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इमरान खान को भारत छोड़ने का नोटिस, क्या OCI कार्डधारक को धरना देने का हक नहीं?

इमरान खान को मुंबई में प्रदर्शन के बाद 14 दिन में भारत छोड़ने का नोटिस मिला है. जानिए OCI कार्डधारक के अधिकार क्या हैं और कानून इस मामले में क्या कहता है.

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इमरान खान के केस में फंसा कानून! (Photo: ITGD)
इमरान खान के केस में फंसा कानून! (Photo: ITGD)

फिल्म ‘जाने तू या जाने ना’ से मशहूर हुए एक्टर इमरान खान की मुश्किलें बढ़ीं, मुंबई में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन के बाद FRRO का एक्शन. अब हाई कोर्ट में होगी कानूनी लड़ाई, लेकिन सवाल यह है कि क्या शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना किसी OCI कार्डधारक के लिए गुनाह है?

बॉलीवुड की फिल्म ‘जाने तू या जाने ना’ से लोगों के दिलों में जगह बनाने वाले एक्टर इमरान खान एक बार फिर चर्चा में हैं. इस बार वजह उनकी कोई फिल्म नहीं, बल्कि एक ऐसा सरकारी नोटिस है, जिसने नागरिकता, अभिव्यक्ति की आजादी और विरोध-प्रदर्शन के अधिकार पर नई बहस छेड़ दी है.

खबर के मुताबिक, मुंबई में भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल होने के बाद इमरान खान को भारत छोड़ने का नोटिस जारी किया गया है. इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025 के तहत जारी इस आदेश में उन्हें 14 दिन के भीतर देश छोड़ने को कहा गया है. इमरान की टीम ने इस आदेश को ‘कठोर’ बताते हुए इसे चुनौती देने की बात कही है.

लेकिन कहानी में सबसे बड़ा ट्विस्ट यह है कि इमरान खान अमेरिकी नागरिक हैं, मगर उनके पास भारत का OCI कार्ड भी है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या OCI कार्ड रखने वाला व्यक्ति भारत में शांतिपूर्ण प्रदर्शन भी नहीं कर सकता? क्या सरकार किसी प्रदर्शन में शामिल होने के कारण उसे देश छोड़ने का आदेश दे सकती है? और आखिर OCI कार्डधारक के अधिकार हैं क्या?

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क्या है पूरा मामला? 14 दिन में भारत छोड़ने का फरमान

FRRO यानी फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर की ओर से जारी आदेश में इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025 की धारा 7(2)(c) और धारा 29 का हवाला दिया गया है. आदेश के मुताबिक, इमरान खान को 28 अक्टूबर 2026 तक भारत छोड़ना होगा.

इमरान की टीम ने इस आदेश को चुनौती देने का ऐलान किया है. अब यह मामला सिर्फ एक अभिनेता को देश छोड़ने के नोटिस तक सीमित नहीं रह गया है. इसके केंद्र में यह सवाल भी है कि किसी विदेशी नागरिक या OCI कार्डधारक के अधिकारों की सीमा आखिर तय कौन करेगा?

पहले समझिए, OCI कार्ड क्या होता है?

OCI यानी Overseas Citizen of India कार्ड उन विदेशी नागरिकों को दिया जाता है, जो तय कानूनी शर्तों के तहत भारतीय मूल से जुड़े होते हैं या योजना के लिए पात्र होते हैं. नाम में भले ही ‘सिटिजन ऑफ इंडिया’ आता हो, लेकिन OCI कार्ड का मतलब भारत की दोहरी नागरिकता नहीं है. भारत सरकार की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, OCI कार्डधारक भारतीय नागरिक नहीं, बल्कि विदेशी नागरिक होते हैं. उन्हें कुछ विशेष सुविधाएं और अधिकार दिए जाते हैं, लेकिन वे सभी अधिकार नहीं मिलते जो भारतीय नागरिकों को हासिल हैं.

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यही वजह है कि इमरान खान के मामले में कानूनी पेच फंसता दिखाई दे रहा है. एक तरफ OCI कार्डधारकों को कुछ अधिकार हासिल हैं, तो दूसरी तरफ विदेशी नागरिकों पर लागू कानून के तहत सरकार को कार्रवाई करने की शक्तियां भी प्राप्त हैं.

