मिथुन चक्रवर्ती आज बॉलीवुड इंडस्ट्री के टॉप सितारों में गिने जाते हैं. वो करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं और लैविश लाइफ जीते हैं. लेकिन यहां तक पहुंचना मिथुन के लिए आसान नहीं था. स्टारडम का मजा चखने से पहले उन्होंने जिंदगी में काफी संघर्ष किया. सड़कों पर रातें गुजारीं. खाने के लिए पार्टियों में डांस किया.
मिथुन ने किया संघर्ष
मिथुन ने ऐसे दिन भी देखे, जब उन्हें फुटपाथ पर सोना पड़ा था और वॉशरूम इस्तेमाल करने के लिए उन्होंने एक जिम में साफ-सफाई का काम किया था. मुश्किलों से थककर मिथुन एक वक्त पर मुंबई छोड़कर ऊटी में एक होटल चलाने चले गए थे, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था.
फराह खान संग हाल ही में बात करते हुए मिथुन ने अपनी जिंदगी के कई पहलुओं पर बात की. वहीं, फराह ने बताया कि उनके बचपन में मिथुन उनके मामा केके शुक्ला की पार्टियों में डांस करने जाते थे. वो डांस के बदले पैसे नहीं लेते थे, बल्कि रात का खाना खा लेते थे.
मिथुन के बारे में फराह बोलीं- हम उस समय बहुत छोटे थे, लोग कहते थे कि मिथुन को घर ले आओ, लड़का अच्छा डांस करता है. वो आते थे और कोई फीस नहीं लेते थे. परफॉर्मेंस के बदले वो रात का खाना खा लेते थे. वो स्ट्रगल कुछ अलग ही था. बहुत से लोग यूं ही 'स्ट्रगल' शब्द का इस्तेमाल कर लेते हैं, लेकिन असली स्ट्रगल ऐसा होता है.
फुटपाथ पर गुजारी रातें
फराह ने आगे बताया- यह स्ट्रगल से भी बढ़कर है, क्योंकि वो सड़कों और फुटपाथ पर भी सोए हैं. मिथुन ने फिर पुरानी यादों को दोहराते हुए कहा- मैं सड़कों पर, पार्कों में सोया हूं, कई बार चलते-चलते इतना थक जाता था कि सड़क पर ही नींद आ जाती थी. जब मेरी आंख खुलती थी, तो मैं खुद को फुटपाथ पर ही पाता था.
फराह बोलीं- मुझे लगता है कि मिथुन इकलौते ऐसे स्टार हैं, जो एक जूनियर आर्टिस्ट के रूप में अपना सफर शुरू करने के बाद मेगास्टार बने हैं.
15 दिन तक कार में रहे
वहीं, मिथुन के बेटों ने बताया कि नेशनल अवॉर्ड मिलने के बाद भी एक्टर के पास कोई काम नहीं था. उनके पास रहने को घर भी नहीं था. वो 15 दिन तक अपनी कार में ही रहे थे. बता दें कि मिथुन चक्रवर्ती को उनकी पहली फिल्म 'मृगया' (1976) के लिए बेस्ट एक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला था. लेकिन फिर भी उनके पास काम नहीं था.
फराह ने फिर पूछा कि वो वॉशरूम कहां जाते थे? तो उनके बेटों ने बताया कि एक जिम था, जहां मिथुन झाड़ू-पोंछा लगाते थे, बदले में उन्हें वहां के शॉवर इस्तेमाल करने की इजाजत मिल जाती थी.