उत्तर प्रदेश में 10 राज्यसभा सीटों पर चुनाव के ऐलान के साथ ही सियासी तानाबाना बुना जाने लगा है. राजनीतिक समीकरण और विधायकों की संख्या के लिहाज से 10 में से 7 सीटों पर बीजेपी और 2 सीटों पर सपा की जीत पूरी तरह तय मानी जा रही है. हालांकि, असली घमासान 10वीं राज्यसभा सीट पर है, जिसे लेकर सपा और भाजपा के बीच एक बार फिर रस्साकशी के आसार बन रहे हैं.
सपा ने राज्यसभा चुनाव को लेकर अपनी तैयारी शुरू कर दी है. अखिलेश यादव 2024 का हिसाब बराबर करने और राज्यसभा की तीसरी सीट जीतने के लिए तानाबाना बुन रहे हैं. इसके चलते राज्यसभा चुनाव का गणित उलझ गया है.
वहीं, बीजेपी की रणनीति राज्यसभा की 8 सीटें जीतने की है, जिसके लिए गणित बिठाया जा रहा है. ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि विधानसभा चुनाव से पहले राज्यसभा के लिए 16 अक्टूबर को होने वाले चुनाव में कौन सियासी बाजी मारता है?
किन सांसदों का खत्म हो रहा कार्यकाल
उत्तर प्रदेश से जिन 10 सदस्यों का कार्यकाल खत्म हो रहा है, उनमें बीजेपी के 7 (सहित 1 रिक्त सीट), सपा के दो और एक बसपा के राज्यसभा सदस्य हैं. बीजेपी से केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अलावा अरुण सिंह, गीता शाक्य, नीरज शेखर, बृजलाल, बीएल वर्मा और सीमा द्विवेदी का राज्यसभा कार्यकाल खत्म हो रहा है. इसके अलावा डॉ. दिनेश शर्मा ने पहले ही राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था.
सपा से पार्टी के महासचिव राम गोपाल यादव और बसपा के इकलौते राज्यसभा सदस्य रामजी गौतम का कार्यकाल भी खत्म हो रहा है. इस बार की स्थिति अलग है; बसपा के लिए वापसी करना मुश्किल है तो सपा की सीटें बढ़ सकती हैं, लेकिन असल फाइट 10वीं राज्यसभा सीट के लिए है.
2024 वाला मुकाबला या बदलेगा इतिहास?
साल 2024 के राज्यसभा चुनाव में भी 10 सीटों पर मुकाबला हुआ था. उस समय सपा तीन सीटें जीतने की स्थिति में थी, लेकिन भाजपा ने सपा के पूर्व कोषाध्यक्ष संजय सेठ को आठवें उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतार दिया. इसके चलते बड़े पैमाने पर हुई क्रॉस वोटिंग के कारण सपा के तीसरे उम्मीदवार आलोक रंजन हार गए थे और भाजपा ने वह सीट अपने नाम कर ली थी.
हालांकि, इस बार के समीकरण अलग हैं. बसपा के रामजी गौतम की सीट खाली हो रही है, जिसका सपा के खाते में जाना तय माना जा रहा है. विधायकों के समीकरणों के मुताबिक सपा दो सीटें आसानी से जीत रही है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या अखिलेश यादव तीसरी सीट के लिए जरूरी संख्या बल जुटा पाएंगे? सपा ने तीसरी सीट पर जीत दर्ज करने और 2024 का हिसाब बराबर करने के लिए प्लान बना रखा है.
सपा बना रही 3 राज्यसभा सीटें जीतने का प्लान
राज्यसभा चुनाव में विधायक वोट करते हैं. यूपी में 10 राज्यसभा सीटों पर हो रहे चुनाव में राज्यसभा की एक सीट पर जीत के लिए प्रथम वरीयता के लगभग 37.9 (38) विधायकों के वोटों की जरूरत है. इसी आधार पर राज्यसभा का चुनाव होगा.
उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल 403 सदस्यों में से फिलहाल 397 विधायक हैं. समाजवादी पार्टी के पास 101 विधायक हैं, जबकि उसकी सहयोगी कांग्रेस के पास दो विधायक हैं, जिससे सपा-कांग्रेस गठबंधन की कुल संख्या 103 हो जाती है.
इस लिहाज से राज्यसभा की दो सीटों के लिए सपा को 76 वोट चाहिए, जिसके बाद 27 वोट सरप्लस बचते हैं. इस तरह सपा को तीसरी सीट जीतने के लिए 10 से 11 अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी. ऐसे में सपा में तीसरी सीट पर उम्मीदवार उतारने को लेकर मंथन चल रहा है.
बीजेपी की कितनी सीटों पर जीत कन्फर्म है?
