपी को कम से कम दो साल का निश्चित कार्यकाल मिलना अनिवार्य है. आरोप है कि राज्य के नियमों में सरकार को कभी भी डीजीपी को हटाने की शक्ति दे दी गई थी, जो राजनीतिक हस्तक्षेप को बढ़ावा देती है.
वर्तमान स्थिति और कानूनी प्रक्रिया और दस्तावेजों की समीक्षा करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त की सुनवाई के दौरान डीजीपी नियुक्ति से जुड़े सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज अमाइकस क्योरे को सौंपकर इसकी समीक्षा करने को कहा था. एमिकस क्यूरी ने अपनी स्वतंत्र रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल कर दी है.
राज्य सरकार के वकील कपिल सिब्बल ने इस रिपोर्ट की कॉपी मांगी है ताकि सरकार अपना पक्ष रख सके. इस बीच झारखंड सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक अनुपालन हलफनामा (Compliance Affidavit) दायर कर नियमों में किए गए हालिया बदलावों और वर्तमान नियुक्तियों को नियम सम्मत बताने का प्रयास किया है.