क्या OCI कार्डधारक को धरना देने का अधिकार है?

यही इस पूरे विवाद का सबसे अहम सवाल है.

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19 बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी, शांतिपूर्वक इकट्ठा होने और अन्य संबंधित स्वतंत्रताओं का अधिकार देता है. लेकिन अनुच्छेद 19 के ये अधिकार खास तौर पर भारतीय नागरिकों के लिए हैं.

दूसरी ओर, संविधान का अनुच्छेद 21 हर व्यक्ति को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का संरक्षण देता है. यानी विदेशी नागरिक भी भारत में रहते हुए इस मौलिक अधिकार के संरक्षण का दावा कर सकते हैं. इसलिए मामला इतना सीधा नहीं है कि OCI कार्डधारक को भारतीय नागरिकों जैसे सभी राजनीतिक अधिकार मिल जाते हैं, या फिर विदेशी होने के कारण उसके पास कोई अधिकार ही नहीं बचता.

असली सवाल यह है कि क्या किसी शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने को देश से निकालने का पर्याप्त आधार माना जा सकता है? और अगर सरकार ऐसा कदम उठाती है, तो क्या उसे अपने फैसले का कानूनी आधार और उचित प्रक्रिया भी स्पष्ट करनी होगी?

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पोलिश छात्र का केस: जब हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया था ‘Leave India’ नोटिस

इस बहस में 2020 का एक अहम मामला भी सामने आता है. कलकत्ता हाई कोर्ट ने CAA विरोधी रैली में शामिल होने वाले एक पोलिश छात्र को जारी ‘लीव इंडिया’ नोटिस रद्द कर दिया था. अदालत ने कहा था कि भारत की जमीन पर मौजूद विदेशी नागरिक को भी संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त है.

अदालत के सामने यह सवाल था कि क्या किसी राजनीतिक रैली में शामिल होने के कारण किसी विदेशी नागरिक को देश छोड़ने का आदेश दिया जा सकता है, जबकि उसे अपना पक्ष रखने का उचित मौका ही न दिया गया हो.

फैसले में अदालत ने राजनीतिक विचार रखने और राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेने से जुड़े पहलुओं पर भी चर्चा की थी. उसने इस बात पर जोर दिया कि मौलिक अधिकारों की व्याख्या करते समय संविधान के अलग-अलग प्रावधानों को एक-दूसरे के साथ सामंजस्य में पढ़ना जरूरी है.

हालांकि, उस मामले में आया फैसला अपने तथ्यों और कानूनी परिस्थितियों के संदर्भ में था. इसका मतलब यह नहीं कि हर विदेशी नागरिक को भारत में हर तरह की राजनीतिक गतिविधि में शामिल होने का बिना शर्त अधिकार मिल जाता है.

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FRRO के पास आखिर कितनी ताकत है?

इमरान खान को जारी नोटिस में जिस कानून का सहारा लिया गया है, वह है इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025. इस कानून की धारा 7 के तहत केंद्र सरकार को विदेशियों के भारत में प्रवेश, यहां रहने और देश छोड़ने से जुड़े मामलों में आदेश जारी करने की शक्तियां दी गई हैं. धारा 7(2)(c) के तहत विदेशी नागरिक को हटाने से संबंधित कार्रवाई का आधार लिया गया है. वहीं, धारा 29 के तहत भी कानून के उल्लंघन या प्रतिकूल सुरक्षा रिपोर्ट जैसी परिस्थितियों में विदेशी नागरिक को भारत से हटाने का प्रावधान है. 

लेकिन यहां एक बड़ा सवाल है: क्या इमरान खान के प्रदर्शन में शामिल होने से इस कानून का कोई प्रावधान टूटा है? क्या उनके खिलाफ कोई प्रतिकूल सुरक्षा रिपोर्ट है? और क्या उन्हें भारत छोड़ने का आदेश देने से पहले उचित प्रक्रिया अपनाई गई?

