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LIVE: 'वकील को उठाकर पटका, पुलिस का बर्ताव बहुत खराब...' CJP प्रोटेस्ट से जुड़ी याचिकाओं पर SC में गरमागरम बहस

CJP प्रोटेस्ट से जुड़ी चार याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई हैं. इनमें राजनीतिक नेताओं और वकीलों की हिरासत, पुलिस की कार्रवाई, मेट्रो और सड़कों को बंद करने और फोन जैमर के इस्तेमाल पर सवाल उठाए गए हैं. कोर्ट में इन याचिकाओं की सुनवाई शुरू हो गई है.

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सुप्रीम कोर्ट में CJP प्रोटेस्ट से जुड़ी चार याचिकाओं पर सुनवाई शुरू हो गई है. (File Photo-ITG)
सुप्रीम कोर्ट में CJP प्रोटेस्ट से जुड़ी चार याचिकाओं पर सुनवाई शुरू हो गई है. (File Photo-ITG)

दिल्ली में जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हो गई है. सुनवाई के दौरान कोर्टरूम में वकीलों और पुलिस अधिकारियों के बीच बहस हो गई. वकीलों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने 10 अक्टूबर को प्रदर्शन के दौरान वकीलों की पिटाई की थी. इस दौरान कुछ वकीलों ने कोर्ट में पुलिसकर्मियों के बैठने की जगह को लेकर भी आपत्ति जताई. कल पिटाई का शिकार हुए वकील भी खुद अदालत में पेश हुए.

सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम नंबर 18 में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का लिंक काम नहीं कर रहा था. इस पर वकीलों ने अदालत से कोर्टरूम बदलने की मांग की. उन्होंने कहा कि वरिष्ठ अधिवक्ता केके वेणुगोपाल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होना है. ऐसे में लिंक का काम करना जरूरी है. वकीलों ने कोर्ट स्टाफ से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग लिंक को तुरंत ठीक करने की मांग की.

वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने भी इस मुद्दे पर आपत्ति जताई. उन्होंने कोर्ट स्टाफ से कहा कि बाहर की दुनिया को यह नहीं लगना चाहिए कि किसी एक पक्ष का साथ दिया जा रहा है. उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग लिंक बहाल करने की मांग की. इस दौरान कोर्टरूम में चल रही गतिविधियों की रिकॉर्डिंग किए जाने की बात भी सामने आई.

इसके बाद सुनवाई को 15 मिनट के लिए रोक दिया गया. कोर्ट रूम नंबर 5 में स्थानांतरित किया गया है. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में दोबारा सुनवाई शुरू हुई. 

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जस्टिस बागची बोले-सभी को एक-एक कर सुनेंगे

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू होते ही जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि अदालत के सामने दो मामले हैं. हालांकि, कुछ वकील ऐसे मामलों का भी उल्लेख करना चाहते हैं, जो सुनवाई की सूची में शामिल नहीं हैं. इस पर अदालत ने कहा कि सभी वकीलों को एक-एक करके सुना जाएगा. पहले मौखिक रूप से मामलों का उल्लेख सुना जाएगा और उसके बाद सूचीबद्ध मामलों पर सुनवाई होगी.

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अगर वकील सिर्फ मामले का उल्लेख करने और उसे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का अनुरोध कर रहे हैं, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है. जस्टिस बागची ने कहा कि यह असाधारण और जरूरी सुनवाई है. इस दौरान वकीलों ने सुझाव दिया कि वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और केके वेणुगोपाल को पहले अपनी बात रखने दी जाए. अदालत ने कहा कि केके वेणुगोपाल पहले बोलेंगे. जस्टिस बागची ने कहा कि अदालत में उनके जैसे वरिष्ठ और सम्मानित वकील मौजूद हैं, इसलिए उन्हें पहले सुना जाएगा.

जस्टिस बागची ने कहा कि अदालत के सामने दो विकल्प हैं. पहला, अवमानना याचिका पर सोमवार को सुनवाई की जाए. दूसरा, दोनों पक्षों को सुनकर सभी संबंधित मामलों को एक साथ जोड़ दिया जाए. केके वेणुगोपाल ने अदालत से पूछा कि क्या इस मामले में नोटिस जारी किया जाएगा. इस पर जस्टिस बागची ने कहा कि सॉलिसिटर जनरल को सुनने के बाद इस बारे में फैसला लिया जाएगा.

