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गुजरात: मांजलपुर में फिर खिला कमल, बीजेपी के सतेंद्रभाई पटेल 30 हजार वोटों से जीते

मांजलपुर में बीजेपी ने लगातार चौथी बार जीत दर्ज की. सतेंद्रभाई पटेल ने कांग्रेस के भीखाभाई रबारी को 30 हजार से ज्यादा वोटों से हराकर सीट बरकरार रखी.

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मांजलपुर सीट पर बीजेपी की बड़ी जीत (Photo: ITG)
मांजलपुर सीट पर बीजेपी की बड़ी जीत (Photo: ITG)

गुजरात के वडोदरा की मांजलपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में बीजेपी ने एक बार फिर अपना दबदबा कायम रखा है. पार्टी के उम्मीदवार सतेंद्रभाई पटेल ने कांग्रेस के भीखाभाई रबारी को 30,499 से ज्यादा वोटों से हराया. इसके साथ ही 2012 से इस सीट पर चला आ रहा बीजेपी का जीत का सिलसिला बरकरार रहा. यह सीट योगेश पटेल के निधन के बाद खाली हुई थी.

30 जुलाई को हुए मतदान में सिर्फ 37.5 फीसदी वोट पड़े थे. कम मतदान को लेकर बीजेपी में थोड़ी चिंता जरूर थी, लेकिन सोमवार सुबह मकरपुरा स्थित भवंस स्कूल में मतगणना शुरू होते ही तस्वीर साफ होने लगी. पहले राउंड से मिली बढ़त आखिर तक कायम रही. सभी 19 राउंड में सतेंद्रभाई पटेल कांग्रेस उम्मीदवार से आगे रहे. उन्हें कुल 55,084 वोट मिले, जबकि भीखाभाई रबारी के खाते में 24,585 वोट आए. वहीं, NOTA को 2,223 वोट मिले. इसके अलावा, पोस्टल बैलेट में भी बीजेपी को 160 और कांग्रेस को 92 वोट मिले.

जीत के बाद बीजेपी कार्यकर्ताओं ने विजय यात्रा निकाली. बड़ी संख्या में समर्थक इसमें शामिल हुए. सतेंद्रभाई पटेल ने कहा कि मांजलपुर में जनता ने एक बार फिर बीजेपी की नीतियों और विकास के काम पर भरोसा जताया है. उनका कहना था कि मतदान भले कम हुआ, लेकिन पार्टी को उम्मीद के मुताबिक मजबूत बढ़त मिली. चुनाव के दौरान ढोल-नगाड़े बजाने को लेकर कांग्रेस के आरोपों को भी उन्होंने खारिज किया.

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उधर, मांजलपुर उपचुनाव में कम वोटिंग देखकर कांग्रेस को किसी चमत्कार की उम्मीद थी, लेकिन नतीजों ने उन उम्मीदों पर पानी फेर दिया. हार के बाद वडोदरा कांग्रेस के शहर अध्यक्ष ऋत्विज जोशी ने आजतक से बातचीत में कहा कि मुकाबला केवल बीजेपी से नहीं, बल्कि पूरी सरकारी मशीनरी से था. चुनाव वाले दिन ढोल-नगाड़ों के साथ प्रचार करने की शिकायत चुनाव आयोग से की गई, पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. उन्होंने दावा किया कि जनता में बीजेपी को लेकर गुस्सा था, इसी वजह से उनके समर्थक वोट डालने निकले ही नहीं और वोटिंग सिमटकर 37.5 फीसदी रह गई. उनका यह भी कहना था कि भले ही नतीजे पक्ष में न आए हों, लेकिन पार्टी का वोट शेयर पहले से बेहतर हुआ है.

दरअसल, 2022 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर डेढ़ लाख से ज्यादा वोट पड़े थे. तब कांग्रेस को 19,379 वोट मिले थे. इस बार कुल मतदान काफी कम रहा, फिर भी कांग्रेस 24,585 वोट हासिल करने में सफल रही. यानी पिछले चुनाव के मुकाबले उसका वोट शेयर बढ़ा है, लेकिन यह बढ़त जीत में नहीं बदल सकी.

यह उपचुनाव बीजेपी के वरिष्ठ नेता योगेश पटेल के निधन के बाद कराया गया था. साल 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने एक लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी. इससे पहले 2012 और 2017 में भी मांजलपुर सीट पर बीजेपी ने ही जीत हासिल की थी. इस बार भी नतीजे ने साफ कर दिया कि मांजलपुर में कमल का दबदबा अब भी कायम है.

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