भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी करके रेपो रेट को 5.50 फीसदी करने से फ्लोटिंग रेट लोम लोन लेने वालों के लिए लोन लेने की लागत बढ़ जाएगी, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि बैंक इस बढ़ोतरी कस्टमर्स पर कैसे लागू करेंगे.
कस्टमर्स या तो पहले वाले टर्म को बनाए रखते हुए ज्यादा EMIs पेमेंट कर सकते हैं. वहीं मौजूदा ईएमआई के साथ आप ज्यादा टेन्योर बढ़ा सकते हैं. रेपो रेट बढ़ने पर ये दोनों विकल्प बैंक की ओर से कस्टमर्स को दिए जा सकते हैं, लेकिन सवाल ये है कि आपको क्या करना चाहिए- ज्यादा ईएमआई देनी चाहिए या फिर टेन्योर बढ़ाना चाहिए? आइए विस्तार से समझते हैं...
ज्यादा EMIs देना किसके लिए होगा सस्ता?
जिन उधारकर्ताओं के पास इसे वहन करने की क्षमता है, उनके लिए उच्च ईएमआई लेना आम तौर पर सस्ता विकल्प होता है, क्योंकि लोन की अवधि बढ़ाने से लोन की पूरी अवधि में भुगतान किया गया कुल ब्याज काफी बढ़ सकता है. लेकिन जिनके पास महीने का खर्च ज्यादा है, उनके लिए ज्यादा ईएमआई का पेमेंट परेशानी बढ़ा सकता है.
उच्च ईएमआई या लंबी अवधि?
जब फ्लोटिंग-रेट होम लोन महंगा हो जाता है, तो कर्ज लेने वालों के पास आमतौर पर तीन विकल्प होते हैं- उच्च ईएमआई स्वीकार करना और मूल अवधि को बनाए रखना, अवधि बढ़ाकर ईएमआई को लगभग अनचेंज रखना, या दोनों का संयोजन करना.
पहले विकल्प में मंथली पेमेंट अधिक होगा, लेकिन इससे तय डेट पर कर्ज फ्री हो जाएगा. दूसरा विकल्प घरेलू बजट को तत्काल राहत प्रदान कर सकता है, लेकिन लोन अधिक समय तक बकाया रहता है और उस पर ब्याज भी अधिक समय तक लगता है.
बैंकबाजार के सीईओ अधिल शेट्टी ने कहा कि होम लोन लेने वालों के लिए, इससे ईएमआई की राशि बढ़ जाएगी या लोन की अवधि लंबी हो जाएगी, यह लोन देने वाली संस्था पर निर्भर करता है. रेपो रेट से जुड़े फ्लोटिंग-रेट लोन आमतौर पर कुछ महीनों के भीतर रीसेट हो जाते हैं. कई लोन देने वाली संस्थाएं ईएमआई को अनचेंज रखने के लिए लोन की अवधि बढ़ा देती हैं, जो आसान लगता है लेकिन समय के साथ महंगा पड़ता है.
25-बीपीएस की बढ़ोतरी से आपकी EMIs पर क्या असर पड़ेगा?
25 सालों के लिए 7.5% की ब्याज दर पर ₹40 लाख के होम लोन के लिए, EMI लगभग ₹29,559 है. अगर ब्याज दर 25 बीपीएस बढ़कर 7.75% हो जाती है, तो EMI बढ़कर लगभग ₹30,213 हो जाती है यानी प्रति माह ₹654 की बढ़ोतरी होगी.
वहीं अगर उच्च ब्याज दर पूरे 25 वर्षों की अवधि के लिए अनचेंज रहती है, तो कुल ब्याज भुगतान लगभग ₹48.68 लाख से बढ़कर ₹50.64 लाख हो जाएगा, जिससे ब्याज भार में लगभग ₹1.96 लाख की बढ़ोतरी होगी.
लोन का टेन्योर बढ़ाने से लागत क्यों बढ़ सकती है?
मान लीजिए कि ब्याज दर में बढ़ोतरी के बाद लोन लेने वाले अपनी EMI में बढ़ोतरी नहीं चाहता है, तो बैंक इसके बजाय चुकौती अवधि बढ़ा सकता है. इससे मासिक बजट को मैनेज करना आसान हो सकता है, लेकिन कर्जदार को लंबे समय तक ब्याज का भुगतान करना जारी रखना होगा.
उदाहरण के लिए, 50 लाख रुपये के लोन पर, प्रति माह लगभग 817 रुपये की ईएमआई बढ़ोतरी होगी. वहीं अगर टेन्योर बढ़ाया जाता है, तो एक्स्ट्रा महीने या सालों तक लोन भुगतान करना पड़ सकता है. इसका मतलब है कि आपको लोन पर ज्यादा पैसा चुकाना पड़ेगा.
शेट्टी ने कहा कि कर्जदारों को अपने ऋणदाता से यह पूछना चाहिए कि ब्याज दर में बदलाव कैसे लागू होगा और समय-समय पर अग्रिम भुगतान करने पर विचार करना चाहिए. उन्होंने कहा कि हर साल थोड़ी-थोड़ी एडवांस भुगतान करने से अतिरिक्त ब्याज को सीमित करने में मदद मिल सकती है.