इन सवालों के जवाब ही तय करने में अहम हो सकते हैं कि FRRO का आदेश कानूनी कसौटी पर कितना टिकता है.

OCI कार्डधारक बनाम विदेशी नागरिक: कानून में कहां फंसा है पेंच?

इस पूरे मामले का सबसे पेचीदा हिस्सा नागरिकता अधिनियम, 1955 और इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025 के बीच तालमेल का है. नागरिकता अधिनियम की धारा 7B OCI कार्डधारकों को कुछ अधिकार देती है, लेकिन साथ ही कुछ अधिकारों को स्पष्ट रूप से बाहर भी रखती है. दूसरी तरफ, OCI कार्डधारक विदेशी नागरिक होने के कारण विदेशियों पर लागू कानूनों के दायरे में भी आते हैं.

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यानी एक ही व्यक्ति के मामले में दो कानूनी सवाल सामने आ सकते हैं- OCI कार्ड के तहत उसे कौन-से अधिकार मिले हैं और विदेशी नागरिक के तौर पर सरकार उस पर कौन-सी पाबंदियां लगा सकती है? 

दिल्ली हाई कोर्ट में भी OCI कार्डधारकों के अधिकारों और विदेशी नागरिकों पर लागू कानूनों के बीच संबंध को लेकर मामले सामने आ चुके हैं. 2024 में OCI कार्डधारक पर यात्रा संबंधी पाबंदियों के एक मामले में दिल्ली हाई कोर्ट की एकल पीठ ने कहा था कि नागरिकता अधिनियम को विदेशी नागरिकों पर लागू कानून को अपने आप खत्म करने वाला नहीं माना जा सकता. अदालत की इस व्याख्या को चुनौती दी गई है और मामला लंबित है.

2025 में OCI कार्डधारक की ब्लैकलिस्टिंग और भारत में प्रवेश से जुड़े एक अन्य मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने दोनों कानूनों को सामंजस्य के साथ पढ़ने की जरूरत पर जोर दिया. अदालत ने संबंधित मामले में उचित सुनवाई और कानूनी प्रक्रिया के महत्व को भी रेखांकित किया.

उस मामले में अदालत ने OCI कार्डधारक के अधिकारों को मनमाने तरीके से सीमित करने पर सवाल उठाए. हालांकि, उस फैसले को भी सरकार ने चुनौती दी है और अपील लंबित है. इसलिए इन मामलों को इमरान खान के पक्ष या सरकार के पक्ष में अंतिम फैसला मान लेना जल्दबाजी होगी.

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वकीलों की राय: क्या सिर्फ प्रदर्शन करने पर देश छोड़ने का आदेश दिया जा सकता है?

‘इंडिया टुडे’ से बातचीत में इस मामले से परिचित वकीलों ने बताया कि विदेशियों पर लागू कानून को कई मामलों में नागरिकता अधिनियम के साथ पढ़ते हुए प्राथमिकता दी गई है. लेकिन OCI कार्डधारकों की ब्लैकलिस्टिंग, भारत में प्रवेश से इनकार और उचित सुनवाई के अधिकार जैसे मुद्दों पर अदालतों ने प्रक्रिया संबंधी सुरक्षा को भी अहम माना है.

अधिवक्ता धीरज फिलिप के मुताबिक, पुराने मामलों में इस्तेमाल किए गए कानूनी प्रावधान और 2025 में लागू नया कानून एक जैसे नहीं हैं. नए कानून और नियमों के तहत अधिकारियों की शक्तियों का दायरा भी अदालत के परीक्षण का विषय हो सकता है.

फिलिप ने सवाल उठाया कि क्या OCI कार्डधारक को OCI दर्जा रद्द करने से पहले मिलने वाली प्रक्रियात्मक सुरक्षा को इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025 के तहत ‘लीव इंडिया’ नोटिस जारी करके दरकिनार किया जा सकता है?

वरिष्ठ अधिवक्ता अमीर सिंह पासरिच का भी कहना है कि OCI कार्डधारकों के अधिकारों और उनकी सीमाओं को लेकर अंतिम कानूनी व्याख्या अदालतों को करनी होगी.

