तारीख पर तारीख.... से याचिकाकर्ताओं और मुजरिमों को ऊबते तो बहुत बार देखा है. लेकिन क्या कभी आपने सुना है कि कोई वकील अदालती फैसलों में हो रही देरी से झुंझला गया हो? ऐसा ही एक मामला पाकिस्तान के हैदराबाद स्थित सिंध हाईकोर्ट से सामने आया है.
दरअसल अदालत के हैदराबाद सर्किट बेंच में एक जज ने पिछले 11 महीनों से फैसला सुरक्षित रखा हुआ था. अदालत के फैसले में हो रही देरी पर एक वकील भड़क उठा और उसने गुस्से में आकर अदालत के अंदर अपनी कुर्सी में ही आग लगा दी.
सिंध हाईकोर्ट के हैदराबाद सर्किट बेंच के जस्टिस जवाद अकबर सावाना ने नवाबशाह से जुड़े एक सिविल लैंड विवाद मामले में फैसला सुनाने से साफ इनकार कर दिया. इसके बाद, मामले में एक पक्ष की पैरवी कर रहे गुस्साए वकील सिकंदर भट्टी ने कोर्ट रूम में अपनी सीट पर आग लगा दी.
11 महीनों से लंबित फैसले से परेशान थे वकील
हैदराबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अयाज टुनियो ने इस घटना की पुष्टि करते हुए कहा, 'ये फैसला पिछले 11 महीनों से पेंडिंग था और आज आखिरकार अदालत में वकील सिकंदर भट्टी का सब्र टूट गया.' उन्होंने कहा कि बार एसोसिएशन इस पूरी घटना की जांच करेगी. साथ ही उन्होंने ये भी बताया कि जस्टिस सावाना के पास ऐसे कई फैसले महीनों से लंबित पड़े हैं, जिससे मुवक्किलों और वकीलों में काफी निराशा और गुस्सा है.
अदालत के सूत्रों के मुताबिक, वकील सिकंदर भट्टी इसलिए खासतौर पर गुस्से में थे क्योंकि ये मामला उनके अपने परिवार से जुड़ा हुआ था. नवाबशाह में कई सालों से जमीन के एक विवाद को लेकर चल रहा था.
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अयाज टुनियो ने बताया कि वकीलों ने हाल के दिनों में जस्टिस सावाना से उनके चैंबर में मुलाकात की थी और उनसे कई मामलों में सुरक्षित रखे गए फैसलों को जल्द सुनाने की अपील की थी.