दिल्ली-NCR में प्रदूषण के अलग-अलग सोर्स को लेकर कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट पेश की है. इस रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली की हवा में प्रदूषण फैलाने में ट्रांसपोर्ट सेक्टर की हिस्सेदारी 19 से 24% है. वहीं, बायोमास बर्निंग से 17 से 23% प्रदूषण होता है.
CAQM ने प्रदूषण के सोर्स का पता लगाने के लिए 2015 से 2025 के बीच हुई कई स्टडी का डेटा देखा है. इसके बाद इन सभी स्टडी के नतीजों को मिलाकर रिपोर्ट तैयार की गई है. यानी रिपोर्ट किसी एक स्टडी के आधार पर नहीं बनाई गई है.
दिल्ली के प्रदूषण में किन सोर्स का कितना हिस्सा?
CAQM के मुताबिक, दिल्ली और NCR की हवा पर स्थानीय प्रदूषण के साथ-साथ आसपास के इलाकों से आने वाले प्रदूषण का भी असर पड़ता है. रिपोर्ट में PM2.5 को दिल्ली के AQI को प्रभावित करने वाला प्रमुख प्रदूषक बताया गया है. सर्दियों के दौरान प्रदूषण के मुख्य सोर्स में ये शामिल हैं:
- ट्रांसपोर्ट: गाड़ियों से निकलने वाला धुआं. इसकी हिस्सेदारी 19 से 24% बताई गई है.
- बायोमास बर्निंग: कूड़ा, लकड़ी और फसल के बचे हिस्से जलाने से होने वाला प्रदूषण. इसकी हिस्सेदारी 17 से 23% है.
- इंडस्ट्री: फैक्ट्रियों और थर्मल पावर प्लांट से होने वाला प्रदूषण.
- धूल: सड़कों, मिट्टी और कंस्ट्रक्शन के काम से उड़ने वाली धूल.
- सेकेंडरी पार्टिकुलेट: अलग-अलग सोर्स से निकलने वाली गैसों के आपस में मिलने से हवा में बनने वाले बारीक कण.
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पराली जलाने की घटनाओं में पंजाब-हरियाणा में बड़ी गिरावट
CAQM ने रिपोर्ट में पराली जलाने की घटनाओं के आंकड़े भी दिए हैं. इसके मुताबिक, 15 सितंबर से 4 नवंबर के बीच साल 2021 के मुकाबले पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में 91.9% की कमी दर्ज की गई है. वहीं, हरियाणा में इसी अवधि के दौरान पराली जलाने की घटनाएं 98.4% कम हुई हैं.
कई स्टडी के डेटा को मिलाकर तैयार की गई रिपोर्ट
CAQM ने बताया कि दिल्ली की हवा पर सिर्फ स्थानीय प्रदूषण का असर नहीं पड़ता. आसपास के इलाकों से हवा के साथ आने वाला प्रदूषण भी इसमें योगदान देता है.
इसी वजह से रिपोर्ट तैयार करते समय 2015 से 2025 के बीच हुई अलग-अलग स्टडी को शामिल किया गया. इन स्टडी के नतीजों को मिलाकर प्रदूषण के सोर्स की हिस्सेदारी का आकलन किया गया है.