scorecardresearch
 

फिल्म में हिंसा इतनी कि मच गया बवाल, अटक गई रिलीज, फिर मस्क के दांव ने पलटी बाजी!

हॉलीवुड एक्टर आर्मी हैमर फिल्म में सैंडर्स नाम के एक अमेरिकी शख्स के किरदार में हैं, जो यूरोप के एक अनाम शहर में रहता है. फिल्म की शुरुआत बेहद हिंसक घटना से होती है, जिसके बाद उसका भरोसा पुलिस, न्याय व्यवस्था और कानून से टूटने लगता है.

Advertisement
X
जर्मनी में सिटिजन विजिलांटे की लिरीज को लेकर खूब बवाल हुआ था. (Photo: ITG)
जर्मनी में सिटिजन विजिलांटे की लिरीज को लेकर खूब बवाल हुआ था. (Photo: ITG)

जर्मनी में दक्षिणपंथी AfD पार्टी की चुनावी जीत के बीच एक फिल्म फिर चर्चा में है. नाम है सिटिजन विजिलांटे. इस फिल्म पर जर्मनी में इतना बवाल मचा कि इसे बैन कर दिया गया. इससे परेशान और हताश निर्देशक एलॉन मस्क की शरण में पहुंचे और उनसे मदद की गुहार लगाई और बात बन गई.

इस समय यूरोप के कई देशों में दक्षिणपंथी रुझान है. कई देशों में कट्टरपंथी दक्षिणपंथी पार्टियां सत्ता में लौटी हैं या ताकतवर बनकर उभरी हैं. ताजा मामला जर्मनी का है. यहां एएफडी करीब 44 फीसदी वोट के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. यह जर्मनी के लिए बड़ा राजनीतिक मोड़ माना जा रहा है, खासकर इसलिए क्योंकि पार्टी का एजेंडा इमिग्रेशन और प्रवासन को लेकर बेहद सख्त है. ऐसे में इसी साल रिलीज हुई सिटिजन विजिलांटे की चर्चा फिर से होने लगी है.

यह फिल्म प्रवासी अपराध, कमजोर न्याय व्यवस्था और उस गुस्से की कहानी कहती है जिसमें एक आम आदमी कानून अपने हाथ में लेने लगता है. सिटिजन विजिलांटे के निर्देशक जर्मन फिल्ममेकर उवे बोल हैं, जबकि फिल्म की शूटिंग क्रोएशिया में हुई है. इसमें हॉलीवुड एक्टर आर्मी हैमर मुख्य भूमिका में हैं. फिल्म अंग्रेजी भाषा में बनी है. इसका प्रोडक्शन मूल रूप से यूरोपीय संदर्भ में है, लेकिन इसकी कहानी और निर्देशक की राजनीतिक टिप्पणियों की वजह से इसका सबसे बड़ा विवाद जर्मनी में ही पैदा हुआ.

Advertisement

क्या है फिल्म की कहानी, जिस पर मचा बवाल

एक्टर आर्मी हैमर फिल्म में सैंडर्स नाम के एक अमेरिकी शख्स के किरदार में हैं, जो यूरोप के एक अनाम शहर में रहता है. फिल्म की शुरुआत बेहद हिंसक घटना से होती है, जिसके बाद उसका भरोसा पुलिस, न्याय व्यवस्था और कानून से टूटने लगता है. इसके बाद वह खुद अपराधियों को सजा देने निकल पड़ता है. वह बलात्कारियों, हिंसक अपराधियों के साथ-साथ उन जजों और अधिकारियों को भी निशाना बनाता है, जिन्हें वह अपराधियों को बचाने वाला मानता है यानी कहानी का केंद्रीय सवाल है कि जब किसी नागरिक को लगे कि कानून अपराधियों को सजा देने में नाकाम है, तो क्या उसे खुद न्याय करने का अधिकार मिल जाता है? यही वह बिंदु है जहां फिल्म सामान्य एक्शन-थ्रिलर से निकलकर राजनीतिक बहस का हिस्सा बन जाती है.

d
सिटिजन विजिलांटे फिल्म का पोस्टर

फिल्म के सबसे विवादित हिस्से का संबंध प्रवासी अपराध से है. कहानी में अपराधियों में प्रवासी किरदार प्रमुख हैं और फिल्म यूरोप में प्रवासी अपराध तथा कमजोर कानून-व्यवस्था की एक बेहद अंधेरी तस्वीर पेश करती है. एक शुरुआती दृश्य में एक मां की उसके बच्चे के सामने हत्या दिखाई जाती है. इसके आगे यौन हिंसा और सामूहिक बलात्कार जैसे विचलित कर देने वाले सीन हैं. 

