झारखंड में जारी राजनीतिक संकट के बीच छत्तीसगढ़ से वापस लौटे महागठबंधन के विधायक रांची के सर्किट हाउस में पहुंच गए हैं. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन यहां पहले से ही मौजदू थे. दरअसल, सोमवार को झारखंड विधानसभा में विश्वास मत प्रस्ताव पेश किया जायेगा. इस बीच विधायकों को हॉर्स ट्रेडिंग (खरीद-फरोख्त) से बचाने के लिए पिछले कई दिनों से एकसाथ रखा गया है. बताया जा रहा है कि कल होने वाले विधानसभा के विशेष सत्र के पहले आज मुख्यमंत्री इन विधायकों के साथ रणनीति पर चर्चा कर सकते हैं. वहीं विधायकों को सर्किट हाउस में ही रुकने के निर्देश दिए गए हैं. वहीं देर शाम झारखंड बीजेपी ने भी अपने विधायक दल की बैठक बुलाई, जिसमें कल होने वाले विशेष सत्र की रणनीति को लेकर चर्चा की गई.
बता दें कि इससे पहले झारखंड के सीएम ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष के मंसूबों की हार होगी. उन्होंने दुमका की घटना और सितंबर को बुलाए जाने वाले विशेष सत्र पर प्रतिक्रिया व्यक्त की. उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ गठबंधन को पूर्ण बहुमत प्राप्त है. चिंता करने की कोई बात नहीं है. उन्होंने कहा कि हमारे लिए जो जाल बिछाए गए हैं, उसमें विपक्ष (बीजेपी) खुद फंस जाएगा.
छत्तीसगढ़ में रखे गए थे विधायक
बता दें कि छत्तीसगढ़ में भी कांग्रेस की ही सरकार है. इसलिए विधायकों को छत्तीसगढ़ के रायपुर में रखा गया था. सरकार को डर है कि अगर हेमंत सोरेन को इस्तीफा देना पड़ा तो विधायकों को खरीदने-तोड़ने की कोशिश हो सकती है. झारखंड की महागठबंधन सरकार में सबसे बड़ी पार्टी झामुमो के 30, कांग्रेस के 18 और राजद के एक विधायक हैं. वहीं मुख्य विपक्षी दल भाजपा के सदन में 26 विधायक हैं.
हेमंत सोरेन की कुर्सी पर खतरा
गौरतलब है कि हेमंत सोरेन की मुख्यमंत्री की कुर्सी जा सकती है, जिसके बाद विधायकों की बैठक कई बार बुलाई जा चुकी है. दरअसल, खनन पट्टे के मामले में चुनाव आयोग ने जांच के बाद अपनी रिपोर्ट झारखंड के राज्यपाल को भेज दी है. इसमें मुख्यमंत्री हेमंत को विधायक पद के लिए अयोग्य ठहराया है. यानी उनकी विधायकी रद्द करने की सिफारिश की है.अगर हेमंत की विधायकी रद्द करने की सिफारिश पर राज्यपाल की मुहर लगती है तो झामुमो की सरकार गिर जाएगी. ऐसे में पार्टी को नया नेता सदन चुनना पड़ेगा.