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रांची के 'जंतर-मंतर' की मांग कब सुनेगी सरकार? JPSC मामले पर सड़कों पर छात्र

दिल्ली के जंतर-मंतर की तरह झारखंड की राजधानी रांची में भी भर्ती परीक्षाओं को लेकर बड़ा आंदोलन चल रहा है. JPSC और JSSC (CGL) में कथित गड़बड़ी के खिलाफ छात्र CBI जांच और पारदर्शी भर्ती की मांग पर अड़े हैं.

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रांची की सड़कों पर मशाल जुलूस निकालते आक्रोशित छात्र. (Photo: ITG)
रांची की सड़कों पर मशाल जुलूस निकालते आक्रोशित छात्र. (Photo: ITG)

दिल्ली के जंतर-मंतर का आंदोलन पूरे देश में चर्चा में रहा था. अब झारखंड की राजधानी रांची में भी कुछ ऐसा ही माहौल दिख रहा है. JPSC और JSSC CGL भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के आरोपों को लेकर हजारों छात्र सड़क पर उतर आए हैं. हाथों में जलती मशाल लेकर युवाओं ने बड़ा मार्च निकाला. जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में करीब एक हफ्ते से अनिश्चितकालीन सत्याग्रह चल रहा है. छात्रों का कहना है कि जब तक पूरे मामले की CBI जांच का फैसला नहीं होगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा.

परीक्षाओं में गड़बड़ी और बार-बार लीक होते पेपर से तंग आकर अभ्यर्थियों का सब्र टूट चुका है. राज्य के कोने-कोने से आए युवा महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीरों के साथ शांतिपूर्ण तरीके से अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं. इस आंदोलन की खास बात यह है कि देश के अलग-अलग शहरों में बैठे लोग भी इन युवाओं की मदद कर रहे हैं. वे ऑनलाइन फूड ऐप से खाना ऑर्डर करके सीधे धरना स्थल पर भिजवा रहे हैं, ताकि हक की यह लड़ाई जारी रहे.

14वीं परीक्षा पर उठे गंभीर सवाल

पूरे विवाद की मुख्य वजह 14वीं सिविल सर्विसेज परीक्षा का प्रीलिम्स रिजल्ट है. छात्रों का कहना है कि पासिंग मार्क्स (कट-ऑफ) तय करने में भारी गड़बड़ी हुई और मेरिट लिस्ट पर जिम्मेदार अफसरों के दस्तखत तक नहीं थे. साथ ही, OMR शीट में भी हेरफेर के आरोप लग रहे हैं. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि परीक्षा कराने का ठेका लखनऊ की जिस 'TDPL' कंपनी को दिया गया, उसे महज एक महीने पहले ही राज्य में ब्लैकलिस्ट किया गया था. हालांकि सरकार के कहने पर CID मामले की जांच कर रही है, लेकिन छात्र केंद्रीय एजेंसियों से निष्पक्ष जांच कराने पर अड़े हैं.

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धरने पर बैठे युवाओं का कहना है कि सिर्फ सीआईडी जांच से न्याय नहीं मिलेगा. उनका दावा है कि पहले भी ऐसे मामलों में जांच हुई, लेकिन कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया.  बड़ी संख्या में आंदोलन में शामिल युवा किसान और साधारण परिवारों से आते हैं. उनका कहना है कि वे किसी की दया नहीं, बल्कि अपनी मेहनत के दम पर निष्पक्ष मौका चाहते हैं. इसके अलावा, छात्र OMR शीट में 'Not Attempted' (अटेम्प्ट नहीं किया) का पांचवां विकल्प जोड़ने की मांग भी कर रहे हैं. उनका कहना है कि इससे भविष्य में OMR शीट से छेड़छाड़ की आशंका कम होगी.

सीएम आवास पर हुई बैठक

रांची में मुख्यमंत्री आवास पर सत्ताधारी 'इंडिया' गठबंधन के विधायकों की अहम बैठक हुई. बैठक खत्म होने के बाद कांग्रेस विधायक प्रदीप यादव ने बयान देते हुए कहा कि सभी घटक दलों के विधायक एकजुट हैं और अपनी एकता का परिचय दिया है. सभी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में अपना पूरा भरोसा जताया है. उन्होंने साफ कहा कि वे किसी भी कीमत पर बीजेपी को मुख्यमंत्री की कुर्सी तक नहीं पहुंचने देंगे.

बाबूलाल मरांडी ने बोला हमला

छात्रों के समर्थन में आते हुए बीजेपी नेता बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सरकार पर तीखा निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि सरकार को युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बंद कर अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी होगी. मरांडी ने साफ लहजे में मांग की है कि मामले की निष्पक्षता से जांच कराने के लिए सरकार को बिना किसी देरी के सीबीआई जांच का आदेश देना चाहिए.

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भविष्य बचाने की आखिरी लड़ाई

सालों से तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि अगर हर बार पेपर लीक होगा या OMR शीट बदली जाएगी, तो मेहनत करने वाले युवाओं को नौकरी कैसे मिलेगी? पलामू, गिरिडीह, लातेहार और रांची से आए छात्रों ने एक सुर में कहा कि यह लड़ाई किसी नेता या पार्टी के खिलाफ नहीं, बल्कि उनके अपने भविष्य और निष्पक्ष भर्ती व्यवस्था को बचाने का प्रयास है.

दूसरी तरफ इस मुद्दे को लेकर राज्य में सियासी पारा भी चढ़ गया है. एक तरफ विपक्षी दल भर्ती घोटालों को लेकर सरकार पर हमले बोल रहे हैं, तो दूसरी तरफ सत्ता पक्ष एकजुटता का दावा कर रहा है. राजनीति चाहे जो हो, लेकिन रांची की सड़कों पर गूंज रहे नारे बता रहे हैं कि इस बार झारखंड का युवा बिना ठोस समाधान के पीछे हटने वाला नहीं है.

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