बॉलीवुड फिल्म 'प्रहार: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ उज्ज्वल निकम' में राजकुमार राव 26/11 मुंबई आतंकी हमले के मामले में सरकारी वकील रहे उज्ज्वल निकम की भूमिका निभा रहे हैं. लेकिन इस फिल्म में एक और किरदार है, जिसकी कहानी किसी फिल्मी थ्रिलर से कम नहीं है. यह किरदार है चौधरी जुल्फिकार अली का, जिसे पर्दे पर जयदीप अहलावत ने निभाया है.
पाकिस्तान के इस सरकारी वकील का सामना मुंबई हमले से जुड़े मुकदमे के सिलसिले में भारतीय अधिकारियों और उज्ज्वल निकम से हुआ था. दिलचस्प बात यह है कि जिस मामले में दोनों देशों के बीच तनाव था, उसी से जुड़े एक अहम मुद्दे पर जुल्फिकार अली ने निकम के सामने अपनी गलती भी स्वीकार की थी. लेकिन इसके कुछ ही महीनों बाद उनकी हत्या कर दी गई.
26/11 केस से जुड़ा था जुल्फिकार अली का नाम
चौधरी जुल्फिकार अली पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) में वरिष्ठ सरकारी वकील थे. वह दो बेहद चर्चित मामलों से जुड़े थे. पहला, नवंबर 2008 में मुंबई में हुए आतंकी हमलों से जुड़े आरोपियों का मुकदमा और दूसरा, पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की हत्या का मामला.
26/11 हमले में अजमल कसाब एकमात्र जिंदा पकड़ा गया आतंकी था. भारत में उसके खिलाफ मुकदमा चला, जबकि हमले की साजिश से जुड़े आरोपियों के खिलाफ पाकिस्तान में भी कानूनी कार्रवाई चल रही थी. जुल्फिकार अली इसी पाकिस्तानी मुकदमे से जुड़े थे. मार्च 2012 में वह उस पाकिस्तानी न्यायिक आयोग का हिस्सा थे, जो मुंबई आया था.
आयोग का मकसद हमले से जुड़े गवाहों के बयान दर्ज करना था, ताकि पाकिस्तान में चल रहे मुकदमे में उनका इस्तेमाल किया जा सके. इस मामले ने दोनों देशों की जांच एजेंसियों और कानूनी अधिकारियों को एक-दूसरे के सामने ला खड़ा किया था.
उज्ज्वल निकम से हुई थी मुलाकात, साजिश के आरोपों पर हुई बात
नवंबर 2012 में अजमल कसाब को फांसी दिए जाने के बाद उज्ज्वल निकम तीन अन्य भारतीय सरकारी अधिकारियों के साथ इस्लामाबाद गए थे. वहां पाकिस्तानी अधिकारियों के साथ हुई बैठकों में उन्होंने मुंबई हमले के आरोपियों के खिलाफ चल रहे मुकदमे पर सवाल उठाए.
निकम के मुताबिक, उन्होंने पाकिस्तानी अधिकारियों से कहा कि आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप हमले के पीछे की बड़ी आपराधिक साजिश को पर्याप्त रूप से सामने नहीं लाते. उनका कहना था कि मामला सिर्फ हमले में शामिल लोगों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसके पीछे की साजिश की भी जांच होनी चाहिए.
निकम ने बताया कि बातचीत के दौरान जुल्फिकार अली ने उनकी बात मानी थी. उन्होंने स्वीकार किया कि आरोपों में गलती थी और कहा था कि सात आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश से जुड़े आरोपों पर ध्यान दिया जाएगा.
26/11 जैसे संवेदनशील मामले में, जहां भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते बेहद तनावपूर्ण थे, दोनों देशों के वकीलों के बीच कानूनी मुद्दे पर सीधी बातचीत हुई थी. निकम ने जुल्फिकार को एक ऐसा शख्स बताया, जो उनकी आपत्ति को समझने और उस पर सहमति जताने के लिए तैयार था.
मुलाकात के कुछ महीनों बाद कर दी गई हत्या
इस कहानी का सबसे चौंकाने वाला मोड़ मई 2013 में आया. उज्ज्वल निकम ने बताया कि भारत लौटने के बाद उन्हें खबर मिली कि जुल्फिकार अली की गोली मारकर हत्या कर दी गई है. 3 मई 2013 को इस्लामाबाद के G-9 सेक्टर में अपने घर के पास जुल्फिकार पर चार बंदूकधारियों ने हमला किया था. हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं, जिससे उनकी मौत हो गई.
निकम ने इस खबर पर हैरानी जताई थी. उन्होंने जुल्फिकार को एक सज्जन व्यक्ति बताया, जिन्होंने मुलाकात के दौरान उनके सवालों को गंभीरता से सुना था. हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर उनकी हत्या को निकम से मुलाकात या 26/11 मामले में हुई बातचीत से जोड़ना सही नहीं होगा. दोनों घटनाओं के बीच किसी सीधे संबंध की पुष्टि नहीं हुई है.
बेनजीर भुट्टो हत्याकांड से भी जुड़े थे जुल्फिकार
जुल्फिकार अली की पहचान सिर्फ मुंबई हमले के मामले तक सीमित नहीं थी. वह पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की हत्या की जांच और मुकदमे से भी जुड़े थे. इस तरह वह पाकिस्तान के दो बेहद संवेदनशील मामलों में कानूनी भूमिका निभा रहे थे.
एक रिपोर्ट के मुताबिक, जुल्फिकार ने मुंबई हमले से जुड़े मामले में पैसों के लेन-देन और दस्तावेजों से जुड़े सबूत जुटाए थे. इनसे पाकिस्तान में मौजूद आतंकियों और मुंबई हमले के बीच संबंधों की पड़ताल की जा रही थी. उनकी हत्या के समय वह मामले से जुड़े जांच और कानूनी काम में सक्रिय थे.
'प्रहार' में जयदीप अहलावत निभा रहे हैं यह किरदार
अविनाश अरुण के निर्देशन में बनी 'प्रहार: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ उज्ज्वल निकम' में राजकुमार राव के साथ वामिका गब्बी, जयदीप अहलावत, सिकंदर खेर और ललित प्रभाकर भी नजर आ रहे हैं. फिल्म 26/11 हमले के बाद कसाब के मुकदमे और उज्ज्वल निकम के कानूनी संघर्ष को सामने लाती है.
जयदीप अहलावत के हिस्से आया चौधरी जुल्फिकार अली का किरदार इस कहानी में पाकिस्तान की कानूनी कार्रवाई का पहलू जोड़ता है. एक ऐसे वकील की कहानी, जो मुंबई हमले के आरोपियों से जुड़े मुकदमे में अहम भूमिका निभा रहा था, भारतीय अधिकारियों के साथ बातचीत कर रहा था और फिर एक दिन खुद गोलीबारी का शिकार हो गया.
जुल्फिकार अली की जिंदगी और मौत से जुड़े तथ्य 'प्रहार' के इस किरदार को खास बनाते हैं. उनकी कहानी सिर्फ दो देशों के बीच कानूनी टकराव की नहीं, बल्कि 26/11 जैसे बड़े आतंकी हमले के बाद न्याय और जवाबदेही की जटिल लड़ाई की भी है.