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10 साल बाद जेल से घर लौटी तुलसी, बिखरा परिवार, इमोशनल कर देगा नया अध्याय

'क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2' के नए सीजन में 10 साल बाद तुलसी की जेल से रिहाई और शांति निकेतन लौटने की कहानी दिखाई गई है. परिवार के बंटवारे और बदलते रिश्तों के बीच तुलसी का संघर्ष और भावनात्मक पल दर्शाए गए हैं.

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10 साल के लीप में क्या बदला? (Photo: Screengrab)
10 साल के लीप में क्या बदला? (Photo: Screengrab)

'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' टेलीविजन के आइकॉनिक शोज में से एक है. पहले सीजन की तरह इसका दूसरा सीजन भी हिट रहा है. 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2' की कहानी 10 साल आगे बढ़ चुकी है. बेटे की हत्या के जुर्म में तुलसी की 10 साल की सजा पूरी हो चुकी है. जेल में मुश्किल दिन काटने के बाद तुलसी नई उम्मीद के साथ अपने घर शांति निकेतन पहुंचती है. आइए जानते हैं कि शो का नए अध्याय का पहला चैप्टर कैसा रहा. 

'क्योंकि 2' में 10 साल का लीप 
शुक्रवार के एपिसोड की शुरुआत तुलसी और अरुणधति की बातचीत से होती है. अरुणधति, तुलसी को बताती है कि उसके बेटे की मौत की जिम्मेदार वो नहीं है. उस एक हादसे ने उसकी जिंदगी बदल दी है. तुलसी के साथ रहकर अरुणधति बिल्कुल बदल चुकी है. तुलसी उन दिनों को याद करती है, जब अरुणधति और दूसरे कैदियों ने उसका जीना मुश्किल कर दिया था. 

इस बीच करण अपने बैग पैक कर रहा होता है और नंदिनी से शांति निकेतन छोड़कर उसके साथ जाने को कहता है. नंदिनी मना कर देती है, कहती है कि वो घर नहीं छोड़ सकती, क्योंकि अब भी उसके परिवार के लिए जिम्मेदारियां हैं. ये बात दोनों के बीच तीखी बहस में बदल जाती है.

कहानी में दस साल का लीप आ जाता है. तुलसी जेल की सजा पूरी कर के निकलते समय बंदियों को भावुक विदाई देती है. तुलसी बाहर जाते हुए बंदियों को अच्छा जीवन जीने की सलाह देती है और सब इमोशनल हो जाते हैं. बाहर जेलर तुलसी से पूछता है कि उसके परिवार में से कोई उसे लेने क्यों नहीं आया. तुलसी बताती है कि उसने अपनी अग्रिम रिहाई के बारे में जानबूझकर परिवार को नहीं बताया. फिर वो ऑटो लेकर घर के लिए रवाना हो जाती है. 

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जब तुलसी शांतिनिकेतन पहुंचती है, तो उसे वहां एक हैरान कर देने वाला नजारा नजर आता है. शांतिनिकेतन में अब दो हिस्सों में बट चुका है. दामिनी अपने परिवार के साथ एक हिस्से में रहती है, जबकि नियति और नंदिनी दूसरे हिस्से में रहती हैं.  तुलसी जब आती है तो पुरानी यादों से भर उठती है. वह आंगन में दो तुलसी के पौधे देखती है, तभी सिक्योरिटी गार्ड उसे रोकता है. तुलसी गार्ड से कहती है कि वो उसके मालिक की मां है. बॉडीगार्ड ने तुलसी से कहा कि उसके मालिक की कोई मां नहीं है. ये सब सुनकर तुलसी दंग रह जाती है. 

कुछ ही देर बाद वहां एक शख्स आता है और वो तुलसी को कैटरिंग की लड़की समझ आ जाती है. तुलसी उससे कहती है कि वो कैटरिंग के लिए नहीं आई है. पर फिर भी वो शख्स उससे मदद मांगता है. घर के इन बदले हुए हालातों से भ्रमित होकर तुलसी शांतिनिकेतन में वेश बदलकर प्रवेश करती है और फिर बाद में अपना असली परिचय सबको बता देती है. 

तुलसी के बच्चे उसे अपनाएंगे या नहीं, ये आने वाले एपिसोड में पता चलेगा. पर हां जिस तरह 10 सालों में तुलसी की जिंदगी बदली है, उसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी. कुल मिलाकर एपिसोड इमोशनल कर देने वाला रहा. 

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