
गांधी जयंती के मौके पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने मुंबई के शिवाजी पार्क से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 'जेल भरो आंदोलन' की शुरुआत की.
इस बीच सोशल मीडिया पर सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके को थप्पड़ मारने का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. कुछ लोग दावा कर रहे हैं कि मुंबई में विरोध प्रदर्शन के दौरान ऐसा हुआ.
इसे एक्स पर शेयर करते हुए एक व्यक्ति ने लिखा, “मुंबई में आज गांधी जयंती के शुभ मुहूर्त में कॉकरोच दीपके को... दे थप्पड़.. दे थप्पड़.. दे थप्पड़…”

लेकिन आजतक फैक्ट चेक ने पाया कि वायरल वीडियो मुंबई का नहीं है. ये 15 जून, 2026 का वीडियो है जब जयपुर में एक सभा को संबोधित करने से ठीक पहले एक व्यक्ति ने दीपके को थप्पड़ मार दिया था.
कैसे पता चली सच्चाई?
वीडियो के कीफ्रेम्स को रिवर्स सर्च करने से ये हमें आजतक और न्यूज 24 के यूट्यूब चैनलों पर 15 जून, 2026 को अपलोड किया हुआ मिला. यहां दी गई जानकारी के मुताबिक, जयपुर में भीड़ के बीच मौजूद दीपके को एक आदमी ने थप्पड़ मार दिया था.
हिन्दुस्तान की 15 जून की रिपोर्ट के मुताबिक, जयपुर में कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से नीट पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था में सुधार, भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों और बढ़ती बेरोजगारी के खिलाफ प्रदर्शन आयोजित किया गया था. दीपके के शहीद स्मारक पहुंचने पर समर्थकों ने उन्हें कंधों पर उठा लिया. तभी भीड़ में मौजूद एक युवक ने उन्हें थप्पड़ मार दिया. इसके बाद दीपके के समर्थकों ने युवक को पकड़कर पीटना शुरू कर दिया. रिपोर्ट में बताया गया है कि पुलिस ने स्थिति संभाली थी और आरोपी को अपने साथ ले गई थी.
ABP न्यूज की 15 जून की रिपोर्ट के अनुसार, थप्पड़ मारने वाले व्यक्ति ने दीपके को जिहादी कहा था और ये आरोप लगाया था कि पेपर लीक के बहाने वो युवाओं को बरगला रहा है. आरोपी ने खुद को जयपुर का निवासी और राष्ट्रवादी बताया था.
हमें मुंबई में प्रदर्शन के दौरान दीपके को थप्पड़ मारने की कोई विश्वसनीय रिपोर्ट नहीं मिली. साफ है कि वीडियो पुराना है और मुंबई का नहीं, बल्कि जयपुर में जून में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान का है.
क्या हैं सीजेपी की तीन प्रमुख मांगें?
ये आंदोलन तीन प्रमुख मांगों के साथ शुरू किया गया है. सीजेपी की पहली मांग है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो. दूसरी मांग है कि एसआईआर की प्रक्रिया बंद की जाए और 2025 की वोटर लिस्ट के आधार पर ही चुनाव हों. वहीं, तीसरी मांग है कि चुनाव आयुक्त की चयन प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए.