दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ (DUSU) चुनाव के नतीजों के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि ज्यादातर छात्र 'मौजूदा सत्ता' के खिलाफ हैं, लेकिन उनके वोट बंटे हुए हैं. उन्होंने कांग्रेस की ओर से अपने छात्र संगठन को संभालने के तरीके और कुछ वामपंथी छात्र संगठनों के रवैये पर भी सवाल उठाए.
सौरव दास ने शनिवार को कहा कि आरएसएस से जुड़े अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की जीत को एकतरफा नहीं माना जा सकता. उनके मुताबिक, यह जीत मुख्य रूप से विरोधी वोटों के बंटवारे का नतीजा है. सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, 'ज्यादातर छात्र मौजूदा शासन के खिलाफ हैं, लेकिन वे बंटे हुए हैं और इसका फायदा शासन को मिलता है. हालांकि, इसमें उम्मीद की एक किरण भी है. पद जीतने वालों को याद रखना चाहिए कि वे राजा या रानी नहीं हैं. बहुमत ने उन्हें वोट नहीं दिया है.'
CJP नेता ने कांग्रेस और उसकी 'ब्यूरोक्रेटिक विंग्स' पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि CJP के पीछे पड़ने के बजाय कांग्रेस को पहले अपना संगठन दुरुस्त करने पर ध्यान देना चाहिए. दास ने दावा किया कि यह सिलसिला पिछले 12 साल से चल रहा है और अब लोगों का धैर्य खत्म हो रहा है. उन्होंने NSUI से बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले दीपांशु का उदाहरण भी दिया. दास ने कहा कि NSUI से टिकट नहीं मिलने के बाद बागी उम्मीदवार ने उपाध्यक्ष पद पर बड़े अंतर से जीत हासिल की है.
सौरव दास ने वामपंथी छात्र संगठनों के एक वर्ग पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि वाम एकता में शामिल कुछ लोग 'वैचारिक शुद्धता और विशिष्टता' पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे संगठनों को जमीनी हकीकत समझनी चाहिए. दास ने विपक्षी एकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर यही विपक्ष की 'एकता' है तो वे विपक्ष में ही बने रहेंगे.
DUSU चुनाव में ABVP ने चार में से तीन प्रमुख पदों पर जीत हासिल की है. ABVP उम्मीदवार यश डबास अध्यक्ष चुने गए. उन्होंने कांग्रेस से जुड़े नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के विजय शंकर मीणा को 2,053 वोटों से हराया. इसके अलावा ABVP की रिया छावड़ी ने सचिव और लक्ष्य राज सिंह ने संयुक्त सचिव पद पर जीत दर्ज की. हालांकि, उपाध्यक्ष पद पर NSUI के बागी और निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु ने जीत हासिल की. NSUI चारों प्रमुख पदों में से किसी पर भी जीत दर्ज नहीं कर सकी.
दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव में परंपरागत रूप से मुख्य मुकाबला आरएसएस से जुड़े ABVP और कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI के बीच रहा है.