यूपी विधानसभा में भाजपा के 256 विधायक हैं और अपने सहयोगियों के साथ मिलकर उसके पास कुल 292 विधायकों की संख्या होती है. जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के दो विधायकों के समर्थन से एनडीए के पास 294 विधायक हैं. इस तरह गठबंधन के पास बहुमत का आंकड़ा मजबूत है, जिससे उनकी 7 सीटें पक्की हैं और 8वीं सीट पर आसानी से जीतने का गणित बिठाया जा रहा है.
बीजेपी गठबंधन को 294 सदस्यों के आधार पर 7 सीटें जीतने के लिए 266 विधायकों के वोटों की जरूरत होगी. इस लिहाज से सात सीटें वह आसानी से जीत लेगी, जिसके बाद 28 अतिरिक्त वोट बचेंगे. बीजेपी को आठवीं राज्यसभा सीट जीतने के लिए 10 अतिरिक्त वोट चाहिए होंगे. क्या बीजेपी 2024 की तरह क्रॉस वोटिंग कराकर फिर से सपा को गच्चा देगी?
क्रॉस वोटिंग से बिगड़ेगा सियासी गेम
पिछली बार राज्यसभा चुनाव में सपा के 7 विधायकों ने बगावत की थी, लेकिन इस बार सपा कैडर में क्रॉस वोटिंग की गुंजाइश कम मानी जा रही है. इसके उलट इस बार सपा की नजरें भाजपा और उसके सहयोगी दलों के असंतुष्ट विधायकों पर हैं. 2024 से 2026 की स्थिति अलग है.
सुभासपा के छह विधायक हैं, जिनमें से कई विधायक सपा के संपर्क में हैं. 2027 के विधानसभा चुनाव में सपा के टिकट की उम्मीद में वे राज्यसभा चुनाव में पाला बदल सकते हैं. माना जा रहा है कि सुभासपा के 6 में से चार विधायक सपा बैकग्राउंड वाले हैं, जो सपा का झंडा लगाकर अपनी गाड़ियों में घूम भी रहे हैं. वे राज्यसभा चुनाव में सपा के पक्ष में वोट कर सकते हैं.
सुभासपा की तरह आरएलडी में भी कई विधायक सपा के बैकग्राउंड वाले हैं, जिनमें आरएलडी के मुस्लिम विधायकों पर सपा की नजरें हैं. सपा के ये पुराने चेहरे रहे हैं; क्या उन्हें अखिलेश यादव अपने साथ लाएंगे?
हालांकि, सपा के टिकट पर विधायक बनीं पल्लवी पटेल और गायत्री प्रजापति की पत्नी महाराजी देवी के रुख को लेकर भी कयासबाजी जारी है. पल्लवी पटेल सपा के पक्ष में रहती हैं या नहीं, इस पर सस्पेंस बना हुआ है. गायत्री प्रजापति की पत्नी महाराजी देवी 2024 के राज्यसभा चुनाव में वोट डालने नहीं आई थीं, लेकिन इस बार उनकी स्थिति बदल गई है. इसके अलावा अब्बास अंसारी के जेल से बाहर होने का फायदा भी सपा को मिल सकता है, जो 2024 में वोट नहीं डाल सके थे.
बीजेपी के लिए सियासी चुनौतियां कम नहीं
बीते एक साल में हुए घटनाक्रमों के कारण भाजपा के वोटों में कमी आई है. 2024 में बीजेपी ने सपा विधायकों की क्रॉस वोटिंग कराकर 8 सीटें जीत ली थीं, लेकिन पहले जैसी स्थिति अब नहीं है. पिछले दिनों यूपी के चार विधायकों का निधन हो गया है, जिसके चलते उनकी सीटें खाली हैं.
2024 के राज्यसभा चुनाव में इन चार विधायकों में से तीन विधायकों ने बीजेपी को वोट दिया था, जिनमें दो बीजेपी और एक बसपा के विधायक थे. एक वोट सपा को मिला था, जो सपा के विधायक थे. विधायकों के निधन और बदले हुए सियासी समीकरण के चलते राज्यसभा चुनाव का गणित काफी उलझ गया है.
बीजेपी के लिए आठवीं सीट जीतने के लिए एक-एक वोट जोड़े रखने की कवायद करनी होगी, तो सपा के लिए तीसरी राज्यसभा सीट जीतने के लिए बीजेपी के सहयोगी दलों के विधायकों पर नजर टिकी हुई है.
राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि सत्ता में रहते हुए क्रॉस वोटिंग कराना और विपक्षी खेमे से वोट जुटाना सरकार के लिए ज्यादा आसान होता है. अगर अखिलेश यादव तीसरी सीट पर प्रत्याशी उतारकर गंभीरता से लड़ते हैं तो मुकाबला घमासान होगा. हालांकि, मौजूदा परिस्थितियों में यही माना जा रहा है कि भाजपा आसानी से 8 सीटें और समाजवादी पार्टी 2 सीटें अपने नाम कर लेगी.