Advertisement

आलोचकों का कहना है कि फिल्म प्रवासियों, खासकर अश्वेत और मुस्लिम किरदारों को बड़े पैमाने पर अपराधी के रूप में चित्रित करती है और एक श्वेत नायक की हिंसक आत्मन्याय की कार्रवाई को HEROIC के अंदाज में पेश करती है. दूसरी ओर निर्देशक उवे बोल का कहना है कि वह सिर्फ उस गुस्से और न्याय व्यवस्था से पैदा हुई निराशा को दिखा रहे हैं, जिसे मुख्यधारा की राजनीति और मीडिया नजरअंदाज करती है.

फिल्म से क्या दिक्कत थी?

उवे बोल ने फिल्म को 2016 के हैम्बर्ग मामले से प्रेरित बताया है. इस मामले में 14 साल की एक लड़की के साथ कई युवकों ने गैंगरेप किया था और बाद में आरोपियों को मिली सजा और उसके कुछ हिस्सों को लेकर बहस हुई.  

्
सिटिजन विजिलांटे फिल्म का एक सीन

लेकिन फिर जर्मनी में ऐसा क्या हुआ कि फिल्म को बैन कहा जाने लगा? शुरुआत में जर्मनी की FSK ने फिल्म को उम्र का कोई प्रमाणपत्र देने से इनकार कर दिया. इसके चलते थिएटर्स  और होम-एंटरटेनमेंट रिलीज मुश्किल हो गई और निर्देशक उवे बोल ने इसे पॉलिटिकल सेंसरशिप बताया. 

FSK की असली आपत्ति क्या थी? बाद में FSK ने अपने आधिकारिक फैसले में साफ किया कि होम-एंटरटेनमेंट के लिए फिल्म को प्रमाणपत्र इसलिए नहीं दिया गया क्योंकि इसमें हिंसा को बहुत एक्सट्रीम लेवल पर दिखाया गया था. इससे किशोर दर्शकों में हिंसा के प्रति संवेदनहीनता और गलत दिशा में जाने का जोखिम पैदा हो सकता था.

Advertisement

इसके बाद कहानी में एलन मस्क की एंट्री हुई. जब जर्मनी में फिल्म की नियमित रिलीज का रास्ता बंद नजर आ रहा था. निर्देशक उवे बोल ने एलन मस्क से सार्वजनिक रूप से मदद की अपील की. इसके बाद मस्क ने 25 जून 2026 को  X पर फिल्म को रिलीज कर दिया. फिल्म वहां करीब 48 घंटे तक स्ट्रीम की गई. इस कदम ने फिल्म को अचानक अंतरराष्ट्रीय चर्चा में ला दिया और जर्मनी में फिल्म को रिलीज के लिए सर्टिफिकेट दिया गया. इस तरह फिल्म थिएटर्स तक पहुची. 

बता दें कि जर्मनी की धुर दक्षिणपंथी सरकार एएफडी को लगभग 44 फीसदी वोट मिले हैं. यह फिल्म ऐसे समय पर चर्चा में आई है, जब जर्मनी में इमिग्रेशन, अपराध, राष्ट्रीय पहचान और कानून-व्यवस्था सबसे बड़े मुद्दों में हैं. सिटिजन विजिलांटे भी इन्हीं सवालों को एक बेहद अतिरंजित और हिंसक सिनेमाई रूप में सामने रखती है कि क्या राज्य नागरिकों की सुरक्षा करने में विफल हो रहा है?

---- समाप्त ----

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement