रांची में छात्रों के विधानसभा मार्च के दौरान हुई उग्र झड़प को लेकर पुलिस ने सख्त कार्रवाई की है. पुलिस ने कुल 600 प्रदर्शनकारियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है, जिनमें 100 नामजद और 500 अज्ञात छात्र व अन्य प्रदर्शनकारी शामिल हैं.
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, दर्ज एफआईआर में आंदोलन का नेतृत्व कर रहे 100 प्रमुख प्रदर्शनकारियों को नामजद किया गया है. इसके अलावा 500 अज्ञात छात्रों व अन्य उपद्रवियों को आरोपी बनाया गया है.
हालांकि अब रांची के SSP ने एफआईआर की बात खारिज कर दी है. एसएसपी राकेश रंजन ने कहा कि कि किसी के नाम से FIR दर्ज नहीं कराई गई है. लेकिन हमने विधानसभा के पास हिंसा और हंगामा करने में शामिल करीब 500 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है.
आपको बता दें कि 10 अगस्त को JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं के विरोध में छात्रों ने 'विधानसभा घेराव' का आह्वान किया था. इस दौरान जब प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा घेरा तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की, तो पुलिस के साथ भारी तीखी झड़प हुई थी. भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज, वाटर कैनन और आंसू गैस के गोलों का प्रयोग करना पड़ा था.
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वहीं छात्र अपनी मांगों को लेकर अभी भी अड़े हुए हैं और छात्रों का आंदोलन रांची के जयपाल मुंडा स्टेडियम में जारी है. इस मुद्दे को लेकर सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की लंबी वार्ता हो चुकी है, लेकिन JSSC-CGL परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर अब तक कोई सहमति नहीं बन पाई है.
सरकार का दावा
इस बीच, झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) को भंग कर दिया गया है और उसके तीनों सदस्य अपने पद से इस्तीफा दे चुके हैं. वहीं, आयोग की सदस्य डॉ. अजिता भट्टाचार्य से 10 अगस्त को पूछताछ की जानी है. दूसरी ओर, छात्र पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग पर अड़े हुए हैं. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्वयं छात्रों को पत्र लिखकर उनकी चिंताओं को दूर करने और भरोसा दिलाने का प्रयास किया.
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सरकार का दावा है कि छात्रों की 98 प्रतिशत मांगों को स्वीकार कर लिया गया है, लेकिन कुछ प्रमुख मुद्दों पर अब भी गतिरोध बना हुआ है. वहीं प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी मांगे अभी भी नहीं मानी गई हैं.