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'नहीं करनी वो नौकरी...' विदेश के जॉब ऑफर पर बोले अकेले नदी साफ करने वाले बिट्टू तबाही

मध्य प्रदेश के 20 साल के सुरेंद्र सिंह चौधरी, जिन्हें सोशल मीडिया पर ‘बिट्टू तबाही’ के नाम से जाना जाता है, अजनार नदी की सफाई को लेकर चर्चा में हैं. उन्होंने लगातार नदी में उतरकर कचरा साफ किया. आजतक से बातचीत में उन्होंने बताया कि वह अपने देश में रहकर पर्यावरण के लिए काम करना चाहते हैं. 

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विदेश जाने और नौकरी करने के बजाय बिट्टू ने अपने देश में रहकर काम करने का फैसला किया. ( Photo: Insta/ @bittu_tabahi)
विदेश जाने और नौकरी करने के बजाय बिट्टू ने अपने देश में रहकर काम करने का फैसला किया. ( Photo: Insta/ @bittu_tabahi)

कभी जिस नदी में गंदगी और कचरे का अंबार लगा था, आज उसी नदी की सफाई की कहानी देशभर में चर्चा का विषय बनी हुई है. मध्य प्रदेश के 20 साल के सुरेंद्र सिंह चौधरी (बिट्टू तबाही) ने अजनार नदी को साफ करने का ऐसा बीड़ा उठाया कि उनकी मेहनत की चर्चा विदेश तक पहुंच गई. उन्होंने न किसी बड़े संगठन का इंतजार किया और न ही किसी खास मदद की. खुद नदी में उतरे, कचरा निकाला और लगातार सफाई करते रहे.

उनकी इसी मुहिम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. इसके बाद नीदरलैंड की एक कंपनी/NGO की ओर से उन्हें काम का ऑफर तक मिला. लेकिन विदेश जाने और नौकरी करने के बजाय बिट्टू ने अपने देश में रहकर काम करने का फैसला किया.

आजतक से खास बातचीत में बिट्टू ने अपनी इस पूरी जर्नी, परिवार , विदेश से मिले ऑफर और युवाओं के लिए अपने संदेश के बारे में खुलकर बात की.

सवाल: सबसे पहले बताइए, आपको ‘बिट्टू तबाही’ नाम कैसे मिला?
बिट्टू:
ये नाम मैंने खुद रखा है. मुझे लगा कि अगर मुझे कुछ बड़ा काम करना है तो नाम भी ऐसा होना चाहिए, जो लोगों को याद रहे. इसलिए मैंने अपना नाम ‘बिट्टू तबाही’ रख लिया. बाद में सोशल मीडिया पर भी लोग इसी नाम से मुझे पहचानने लगे.

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सवाल: अजनार नदी की सफाई का ख्याल आपके मन में कैसे आया?
बिट्टू:
मैंने देखा कि नदी में बहुत ज्यादा गंदगी थी. कचरा जमा था और हालात लगातार खराब होते जा रहे थे. मुझे लगा कि अगर हम सब सिर्फ यह सोचते रहें कि कोई दूसरा आकर सफाई करेगा, तो कुछ नहीं बदलेगा. इसलिए मैंने खुद नदी में उतरकर सफाई शुरू कर दी. शुरुआत में यह काम आसान नहीं था. नदी में उतरना, गंदगी निकालना और उसे बाहर लाना काफी मेहनत का काम था. लेकिन मैंने इसे रोज करने का फैसला किया और धीरे-धीरे यह मेरी मुहिम बन गई.

सवाल: जब आप करियर बनाने की उम्र में यह काम कर रहे थे तो क्या परिवार वाले नाराज नहीं हुए?
बिट्टू:
मेरे परिवार को शुरुआत में इस काम के बारे में पता ही नहीं था. उन्हें मालूम नहीं था कि मैं नदी की सफाई के लिए इस तरह रोज मेहनत कर रहा हूं. मेरे परिवार के लोग सोशल मीडिया पर भी नहीं हैं, इसलिए उन्हें मेरे काम के वायरल होने की जानकारी भी नहीं थी. जब मेरा वीडियो वायरल हुआ, तब मैंने परिवार को बताया कि मैं क्या कर रहा हूं. इसके बाद उन्हें मेरे काम के बारे में पता चला.

