दिल्ली सरकार ने शहरी और ग्रामीण इलाकों में युवाओं, समुदायों, स्कूलों और कॉलेजों को मुख्य रूप से टारगेट करते हुए दो महीने के अभियान के साथ एचआईवी (HIV) जागरूकता, रोकथाम, जांच और इलाज अभियान को तेज कर दिया है. अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी (DSACS) द्वारा चलाया जा रहा यह अभियान "नो एड्स नो एड्स" (Know AIDS — No AIDS) के संदेश के तहत आयोजित किया जाएगा.
स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह ने कहा कि एचआईवी जागरूकता न केवल एक स्वास्थ्य संबंधी मुद्दा है, बल्कि यह एक सामाजिक जिम्मेदारी भी है, उन्होंने बताया कि इस अभियान का उद्देश्य सही जानकारी, समय पर जांच, उपचार और सहायता तक पहुंच में सुधार करना है, साथ ही एचआईवी के साथ जी रहे लोगों (PLHIV) द्वारा सामना किए जाने वाले कलंक और भेदभाव को दूर करना है.
इस अभियान की शुरुआत अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर रोहिणी स्थित डॉ. बीएसए अस्पताल में की गई, जहां 600 से अधिक छात्रों, गैर-सरकारी संगठनों (NGOs), भागीदार संगठनों और सामुदायिक हितधारकों ने भाग लिया. इस दौरान एक जागरूकता रैली का भी आयोजन किया गया.
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एक बयान में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, "हमें एचआईवी से जुड़ी भ्रांतियों और गलत अवधारणाओं को दूर करना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि एचआईवी से पीड़ित किसी भी व्यक्ति को उसकी स्थिति के कारण भेदभाव का सामना न करना पड़े." उन्होंने आगे कहा कि एक अच्छी तरह से सूचित और जिम्मेदार समाज के निर्माण में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है. उन्होंने छात्रों, शैक्षणिक संस्थानों, स्वास्थ्य पेशेवरों, नागरिक समाज संगठनों और सामुदायिक प्रतिनिधियों से इस अभियान से जुड़ने और एचआईवी की रोकथाम और इलाज पर वैज्ञानिक रूप से सटीक जानकारी फैलाने का आग्रह किया.
यह अभियान मुख्य रूप से एचआईवी के प्रसार और रोकथाम, शुरुआती जांच और उपचार, और 'एचआईवी और एड्स (रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम, 2017' के तहत एचआईवी पीड़ितों को मिलने वाले अधिकारों और सुरक्षा पर केंद्रित होगा.
इस अभियान के हिस्से के रूप में गांवों, कॉलोनियों और झुग्गी-झोपड़ियों में जागरूकता बैठकें आयोजित की जाएंगी. इसके साथ ही लोक कला प्रदर्शन, स्कूल और कॉलेज आउटरीच कार्यक्रम, फ्लैश मॉब, जागरूकता रैलियां, घर-घर जाकर अभियान चलाना, एचआईवी जागरूकता और जांच शिविर और डिजिटल व सोशल मीडिया आउटरीच कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे.
सरकार ने बताया कि इस अभियान में मामलों की त्वरित पहचान, समुदाय-आधारित एचआईवी स्क्रीनिंग, मोबाइल टेस्टिंग पहल और एकीकृत स्वास्थ्य शिविर भी शामिल होंगे. स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, "हमारा ध्यान एचआईवी जागरूकता को अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों से आगे ले जाकर समुदायों, शैक्षणिक संस्थानों और घरों तक पहुंचाना है. शुरुआती जांच और समय पर इलाज से एक बड़ा बदलाव लाया जा सकता है.
उन्होंने आगे कहा "इसके साथ ही, हमें एक ऐसा माहौल बनाने की जरूरत है, जहां लोग बिना किसी डर, कलंक या भेदभाव के सुरक्षित महसूस करते हुए अपनी जांच और इलाज करा सकें.'
सरकार के आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय एड्स और एसटीडी नियंत्रण कार्यक्रम के तहत वर्ष 2025-26 के दौरान दिल्ली में 14.29 लाख एचआईवी टेस्ट किए गए, जिनमें 5,570 एचआईवी मामलों की पहचान हुई. वर्तमान में, दिल्ली के 12 एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी (ART) केंद्रों पर एचआईवी/एड्स के साथ जी रहे 44,546 लोग सक्रिय देखभाल के तहत इलाज प्राप्त कर रहे हैं, जबकि लक्षित हस्तक्षेपों के माध्यम से मैप किए गए उच्च जोखिम वाले समूहों के 92.13 प्रतिशत हिस्से को कवर किया जा रहा है.
दिल्ली के कॉलेजों में 87 रेड रिबन क्लब कार्यरत हैं, और एचआईवी से जुड़ी सेवाओं को मजबूत करने के लिए संपूर्ण सुरक्षा केंद्र स्थापित किए गए हैं. दिल्ली सरकार 'दिल्ली स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी' द्वारा लागू एक समर्पित योजना के माध्यम से पात्र एचआईवी पीड़ितों को वित्तीय सहायता भी प्रदान कर रही है. अब तक इस योजना के तहत 8,047 लाभार्थियों को नामांकित किया जा चुका है, जिनमें एचआईवी/एड्स से पीड़ित लोग, एचआईवी पीड़ित बच्चे, और एचआईवी/एड्स से प्रभावित या संक्रमित अनाथ या बेसहारा बच्चे शामिल हैं.
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