बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र FDA को दो मामलों में उसके 'मनमाने रवैये' के लिए फटकार लगाई है. कोर्ट की फटकार के बाद FDA ने दोनों मामलों में अपने आदेश को वापस लेने पर सहमति जताई है.
दरअसल, कोर्ट के सामने दो मामले आए थे. जिसमें उन्होंने FDA को फटकार लगाई है. पहले मामले में, बेंच ने रेगुलेटरी बॉडी को जल्दीबाजी में कार्रवाई करने पर फटकार लगाई है. दरअसल, कुछ दिनों पहले FDA ने पुणे वेयरहाउस में सिप्ला फार्मा के होलसेल ड्रग लाइसेंस को रद्द कर दिया था. यह कार्रवाई पैकेजिंग में कथित गड़बड़ियों का हवाला देते हुए की गई थी. इस मामले में 26 अगस्त को पर्सनल हियरिंग तय की गई थी. सिप्ला ने सार्वजनिक छुट्टी होने के कारण सुनवाई को टालने का अनुरोध करने के लिए एक कर्मचारी को भेजा. लेकिन समय देने की बजाय FDA ने कैंसिलेशन का अंतिम आदेश दे दिया.
एक्टिंग चीफ जस्टिस रवींद्र घुगे और जस्टिस गौतम अंखाड की खंडपीठ ने FDA से सवाल किया, "हम न्याय और निष्पक्षता बनाए रखने का प्रयास करते हैं. क्या आप खुद को लॉर्ड समझते हैं? क्या आप कुछ भी कर सकते हैं?"
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इस मामले में FDA को फटकार लगाते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश घुगे ने कहा, "सुनवाई का नोटिस 26 अगस्त को राज्य में छुट्टी के दिन दिया गया. उस दिन आपका ऑफिस भी नहीं खुला था. यह किस तरह से निष्पक्ष और पारदर्शी है. आप सराहनीय काम कर रहे हैं लेकिन हद से ज्यादा आगे बढ़ रहे हैं."
दूसरे मामले में मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (MCA) से जुड़े मामले में भी कोर्ट ने FDA के रवैये को व्यावहारिक न मानते हुए फटकार लगाई है. मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (MCA) द्वारा दायर मामले से निपटते समय मामलों पर 'व्यवहारिक के बजाय किताबी' नज़रिया अपनाने के लिए FDA को कोर्ट ने फटकार लगाई है. हालांकि कोर्ट की फटकार के बाद FDA ने अपना सस्पेंशन ऑर्डर वापस लेने पर सहमति जताई है.