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कपिल सिब्बल ने कहा कि एक याचिका अवमानना के मुद्दे से कहीं बड़े सवाल उठाती है. अदालत ने बताया कि मेनका गुरुस्वामी की ओर से हिरासत के खिलाफ बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की गई है. इसके अलावा एक दूसरी याचिका भी है. अदालत ने सॉलिसिटर जनरल से कहा कि उन्हें अपना पक्ष रखने का पर्याप्त मौका दिया जाएगा.

सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू करने और प्रतिबंधित क्षेत्र से बाहर लोगों को हिरासत में लिए जाने का मुद्दा उठाया. उन्होंने आरोप लगाया कि चार किलोमीटर के दायरे से बाहर भी लोगों को हिरासत में लिया जा रहा है. कुछ लोगों को ट्रेनों से भी उठाए जाने का दावा किया गया. सिब्बल ने दिल्ली मेट्रो बंद करने का मुद्दा भी उठाया. इस पर अदालत ने कहा कि एमए बेबी की याचिका में मेट्रो बंद करने से जुड़ा एक अंतरिम आवेदन पहले से मौजूद है.

वकीलों ने बिना आदेश सार्वजनिक किए इंटरनेट सेवाएं बंद करने का मुद्दा भी उठाया. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह माहौल को तनावपूर्ण नहीं बनाना चाहता. अदालत ने कहा कि वह जानती है कि इन घटनाओं से वकीलों को गहरी तकलीफ पहुंची है और वह किसी भी मुद्दे को छोटा करके नहीं देखना चाहती. सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने इस असाधारण सुनवाई के लिए अदालत का धन्यवाद किया. जस्टिस बागची ने जवाब दिया कि अदालत हमेशा देश की सेवा के लिए तैयार है.

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दरअसल, दिल्ली में 10 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन के बाद सुप्रीम कोर्ट में 4 से अधिक याचिकाएं दायर की गई हैं. इनमें नेताओं, वकीलों और आम लोगों को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में लेने का मुद्दा उठाया गया है. पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शन के दौरान वकीलों के साथ मारपीट पर भी सवाल उठाए गए हैं.

वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने राजनीतिक नेताओं और वकीलों की कथित गैरकानूनी हिरासत का मुद्दा उठाया है. वहीं, मनोज कुमार झा की याचिका में बड़े पैमाने पर हिरासत और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं. इसमें आरोप लगाया गया है कि कुछ नेताओं को उनके घरों से बाहर निकलने से भी रोका गया.

वकील अमन प्रसाद ने भी वकीलों और मीडियाकर्मियों के साथ मारपीट और हिरासत का मामला उठाया है. उनकी याचिका में प्रदर्शन स्थल से दूर के इलाकों में आम लोगों को हिरासत में लेने का आरोप भी शामिल है.

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मेट्रो स्टेशन बंद करने का मामला भी पहुंचा कोर्ट

वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने दिल्ली मेट्रो के स्टेशन बंद करने के मामले में अवमानना याचिका दायर की थी. इसमें सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया है. याचिकाकर्ता का कहना है कि कोर्ट के निर्देश के बावजूद कई मेट्रो स्टेशनों के गेट बंद रखे गए.

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इससे पहले 9 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सुरक्षा के नाम पर सार्वजनिक परिवहन को पूरी तरह बंद नहीं किया जाना चाहिए. प्रशासन व्यवस्था को नियंत्रित कर सकता है, लेकिन आम यात्रियों, छात्रों और कामगारों की आवाजाही बाधित नहीं होनी चाहिए.

इस मामले में परिवहन से जुड़े एक संगठन ने भी सड़कें बंद होने से परिवहन सेवाओं और कारोबार पर असर पड़ने का मुद्दा उठाया है. फिलहाल सुनवाई के दौरान वकीलों ने पुलिस की कार्रवाई और कोर्टरूम में हुई व्यवस्थाओं को लेकर आपत्तियां दर्ज कराई हैं.
 

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