आज के दौर में फोन ने लोगों को एक-दूसरे के बेहद करीब ला दिया है, लेकिन क्या हर वक्त ऑनलाइन रहना भी जरूरी है? वॉट्सअप पर कई ग्रुप, दोस्तों के लगातार मैसेज और हर कुछ मिनट में आने वाले नोटिफिकेशन कई बार दिमाग को थका देते हैं. ऐसे में कुछ लोग चुपचाप ग्रुप छोड़ देते हैं या हर चैट को म्यूट करके रखते हैं. पहली नजर में उनकी यह आदत आपको अजीब लग सकती है. आपको लग सकता है कि वे किसी से नाराज हैं या लोगों से दूरी बना रहे हैं. लेकिन साइकोलॉजी के मुताबिक, हर बार वजह नाराजगी नहीं होती. कई बार चैट म्यूट करने की आदत व्यक्ति की सोच, उसकी प्राथमिकताओं और मानसिक शांति से जुड़ी होती है. तो आखिर हर वक्त चैट म्यूट रखने वाले लोग कैसे होते हैं और वे ऐसा क्यों करते हैं? आइए जानते हैं.
चैट म्यूट करना दोस्ती खत्म करना नहीं
साइकोलॉजी के अनुसार, किसी दोस्त की चैट म्यूट करने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि वह व्यक्ति उस दोस्त को पसंद नहीं करता. कई बार कोई व्यक्ति काम के दौरान अपने सबसे करीबी दोस्त की चैट भी म्यूट कर सकता है, ताकि बार-बार फोन देखने की जरूरत न पड़े. इसी तरह परिवार के ग्रुप में बहुत ज्यादा मैसेज आने पर भी कोई उसे म्यूट कर सकता है. इसका मतलब रिश्ते से दूरी बनाना नहीं, बल्कि फोन पर आने वाले संदेशों को अपने हिसाब से संभालना हो सकता है. हर बातचीत के लिए समय चाहिए. लगातार बातचीत, बहस, सवाल और जवाब कई लोगों को थका सकते हैं. खासकर जब कोई व्यक्ति पहले से काम, पढ़ाई या निजी जिंदगी के दबाव में हो, तब बहुत ज्यादा ऑनलाइन बातचीत उसे परेशान कर सकती है.
ऐसे में कुछ समय के लिए चैट से दूरी बनाना व्यक्ति को राहत दे सकता है. साइकोलॉजी में सोशल ओवरलोड यानी जरूरत से ज्यादा सामाजिक दबाव को भी सोशल मीडिया की थकान से जोड़ा गया है. इसलिए चैट म्यूट करने वाले हर व्यक्ति को अकेला, घमंडी या लोगों से नाराज समझना सही नहीं है. कई बार यह सिर्फ अपनी अटेंशन, टाइम और मेंटल पीस को मैनेज करने का तरीका होता है.
ग्रुप छोड़ने की वजह भी अलग हो सकती है
अगर कोई व्यक्ति किसी वॉट्सअप या दूसरे चैट ग्रुप से एग्जिट हो गया है, तो इसका मतलब यह जरूरी नहीं कि वह वहां मौजूद लोगों से नाराज है. हो सकता है कि ग्रुप में अब उसके लिए कोई खास काम न बचा हो. बातचीत बार-बार एक जैसी हो रही हो या ग्रुप में बहुत ज्यादा मैसेज आते हों. कई बार व्यक्ति अपनी जिंदगी में इतने व्यस्त हो जाता है कि वह हर ग्रुप में एक्टिव नहीं रहना चाहता. ऐसे में ग्रुप एग्जिट करना उसके लिए फोन और सोशल मीडिया को व्यवस्थित करने का एक तरीका हो सकता है.
लोगों को अपने समय पर बातचीत करना पसंद है
पहले जब किसी से बात करनी होती थी तो लोग फोन करते थे या मिलने जाते थे. अब मैसेजिंग ऐप की वजह से ऐसा लगता है कि हर व्यक्ति हर समय उपलब्ध है. लेकिन वास्तव में हर किसी को हर वक्त जवाब देना जरूरी नहीं है. चैट म्यूट करने से व्यक्ति खुद तय कर सकता है कि उसे कब बातचीत करनी है. यानी वह कनेक्शन खत्म नहीं करता, बल्कि बातचीत का समय अपने हिसाब से तय करता है. इसे डिजिटल सीमा यानी डिजिटल बाउंड्री बनाने का एक तरीका माना जा सकता है.
हालांकि हर बार चैट म्यूट करना या ग्रुप छोड़ना सही बिहेवियर हो, ऐसा भी नहीं है. अगर कोई व्यक्ति लगातार सभी लोगों से दूरी बनाने लगे, जरूरत रिश्तों से बचने लगे या बातचीत को लेकर हमेशा परेशान रहने लगे, तो इस बिहेवियर पर ध्यान देना जरूरी हो सकता है. इसलिए किसी व्यक्ति के ऑनलाइन व्यवहार को देखकर तुरंत यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं है कि वह घमंडी, नाराज या असामाजिक हो गया है. उसकी परिस्थितियां भी इसके पीछे बड़ी वजह हो सकती हैं.