दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच अब सियासत एक नया रुख अख्तियार करती नजर आ रही है. आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच ये दिखाने की होड़ मच गई है कि कौन असली तेवर के साथ सड़क पर उतरा है.
दोनों दल वोटों की चोरी और चुनाव आयोग के खिलाफ हल्ला बोल रहे हैं, लेकिन तालमेल की कमी और विरोध के असल क्रेडिट की जंग साफ तौर पर दिखाई दे रही है.
आम आदमी पार्टी ने कश्मीरी गेट स्थित सिंधी अकादमी के पास से दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के दफ्तर तक मार्च शुरू किया. प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए थे और भारी पुलिस फोर्स तैनात की गई थी.
आप नेता हटे तो कांग्रेस वाले डटे
इस दौरान भारी पुलिस फोर्स ने प्रदर्शनकारी नेताओं और कार्यकर्ताओं को रास्ते में ही रोक लिया. दिलचस्प बात ये रही कि जैसे ही 'आप' कार्यकर्ता बैरिकेड्स से हटे, वैसे ही कांग्रेस के कार्यकर्ता अपने झंडे और तख्तियां लेकर वहां पहुंच गए.
'आप' नेता सौरभ भारद्वाज ने एक बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा, 'हम यहां लेफ्ट पार्टियों के बुलावे पर आए हैं. हम कांग्रेस को भी हमारे साथ जुड़ने का न्योता देते हैं. कल का विरोध प्रदर्शन का आह्वान INDIA गठबंधन का था और हम उसका हिस्सा नहीं हैं. अगर वो भारत के नाम पर विरोध करते हैं, तो हम उसमें जरूर शामिल होंगे.'
राहुल गांधी बोले- ज्ञानेश्वर कुमार वैध चुनाव आयुक्त नहीं
उधर, राहुल गांधी ने अपना प्रदर्शन जारी रखते हुए मीडिया से जंतर-मंतर पर धरना देने का ऐलान कर दिया है. उन्होंने कहा, 'जैसा कि मैंने कल कहा था, लोकसभा और राज्यसभा के करीब 300 सांसद कल मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलना चाहते थे, लेकिन उन्होंने मिलने से इनकार कर दिया. दिल्ली पुलिस ने हमें रोका और कहा कि हम वहां प्रदर्शन नहीं कर सकते.'
राहुल गांधी ने आगे कहा, 'आज हमारा प्लान तय प्रोटेस्ट साइट, जंतर-मंतर पर जाने का है और वहां फिर से बैठकर देश को बताना है कि, हमारे लिए, ज्ञानेश कुमार देश के वैध इलेक्शन कमिश्नर नहीं हैं.'
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चुनाव आयोग और SIR को लेकर भले ही विपक्ष चुनाव आयोग के खिलाफ एकजुट होने का दावा कर रहा हो, लेकिन जमीन पर आम आदमी पार्टी और कांग्रेस की ये आपसी खींचतान विपक्ष की एकता पर कई बड़े सवाल खड़े कर रही है.