जम्मू कश्मीर विधानसभा में एक बार फिर राज्य का दर्जा बहाल करने को लेकर मामला गरमा गया. इसे लेकर विधानसभा में खूब हंगामा हुआ. जम्मू-कश्मीर के चीफ सेक्रेटरी अटल डुल्लू और विधि सचिव अचल सेठी ने विधानसभा सचिवालय को इस संबंध में अलग-अलग पत्र लिखे. दोनों अफसरों ने स्पीकर से राज्य का दर्जा बहाल करने वाले प्रस्ताव को न स्वीकार करने को कहा. इस प्रस्ताव को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शुक्रवार को विधानसभा में पेश किया था.
स्पीकर को सोमवार को इन पत्रों के बारे में जानकारी मिली. जानकारी के मुताबिक इन दोनों अफसरों ने विधानसभा सेक्रेटेरिएट से कहा कि उन्हें ऐसे प्रस्ताव को मंजूरी देने का कोई अधिकार नहीं है, क्योंकि यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है. खास बात यह है कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के पास लॉ मिनिस्ट्री का भी चार्ज है. उन्होंने विधि सचिव की इस चिट्ठी पर नाराजगी जाहिर की है क्योंकि उन्हें इसके बारे में कोई जानकारी नहीं थी.
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को विधानसभा सचिवालय से इस पत्र के बारे में जानकारी मिली. सोमवार को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में इस मुद्दे पर अपनी नाराजगी जाहिर की. उन्होंने विधानसभा में सवाल किया कि क्या किसी दूसरे राज्य में ऐसा हो सकता है कि मुख्यमंत्री कोई प्रस्ताव पेश करे और उसकी ब्यूरोक्रेसी ही उसके खिलाफ काम करे?
उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के साथ ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि जम्मू-कश्मीर राज्य नहीं बल्कि केंद्र शासित प्रदेश है. उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि उन्हें नहीं पता कि किसके कहने पर अफसरों ने यह चिट्ठी लिखी.
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CM उमर अब्दुल्ला ने पेश किया था प्रस्ताव
दरअसल, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शुक्रवार को विधानसभा में राज्य का दर्जा बहाल करने का प्रस्ताव पेश किया था. इस प्रस्ताव में साल 2000 के ऑटोनॉमी प्रस्ताव का भी जिक्र था. सोमवार को BJP के विरोध और वॉकआउट के बीच यह प्रस्ताव विधानसभा में पास हो गया.
NC-BJP विधायकों ने किया हंगामा
मंगलवार को विधानसभा में इस मुद्दे पर तीखी बहस हुई. मंत्री सकीना इटू समेत अन्य नेशनल कॉन्फ्रेंस(NC) विधायकों ने इस मुद्दे को लेकर दावा किया कि साल 2000 में फारूख अब्दुल्ला सरकार द्वारा पास किए गए ऑटोनॉमी प्रस्ताव के पक्ष में BJP ने वोट किया था. नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों ने दावा किया कि उस समय बीजेपी विधायक रहे लाल शिव चरण गुप्ता ने प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया था. वे उधमपुर पश्चिम के मौजूदा BJP विधायक के पिता हैं.
दिलचस्प बात यह है कि इस दौरान नेशनल कॉन्फ्रेंस के संरक्षक और पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला भी विजिटर गैलरी में मौजूद रहे. उन्होंने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को एक नोट भेजा. बाद में, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बताया कि उनके पिता ने उन्हें नेशनल कॉन्फ्रेंस विधायकों के दावे की सच्चाई जांचने के लिए नोट भेजा था.
उमर अब्दुल्ला ने बताया कि शिव चरण गुप्ता ने साल 2000 के ऑटोनॉमी प्रस्ताव के पक्ष में वोट नहीं दिया था, वोटिंग के दौरान बीजेपी के 8 विधायक सदन से बाहर चले गए थे.
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मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद बीजेपी विधायकों ने स्पीकर से नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों की टिपप्णियों को सदन की कार्यवाही से हटाने की मांग की.