राजकुमार राव ने 'प्रहार: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ उज्ज्वल निकम' में स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर उज्ज्वल निकम का किरदार निभाया है, जो शुक्रवार को सिनेमाघरों में रिलीज हुई है. फिल्म के प्रमोशन के दौरान 'अभि और नियू' के साथ बातचीत में, निकम ने 26/11 मुंबई आतंकी हमले के दोषी अजमल कसाब के ट्रायल से जुड़ी कुछ बातें शेयर की है.
इसमें कसाब का वह दावा भी शामिल था कि वह मुंबई इसलिए आया था क्योंकि वह बॉलीवुड फिल्मों का फैन था. निकम ने हमलावरों और उनके हैंडलर्स के बीच हुई बातचीत के बारे में भी बताया, जिसे बाद में अभियोजन पक्ष ने सबूत के तौर पर पेश किया था.
नवंबर 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के दौरान कसाब अकेला ऐसा हमलावर था जिसे जिंदा पकड़ा गया था. उसे दोषी ठहराया गया और मौत की सजा सुनाई गई. 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने भी उसकी सजा और दोषसिद्धि को बरकरार रखा.
अदालत में अजमल कसाब के बयान को याद करते हुए उज्ज्वल निकम ने बताया कि आरोपी ने अपना गुनाह तो कबूल कर लिया था, लेकिन यह दावा किया कि उसने खुद लोगों को नहीं मारा है, बल्कि हत्याओं के लिए उसका साथी अबू इस्माइल जिम्मेदार था.
निकम ने बताया, 'उसने अदालत में अपना गुनाह तो मान लिया, लेकिन यह भी कहा कि उसने खुद लोगों को नहीं मारा है. उसने कहा कि उसके साथ मौजूद अबू इस्माइल ने लोगों की हत्याएं कीं. उसने यह भी कहा कि वह मुंबई इसलिए आया था क्योंकि उसे बॉलीवुड फिल्में देखना पसंद था.'
निकम ने बताया कि उन्होंने कसाब की इस दलील को नहीं माना और उसके खिलाफ जुटाए गए सबूतों को अदालत के सामने पेश करने का फैसला किया.
निकम ने कहा, 'वह अपनी पूरी भूमिका को स्वीकार नहीं कर रहा था. उसका कहना था कि वह मुंबई तो आया था, लेकिन उसे मौत की सजा नहीं दी जा सकती. मैंने अदालत से कहा कि मैं उसकी इस दलील को नहीं मानता और उसके खिलाफ सारे सबूत पेश करूंगा.'
उज्ज्वल निकम ने क्या बताया
इससे पहले, 'कौन बनेगा करोड़पति 18' में शामिल होने के दौरान भी निकम ने ऐसी ही एक बात शेयर की थी. उन्होंने बताया था कि कसाब ने दावा किया था कि वह मुंबई इसलिए आया था क्योंकि वह हिंदी फिल्मों का फैन था और अमिताभ बच्चन के घर जाना चाहता था. ताज हमलावरों और उनके हैंडलर्स के बीच हुई बातचीत को इंटरसेप्ट किए जाने पर उज्ज्वल निकम ने याद करते हुए बताया कि ताज महल पैलेस होटल के अंदर मौजूद आतंकवादियों और उनके हैंडलर्स के बीच हुई फोन बातचीत को इंटरसेप्ट (पकड़े जाने) से जांचकर्ताओं को यह समझने में मदद मिली कि हमलों के दौरान क्या हो रहा था.
उन्होंने एक ऐसी घटना का जिक्र किया, जिसमें होटल के एक कमरे में कुछ लोगों को बंधक बना लिया गया था. हमलावर अपने हैंडलर्स से बात करने के लिए मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहे थे, जो उन्हें निर्देश दे रहे थे.
निकम ने बताया, 'हैंडलर्स ने उनसे पूछा कि उन्होंने कितने लोगों को बंधक बनाया है. हमलावर ने जवाब दिया, 'सर, यहां तीन लोग हैं. एक क्लर्क है, एक वेटर है और एक टीचर है.' इसके बाद हैंडलर ने उसे टीचर से यह पूछने के लिए कहा कि वह किस स्कूल में पढ़ाता है, और साथ ही उनके कपड़े उतरवाकर उन्हें सिर्फ अंडरवियर में रखने का निर्देश दिया.'
निकम के अनुसार, हैंडलर ने हमलावर को उस व्यक्ति से उसके 'टीचर' होने के दावे के बारे में और पूछताछ करने को कहा.
निकम ने बताया, 'हैंडलर ने उसे बेवकूफ कहा और उस व्यक्ति को पीटने का निर्देश दिया. साथ ही कहा कि उससे पूछो कि एक टीचर फाइव-स्टार होटल में रुकने का खर्च कैसे उठा सकता है. उसने कहा कि वह व्यक्ति टीचर हो ही नहीं सकता. पिटाई के बाद, बंधक बनाए गए व्यक्ति ने सच बता दिया कि वह असल में एक बैंक का चेयरमैन है.'
निकम ने बताया कि बाद में उन्होंने बैंक चेयरमैन का बयान दर्ज किया, लेकिन शुरुआत में वह गवाही देने से डर रहे थे.
निकम ने याद करते हुए कहा, 'मैंने बैंक चेयरमैन का बयान दर्ज किया. जब गवाही देने का समय आया, तो वह बहुत डरे हुए थे और बोले कि वह गवाही नहीं देंगे. मैंने उनसे कहा कि उन्हें गवाही देनी ही होगी. हमारे पास उनकी बातचीत की रिकॉर्डिंग (इंटरसेप्ट की गई बातचीत) मौजूद थी, और उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया था.'
फिल्म प्रहार के बारे में
'प्रहार: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ उज्ज्वल निकम' में राजकुमार राव सरकारी वकील (प्रॉसिक्यूटर) की भूमिका में हैं, जिन्होंने कसाब के खिलाफ मुकदमे में राज्य का पक्ष रखा था. अविनाश अरुण द्वारा निर्देशित यह फिल्म निकम के पेशेवर सफर और उस कानूनी लड़ाई को दिखाती है, जिसने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई. फिल्म में वामिका गब्बी उनकी पत्नी ज्योति का किरदार निभा रही हैं, जबकि ललित प्रभाकर ने कसाब का रोल किया है.
2008 के मुंबई आतंकी हमलों में 166 लोग मारे गए थे और सैकड़ों लोग घायल हुए थे. इसके बाद चला मुकदमा भारत के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में से एक बन गया. इस मामले में निकम ने कसाब के खिलाफ अभियोजन पक्ष का नेतृत्व किया और सुप्रीम कोर्ट ने भी कसाब की दोषसिद्धि को बरकरार रखा.