दिल्ली में चोरी की एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसमें चोर ने न किसी घर का ताला तोड़ा, न दुकान का शटर उखाड़ा और न ही किसी गाड़ी से सामान उड़ाया. उसने सड़क किनारे रखी एक मशीन देखी और उसे ही पार कर दिया. मशीन की कीमत थी करीब 8 लाख रुपये. नाम था Digi-Tracker... अब सवाल ये कि आखिर 8 लाख की ऐसी कौन-सी मशीन थी, जिसे चोर सड़क किनारे से उठाकर ले गया?
कहानी दिल्ली के द्वारका इलाके की है. डाबड़ी इलाके में सड़क की खुदाई का काम चल रहा था. पाइपलाइन डालने के लिए जमीन की खुदाई की जा रही थी. इसी काम में Digi-Tracker मशीन का इस्तेमाल किया जा रहा था. काम के दौरान मशीन को साइट पर सड़क किनारे रखा गया था. यही जगह चोर के लिए मौका बन गई. वो आया और करीब 8 लाख रुपये की मशीन लेकर चलता बना.
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काम करने वाली टीम को जब मशीन गायब मिली तो हड़कंप मच गया. मामला पुलिस तक पहुंचा और डाबड़ी थाने में शिकायत दर्ज कराई गई. सवाल था कि मशीन चोरी किसने की? और इतनी बड़ी मशीन लेकर चोर गया कहां? पुलिस ने जांच शुरू की तो सबसे पहले आसपास लगे CCTV कैमरों को खंगालना शुरू किया गया. पुलिस ने करीब 5 किलोमीटर के दायरे में लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली.
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एक कैमरे से दूसरे कैमरे तक चोर के रास्ते को जोड़ने की कोशिश हुई. आखिरकार पुलिस को कुछ सुराग मिले. जांच आगे बढ़ी तो पुलिस की टीम मंगोलपुरी तक पहुंच गई. और फिर वहां से एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया. पुलिस ने आरोपी को पकड़ा तो कहानी और साफ हो गई. उसके पास से वही Digi-Tracker मशीन बरामद हो गई, जिसकी कीमत करीब 8 लाख रुपये बताई जा रही है.
पुलिस को शक है कि इस चोरी में आरोपी अकेला नहीं था. पुलिस अब आरोपी के दूसरे साथी की तलाश कर रही है. इसके अलावा उस वाहन का भी पता लगाया जा रहा है, जिसमें मशीन को चोरी करके ले जाया गया था. पुलिस अब ये पता लगाने में जुटी है कि मशीन को सड़क किनारे से उठाने के बाद किस गाड़ी में रखा गया और उसे मंगोलपुरी तक कैसे पहुंचाया गया.
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आखिर Digi-Tracker में ऐसा क्या है?
अब उस मशीन पर लौटते हैं, जिसके लिए पूरी कहानी शुरू हुई. Digi-Tracker कोई आम मशीन नहीं है. इसका इस्तेमाल सड़क की खुदाई और पाइपलाइन डालने जैसे कामों में किया जाता है. ये एक आधुनिक डिजिटल सर्वे और GPS ट्रैकिंग मशीन है. इसके जरिए जमीन के अंदर की वास्तविक भौगोलिक स्थिति का पता लगाने, जमीन की नाप-जोख करने और निर्माण कार्य से जुड़ा डिजिटल डेटा रिकॉर्ड करने में मदद मिलती है. उसकी कीमत करीब 8 लाख रुपये थी और उसका इस्तेमाल भी खास तकनीकी काम में होता था.