
नेपाल एक बार फिर सांप्रदायिक तनाव की आग में झुलस रहा है. भारत के बिहार से सटे सुनसरी जिले के देवानगंज से शुरू हुआ विवाद अब मधेश और कोशी प्रांत के कई जिलों तक फैल चुका है. हालात इतने बिगड़ गए कि कई इलाकों में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगाना पड़ा, पुलिस को गोली चलानी पड़ी और अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है. हिंसा के बाद नेपाल सरकार की भूमिका भी सवालों के घेरे में है. सुरक्षा विशेषज्ञों, विपक्ष और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का आरोप है कि समय रहते राजनीतिक और प्रशासनिक हस्तक्षेप नहीं होने से हालात बेकाबू हो गए.
पूरा विवाद रविवार को सुनसरी जिले की देवानगंज ग्रामीण नगरपालिका के कप्तानगंज इलाके में दो समुदायों के धार्मिक कार्यक्रमों के दौरान हुए विवाद से शुरू हुआ. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि यह मामला कांवड़ यात्रा से जुड़ा है, जब लाउडस्पीकर के इस्तेमाल और धार्मिक झंडे दिखाने को लेकर झड़पें हुईं.

देखते ही देखते दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए. हालात बिगड़ने पर पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए गोली चलाई. इस गोलीबारी में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग और सुरक्षाकर्मी घायल हुए. इसके बाद विरोध प्रदर्शन और हिंसा दूसरे जिलों तक फैल गई.
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सुनसरी के बाद हिंसा सप्तरी, सिराहा, धनुषा, पर्सा और बिरगंज तक पहुंच गई. सिराहा के गोलबाजार में प्रदर्शन के दौरान 15 वर्षीय गणेश यादव की भी गोली लगने से मौत हो गई. कई जगह प्रदर्शनकारियों ने आगजनी की और इसकी वजह से बाजारों को बंद करना पड़ा. प्रशासन ने सिराहा, धनुषा, बिरगंज और सुनसरी के कई इलाकों में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लागू कर दिया. भारत-नेपाल सीमा से जुड़े कई अहम मार्गों पर भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है.
सरकार पर क्यों उठ रहे सवाल?
विपक्ष का आरोप है कि प्रधानमंत्री बालेन शाह और गृह मंत्री सुदन गुरुंग ने हिंसा के शुरुआती दिनों में राजनीतिक पहल नहीं की. प्रधानमंत्री ने चार दिन बाद सुरक्षा अधिकारियों से बैठक की, जबकि राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक पांचवें दिन बुलाई गई. स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और समुदाय के नेताओं से समय पर संवाद नहीं होने के कारण तनाव और बढ़ गया. पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने भी सरकार की प्रतिक्रिया की आलोचना की है और हिंसा रोकने में सरकार की कोशिशों को नाकाफी बताया है.

भारत से सटे इलाकों में कर्फ्यू क्यों?
सुनसरी, पर्सा, धनुषा और सिराहा जिले बिहार की सीमा से सटे हुए हैं और व्यापारिक नजरिए से बेहद संवेदनशील माने जाते हैं. हिंसा फैलने और नए प्रदर्शन की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने कर्फ्यू और प्रतिबंध लागू की है. बिरगंज में पांच या उससे अधिक लोगों के इकट्ठा होने, रैली, धरना और सार्वजनिक सभाओं पर रोक लगा दी गई है. सुनसरी में ईस्ट-वेस्ट हाईवे समेत कई इलाकों में भी कर्फ्यू बढ़ा दिया गया है.

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मृतकों को 'शहीद' घोषित करने की मांग
देवानगंज गांवपालिका ने पुलिस गोलीबारी में मारे गए दो लोगों को स्थानीय स्तर पर 'शहीद' घोषित किया है. नेपाल सरकार से उन्हें आधिकारिक शहीद का दर्जा देने की सिफारिश की गई है. दोनों परिवारों को 10-10 लाख नेपाली रुपये की सहायता देने का फैसला हुआ है. गंभीर रूप से घायल लोगों को दो लाख और अन्य घायलों को 50 हजार नेपाली रुपये देने का भी ऐलान किया गया है. साथ ही, हिंसा में हुई संपत्ति के नुकसान का आकलन कर मुआवजे की मांग भी सरकार से की गई है.