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'बाढ़ में बिहार, छठी मइया खेवनहार', अक्षरा सिंह का नया भोजपुरी गाना रिलीज, त्रासदी के बीच दिखी आस्था

भोजपुरी सिंगर और एक्ट्रेस अक्षरा सिंह का नया गाना 'बाढ़ में बिहार, छठी मइया खेवनहार' रिलीज हो गया है. सोशल मीडिया से लेकर यूट्यूब पर इस गाने को काफी पसंद किया जा रहा है.

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अक्षरा सिंह का नया गाना रिलीज (Photo: YT/Harmoniyaa Records)
अक्षरा सिंह का नया गाना रिलीज (Photo: YT/Harmoniyaa Records)

बिहार में बीते दिनों कुदरत का कहर और बाढ़ की विभीषण त्रासदी ने आम जनजीवन को झकझोर कर रख दिया है. इस संकट के बीच, लोगों के दर्द, लाचारी और छठी मइया के प्रति अटूट आस्था को आवाज देता हुआ एक नया भोजपुरी गाना 'बाढ़ में बिहार, छठी मइया खेवनहार' रिलीज किया गया है. जिसे एक्ट्रेस और सिंगर अक्षरा सिंह ने गाया है. 

गीतकार मनोज भावुक ने इस आपदा पर परिवारों के दर्द, खेतों की बर्बादी और रोजमर्रा की जिंदगी के संघर्षों को बहुत ही सरल लेकिन दिल को छू लेने वाले शब्दों में पिरोया है. गाने का मुख्य विषय यह है कि कैसे इस त्योहारी और आस्था के मौसम में लोग दुर्गा मइया और छठी मइया जैसी शक्तियों से बिहार को सुरक्षित बाहर निकालने की गुहार लगा रहे हैं.

फैंस ने गाने को दिया प्यार
यह गाना रिलीज होने के बाद से ही सोशल मीडिया पर छा गया है और फैंस इस पर अपना भरपूर प्यार लुटा रहे हैं. एक फैन ने तारीफ करते हुए लिखा, 'एक बहुत ही सुंदर प्रस्तुति, अक्षरा सिंह... बिहार की आपदा पर गाना गाने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद... इस गाने ने मेरा दिल छू लिया.' वहीं एक अन्य यूजर ने कमेंट किया कि इस गाने ने उनकी आंखों में आंसू ला दिए.

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बाढ़ पीड़ितों के बीच खुद पहुंची थीं अक्षरा सिंह
अक्षरा सिंह का यह गाना इसलिए भी बेहद खास माना जा रहा है क्योंकि वह खुद बाढ़ के दौरान बिहार के प्रभावित इलाकों में पीड़ितों की मदद करने के लिए गई थीं. लोगों के इस दर्द को बहुत करीब से देखने और महसूस करने के कारण, अक्षरा की आवाज का यह दर्द असरदार बन गया.
 
वहीं गीतकार मनोज भावुक इससे पहले भी पलायन, विस्थापन और बिहार से जुड़े सामाजिक मुद्दों पर 'पलायन के दर्द', 'सुन ऐ छठी मइया' और 'जागे यूपी-बिहार' जैसे कई लोकप्रिय छठ और लोकगीत लिख चुके हैं. हार्मनिया रिकॉर्ड्स द्वारा रिलीज किया गया यह नया गाना 'बाढ़ में बिहार, छठी मइया खेवनहार' इसी संवेदनशील रचनात्मक यात्रा का अगला पड़ाव है, जो एक ही साथ आपदा के दर्द, लोक जीवन की भावनाओं और इस संकट के बीच अटूट उम्मीद को बड़े ही प्रभावशाली ढंग से समेटे हुए है.

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