सवाल: आपके परिवार में कौन-कौन हैं?
बिट्टू:
मेरे परिवार में माता-पिता और दो बहनें हैं. मैं अपने माता-पिता का इकलौता बेटा हूं. मेरे पिताजी स्वास्थ्य विभाग में काम करते हैं. मेरी मां हाउसवाइफ हैं और मेरी दोनों बहनों की शादी हो चुकी है.

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सवाल: आपकी मेहनत का वीडियो वायरल हुआ और फिर विदेश से नौकरी का ऑफर मिला. जब आपको इसके बारे में पता चला तो पहली प्रतिक्रिया क्या थी?
बिट्टू: नीदरलैंड की एक कंपनी/NGO की तरफ से मुझे काम का ऑफर एक्स पर मिला था. डच CEO ने मुझे एक्स पर टैग करके नौकरी की पेशकश की थी. लेकिन, मैंने इस ऑफर पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया. मेरी इच्छा विदेश जाने की नहीं है. मैं अपने देश में रहकर अपने देश के लिए कुछ बड़ा करना चाहता हूं. अगर मैं यहां रहकर अपने आसपास के लोगों और पर्यावरण के लिए कुछ कर सकता हूं तो मेरे लिए यही सबसे बड़ी बात है.

सवाल: आप अभी पढ़ाई भी कर रहे हैं?
बिट्टू:
हां, मैं बीएससी सेकंड ईयर का स्टूडेंट हूं. पढ़ाई के साथ-साथ मैं अपने इस काम को भी जारी रखना चाहता हूं. मेरा मानना है कि पढ़ाई और समाज के लिए काम, दोनों साथ-साथ किए जा सकते हैं.

सवाल: सोशल मीडिया पर कुछ लोग दावा कर रहे हैं कि आपने यह सब सिर्फ व्यूज और लोकप्रियता के लिए किया. इस पर आप क्या कहना चाहेंगे?
बिट्टू: लोग सोशल मीडिया पर कुछ भी कहते हैं. मैं कभी-कभी कुछ लोग आते थे और महीने में एक-दो बार थोड़ी सफाई करके चले जाते थे. लेकिन मैं रोज इस काम में लगा रहा. मेरा उद्देश्य सिर्फ वीडियो बनाना या व्यूज हासिल करना नहीं था. अगर मुझे सिर्फ व्यूज चाहिए होते तो मैं इतना समय नदी की सफाई में नहीं लगाता. मैंने लगातार मेहनत की क्योंकि मुझे लगता था कि नदी को साफ करना जरूरी है.

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सवाल: क्या इस काम में आपको किसी ने आर्थिक या दूसरी तरह की मदद की?
बिट्टू:
मैंने अपनी तरफ से पैसे जोड़कर यह काम किया. कभी-कभी ऑनलाइन कुछ पैसे भी आ जाते थे, लेकिन मैंने किसी बड़ी मदद के भरोसे यह काम शुरू नहीं किया था. हां, आसपास के प्रशासन और स्थानीय लोगों ने भी जरूरत पड़ने पर मदद की. जब किसी चीज की जरूरत होती थी तो प्रशासन की तरफ से वह उपलब्ध करा दी जाती थी.

सवाल: मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात में क्या बातचीत हुई?
बिट्टू:
मुझे मुख्यमंत्री कार्यालय बुलाया गया था. वहां मेरे काम को सम्मान दिया गया और मुझे काफी प्रोत्साहित किया गया. मुख्यमंत्री जी ने कहा कि अगर आगे किसी भी तरह की जरूरत हो तो मैं संपर्क कर सकता हूं. उन्होंने भरोसा दिलाया कि जरूरत पड़ने पर सरकार की तरफ से मदद की जाएगी. मेरे लिए यह बहुत सम्मान की बात थी कि मेरे काम को इतनी गंभीरता से लिया गया.

सवाल: आज के युवाओं को आप क्या संदेश देना चाहेंगे?
बिट्टू:
मैं युवाओं से यही कहना चाहूंगा कि नशे और शराब में अपनी जिंदगी बर्बाद मत करो. अपनी जिंदगी में कुछ ऐसा करो जिससे आपके परिवार और देश का नाम रोशन हो. अगर हर युवा अपने आसपास की किसी एक समस्या को दूर करने की कोशिश करे तो बहुत बड़ा बदलाव आ सकता है. जरूरी नहीं कि हर कोई नदी की सफाई करें. कोई पेड़ लगाए, कोई गरीब बच्चे की पढ़ाई में मदद करें या अपने आसपास सफाई रखे, छोटा कदम भी बड़ा बदलाव ला सकता है.

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