अनुराग कश्यप की फिल्म 'बंदर' OTT पर आ रही है. यह फिल्म अब 28 अगस्त से ZEE5 पर स्ट्रीम होगी. #MeTooForMen की चर्चा पर आधारित 'बंदर' एक ऐसे आदमी की कहानी है जिसकी जिंदगी एक महिला के आरोप से उलट-पुलट हो जाती है. इसमें सच्चाई सामने आने से पहले ही लोगों की राय, मीडिया की छानबीन और समाज का फैसला हावी हो जाता है.
फिल्म में बॉबी देओल ने समर का किरदार निभाया है, जो एक टेलीविजन एक्टर है और जिसकी जिंदगी तब पूरी तरह बदल जाती है जब एक महिला उस पर रेप का आरोप लगाती है. कहानी सिर्फ आरोप के बारे में नहीं है, बल्कि यह भी दिखाती है कि उसके बाद क्या होता है. समर की इज्जत पर दाग लगता है, उसका करियर प्रभावित होता है और आस-पास के लोग उसे अलग नजरिए से देखने लगते हैं.
Me Too For Men का क्या मतलब है?
असली #MeToo मूवमेंट ने महिलाओं को यौन उत्पीड़न और शोषण के बारे में बात करने का मंच दिया था. #MeTooForMen उन पुरुषों के बारे में बात करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है, जिन्होंने यौन उत्पीड़न, यौन शोषण या झूठे आरोपों का सामना किया है. इसका मकसद सीधा है: पुरुष भी पीड़ित हो सकते हैं और उनके अनुभवों को भी सुना जाना चाहिए.
'बंदर' इसी सवाल को समझने की कोशिश करती है. अनुराग कश्यप ने साफ किया है कि 'बंदर' रेप के झूठे आरोप के बारे में है और यह खुद #MeToo मूवमेंट पर बनी फिल्म नहीं है.
असल में 'बंदर' किस बारे में है?
बॉबी ने समर का किरदार निभाया है, जिस पर उसकी एक पुरानी पार्टनर रेप का आरोप लगाती है. वह कहता है कि आरोप झूठा है, लेकिन जैसे ही आरोप सबके सामने आता है, उसकी जिंदगी बिखरने लगती है. फिल्म दिखाती है कि जब लोग कोई गंभीर आरोप सुनते हैं, तो कितनी तेजी से किसी के बारे में अपनी राय बना लेते हैं.
समर को मीडिया, लोगों की राय और आरोप का उसकी पर्सनल और प्रोफेशनल जिंदगी पर पड़ने वाले असर का सामना करना पड़ता है.
अनुराग कश्यप के डायरेक्शन में बनी 'बंदर' में सान्या मल्होत्रा, सपना पब्बी और सबा आजाद भी हैं. बॉबी देओल के लिए, 'बंदर' उन चुनिंदा प्रोजेक्ट्स में से एक था, जिसने उन्हें उनके कम्फर्ट जोन से पूरी तरह बाहर निकाल दिया.
एक्टर और डायरेक्टर ने क्या कहा?
एक प्रेस नोट के अनुसार, उन्होंने कहा, 'इस किरदार ने मुझसे बहुत कुछ मांगा - न सिर्फ एक एक्टर के तौर पर, बल्कि एक इंसान के तौर पर भी. मुझे अपनी झिझक छोड़नी पड़ी, प्रोसेस पर भरोसा करना पड़ा और अनुराग के विजन को पूरी तरह अपनाना पड़ा. अनुराग की कहानी कहने के अंदाज में मुझे जो बात सबसे अच्छी लगती है, वह यह है कि वे कभी भी घिसे-पिटे रास्ते पर नहीं चलते. इस रोल को निभाना चुनौतीपूर्ण और आजादी देने वाला, दोनों ही था, और मैंने इसके हर पल का भरपूर आनंद लिया. '
हालांकि अनुराग कश्यप का इस नजरिया इस फिल्म को लेकर अलग था. फिल्म देखने के बाद कई लोगों ने इसके कॉन्सेप्ट पर महिला विरोधी तक करार दिया था. जिसके बाद अनुराग कश्यप ने भी इस आरोपों पर अपनी सहमति जताई थी. साथ ही उन्होंने इसे अपनी फिल्म मानने से भी इन्कार कर दिया. अनुराग ने कुणाल कामरा को दिए इंटरव्यू में बताया कि फिल्म का फाइनल कट उनका नहीं था. इसीलिए उन्होंने इसके प्रमोशन में भी हिस्सा नहीं लिया.