दिल्ली में वोटर लिस्टा के SIR अभियान को लेकर नागरिकों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है. 31 अगस्त 2026 को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने के बाद महज दो दिनों में ही 5.34 लाख से ज्यादा लोगों ने नाम जोड़ने और सुधार के लिए दावे-आपत्तियां दर्ज कराई हैं.
इस प्रक्रिया में फॉर्म दाखिल करने के मामले में दिल्ली का पश्चिम जिला सबसे आगे चल रहा है. इस बार डिजिटाइजेशन और डोर-टू-डोर वेरिफिकेशन के बाद जारी ड्राफ्ट लिस्ट में दिल्ली के कुल 1.45 करोड़ मतदाताओं में से करीब 47.58 लाख मतदाताओं (लगभग 33%) के नाम बाहर पाए गए हैं.
इसका मतलब ये है कि हर तीसरे वोटर का नाम शुरुआती लिस्ट में शामिल नहीं है. इसी तरह महाराष्ट्र में भी करीब 2.07 करोड़ नाम बाहर हुए हैं.
30 सितंबर 2026 तक दावा पेश कर सकेंगे दिल्लीवाले
फिलहाल जिन मतदाताओं के नाम इस लिस्ट में छूट गए हैं, वो 30 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन या ऑफलाइन माध्यम से फॉर्म-6 भरकर अपना दावा पेश कर सकते हैं. इन सभी दावों और आपत्तियों का निपटारा 29 अक्टूबर 2026 तक किया जाएगा. इसके बाद 4 नवंबर 2026 को फाइनल वोटर लिस्ट जारी की जाएगी.
आंकड़ों से पता चलता है कि 2025 के विधानसभा चुनाव में जिन इलाकों में सबसे कम मतदान हुआ था, वहीं सबसे ज्यादा नाम कटे हैं. इसका कारण अवैध निर्माण ढहाना, झुग्गी बस्तियों की शिफ्टिंग और लोगों का दूसरे स्थानों पर चले जाना है. इन इलाकों में बड़े पैमाने पर लोग अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट पाए गए, जिन्हें आयोग ने अनकलेक्टेड श्रेणी में रखा है।
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कटौती के बाद अब दिल्ली में शेष बचे वैध मतदाताओं की संख्या 97 लाख 53 हजार 577 है. मतदाताओं की संख्या के लिहाज से मटियाला विधानसभा क्षेत्र में अब भी सबसे ज्यादा वोटर हैं, जबकि दिल्ली कैंट में सबसे कम मतदाता बचे हैं.
क्यों कटे लाखों नाम?
वोटरों के नाम कटने के मुख्य कारण मतदाताओं का पिछले SIR की लिस्ट के मुताबिक मैपिंग या मिलान न हो पाना है. चुनाव अधिकारियों के मुताबिक, घर-घर जाकर किए गए मतदाता के सत्यापन अभियान के बाद इस ड्राफ्ट लिस्ट से नाम हटाए गए हैं. आयोग के मुताबिक ASDDF कैटेगरी यानी Absent, Shifted, Dead, Duplicate and Foreigners के तहत हटाए गए 47.5 लाख से ज्यादा मतदाताओं में से लगभग 43.3 लाख लोग ऐसे पाए गए जो या तो अपने पते से स्थायी रूप से शिफ्ट हो गए यानी कहीं और चले गए हैं. वो वेरिफिकेशन के समय अनुपस्थित मिले लिहाजा या तो फॉर्म ले नहीं सके या फिर भर कर जमा नहीं किया.
इसके अलावा मृतकों और एक से ज्यादा जगह की मतदाता सूची में नाम दर्ज हैं यानी डुप्लीकेट नामों को हटाया गया है. अवैध निर्माण ध्वस्त और झुग्गियों या बस्तियों का हटना भी बड़ा कारण है. कई इलाकों में अवैध निर्माण गिराए जाने और झुग्गी बस्तियों को दूसरी जगहों पर शिफ्ट किए जाने के कारण लोग वहां से नई आवंटित जगहों पर चले गए हैं. वहां उन्होंने वोटर लिस्ट में नाम नहीं डलवाए या प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए. इससे उनका वेरिफिकेशन नहीं हो पाया.
कम वोटिंग वाले क्षेत्रों पर भी फोकस है. जिन विधानसभा क्षेत्रों में 2025 के चुनावों में सबसे कम वोटिंग हुई थी, वहां डिजिटल वेरिफिकेशन की दर दिल्ली के औसत (67%) से काफी कम रही.
AAP का सरकार पर आरोप
किन तबकों के लोगों के वोटर ज्यादा कटे इस पूरे मामले पर दिल्ली में भारी राजनीतिक विवाद छिड़ा हुआ है. पार्टियों के अलग-अलग अपने अपने दावे हैं. आम आदमी पार्टी (AAP) का दावा है कि सत्ताधारी पार्टी जानबूझ कर उन इलाकों को निशाना बना रही है जहां गरीब, मजदूर, दलित-मुस्लिम और प्रवासी आबादी रहती है. उनका दावा है कि झुग्गी बस्तियों और अनधिकृत कॉलोनियों में करीब 50% घरों तक वेरिफिकेशन फॉर्म पहुंचा ही नहीं.
वहीं बीजेपी विपक्षी दलों के इन आरोपों को खारिज करते हुई कहती है कि ये एक पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया है. इसका मकसद फर्जी और अवैध प्रवासियों के नाम हटाकर वोटर लिस्ट को साफ-सुथरा बनाना है. सबसे ज्यादा प्रभावित विधानसभा क्षेत्र (प्रतिशत के आधार पर) दिल्ली की जिन सीटों पर सबसे ज्यादा प्रतिशत में वोट कटे हैं, उनमें मुख्य रूप से गरीब और अनधिकृत कॉलोनियों वाले क्षेत्र शामिल हैं.
तुगलकाबाद 47.85% दर के साथ सबसे ज्यादा प्रभावित है. दूसरे नंबर पर ओखला है जहां 45.33% यानी करीब 1.63 से 1.82 लाख वोट कटे हैं. वहीं, कस्तूरबानगर में 44.03% और बदरपुर में 42.67% वोटर घटे हैं.