महानायक अमिताभ बच्चन को उनकी शानदार एक्टिंग के लिए जाना जाता है, लेकिन एक ऐसा भी टाइम था जब उन्होंने राजनीति में कदम रखा था. उस समय वह अपने करियर के शिखर पर थे. हर तरफ उनकी शानदार एक्टिंग की चर्चा होती थी, उनकी फिल्में सुपरहिट हो रही थी, लेकिन इन सबके बावजूद उन्होंने राजनीति का रुख किया और वह जीते भी. हालांकि, वह लंबे समय तक राजनीति में टिक नहीं पाए और करीब तीन साल सांसद रहने के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया.
अमिताभ का गांधी परिवार से बेहद खास रिश्ता रहा है. अमिताभ की मां तेजी बच्चन और इंदिरा गांधी के बीच अच्छी दोस्ती थी. अमिताभ की मां तेजी बच्चन ने प्रियंका गांधी को हिंदी भी सिखाई थी. ऐसे में दोनों परिवार के बीच में अच्छी दोस्ती रही है. जब इंदिरा गांधी की हत्या हुई उस समय राजनीति उथल-पुथल थी. ऐसे में राजीव गांधी के कहने पर अमिताभ राजनीति में आए.
पॉलिटिक्स में क्यों हुई थी अमिताभ की एंट्री
पॉलिटिकल रिपोर्टर और लेखक तवलीन सिंह ने हाल ही में अमिताभ के राजनीति सफर पर खुलकर चर्चा की. उन्होंने कहा, 'उस समय अमिताभ बच्चन पर दबाव डालकर राजनीति में लाया गया था, जबकि अमिताभ उस समय अपने फिल्मी करियर के बेहद ऊंचे मुकाम पर थे. इसके बावजूद उन्होंने फिल्मों से ब्रेक लेकर उत्तर प्रदेश की इलाहाबाद लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा.'
1984 में इंदिरा गांधी के हत्या के बाद राजीव गांधी अपने करीबी दोस्त अमिताभ बच्चन को राजनीति में लाए. अमिताभ और राजीव की दोस्ती बचपन से थी. अमिताभ ने उस समय एक्टिंग से ब्रेक लिया. अमिताभ ने 1984 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर इलाहाबाद से चुनाव लड़ा और उस समय के दिग्गज नेता हेमवती बहुगुणा को बहुत बड़े अंतर से हराया था.
तवलीन जिन्होंने उस समय अमिताभ के जीतने के बाद उनका इंटरव्यू लिया था, उन्होंने बताया कि अमिताभ ने उस समय मुझसे कहा था कि उन्हें कोई आइडिया नहीं था कि देश में इतनी गरीबी है.
4 साल के भीतर ही क्यों हुआ मोहभंग
हालांकि अमिताभ बच्चन का राजनीतिक सफर ज्यादा लंबा नहीं चला. उन्होंने 1987 में राजनीति से दूरी बना ली. अमिताभ बच्चन के राजनीति छोड़ने को लेकर भी तवलीन ने बातें बताई. तवलीन का कहना है कि राजनीति छोड़ने के पीछे बोफॉर्स दलाली कांड और गांधी परिवार से आई दूरी मुख्य कारण था.
तवलीन सिंह का दावा है कि बच्चन परिवार बोफॉर्स मामले में लगाए गए आरोपों से काफी परेशान था. उनका कहना है कि अमिताभ को इस बात का भी दुख था कि राजीव गांधी ने उस समय उनके परिवार का बचाव नहीं किया.
बोफॉर्स विवाद के बाद अमिताभ बच्चन ने राजनीति से पूरी तरह दूरी बना ली. इस मामले में उनके नाम को लेकर काफी लंबे समय तक सवाल उठते रहे. 2012 में स्वीडिश जांच से जुड़े एक अधिकारी की ओर से कहा गया कि अमिताभ और उनके परिवार का नाम इस घोटाले में जानबूझकर घसीटा गया था.