उनके मुताबिक, OCI कार्डधारकों को भारतीय नागरिकों के सभी अधिकार नहीं मिलते, लेकिन इसका अर्थ यह भी नहीं कि वे संविधान के संरक्षण से पूरी तरह बाहर हो जाते हैं. अनुच्छेद 14 के तहत कानून के समक्ष समानता और अनुच्छेद 21 के तहत जीवन तथा व्यक्तिगत स्वतंत्रता जैसे अधिकार इस बहस में महत्वपूर्ण हैं.

पासरिच ने यह भी रेखांकित किया कि OCI योजना को दोहरी नागरिकता दिए बिना विदेशों में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों को एक विशेष कानूनी दर्जा देने के उद्देश्य से लाया गया था.

सुप्रीम कोर्ट भी कह चुका है- OCI कार्डधारकों के अधिकार बीच का रास्ता हैं

2023 में अनुष्का रेंगुनथवार मामले में सुप्रीम कोर्ट ने OCI कार्डधारकों के अधिकारों को दोहरी नागरिकता के अभाव में एक तरह का ‘मिड-वे राइट’ यानी बीच का रास्ता बताया था. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि जब कानून के तहत दिया गया कोई अधिकार वापस लिया जाता है, तो उस कार्रवाई का उचित आधार होना चाहिए और उसका उद्देश्य से तार्किक संबंध होना चाहिए. कार्रवाई मनमानी या बिना आधार की नहीं हो सकती। सिर्फ यह कहकर कि सरकार के पास संप्रभु शक्ति है, उसके इस्तेमाल के परिणामों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

इस फैसले का महत्व इसलिए है क्योंकि यह बताता है कि सरकार के पास अधिकार होना और उस अधिकार का इस्तेमाल कानूनी रूप से उचित होना- दो अलग-अलग बातें हैं.

अब आगे क्या होगा? हाई कोर्ट में तय हो सकती है बड़ी लड़ाई

इमरान खान की टीम ने नोटिस को हाई कोर्ट में चुनौती देने की बात कही है. ऐसे में अब अदालत के सामने यह सवाल आ सकता है कि FRRO ने कानून के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल सही तरीके से किया या नहीं.

अदालत को यह भी देखना पड़ सकता है कि OCI कार्डधारक की कानूनी स्थिति, शांतिपूर्ण प्रदर्शन में भाग लेने की परिस्थितियां, नोटिस जारी करने का आधार और उचित सुनवाई की जरूरत जैसे पहलुओं का इस मामले पर क्या असर पड़ता है. वकीलों का कहना है कि सरकार को कानून के तहत पाबंदियां लगाने का अधिकार हो सकता है, लेकिन उस अधिकार का इस्तेमाल मनमाने तरीके से नहीं किया जा सकता.

एक वरिष्ठ वकील ने ‘इंडिया टुडे’ से कहा कि नागरिकता अधिनियम में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत से जुड़ी सुरक्षा मौजूद है. ऐसे में यह सवाल अदालत के सामने उठ सकता है कि क्या किसी व्यक्ति को धरने में शामिल होने पर भी इस तरह की कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है.

वकीलों ने यह सवाल भी उठाया है कि FRRO एक कार्यकारी प्राधिकरण है, न्यायिक संस्था नहीं। इसलिए उसके आदेश के पीछे की प्रक्रिया, फैसले का आधार और मामले पर उचित विचार किया गया या नहीं- इन सबकी न्यायिक समीक्षा हो सकती है.

फिलहाल इस मामले में अंतिम फैसला आना बाकी है. इमरान खान को नोटिस जारी होने भर से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि उनका प्रदर्शन गैरकानूनी था या FRRO का आदेश गलत है. इसका फैसला संबंधित तथ्यों, कानून और अदालत की व्याख्या पर निर्भर करेगा.

लेकिन इस मामले ने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है- अगर OCI कार्डधारक भारत में रहते हुए अपने राजनीतिक विचार व्यक्त करता है और शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होता है, तो उसके अधिकारों की सीमा कहां खत्म होती है और सरकार की कार्रवाई करने की शक्ति कहां से शुरू होती है?

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