नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह की भारत यात्रा की तैयारियां तेज हो गई हैं. 23 से 25 नवंबर के बीच शाह की भारत यात्रा प्रस्तावित है. यह उनकी पहली औपचारिक द्विपक्षीय विदेश यात्रा होगी. हालांकि न्यूयॉर्क की मौजूदा यात्रा उनकी पहली विदेश यात्रा है, लेकिन भारत दौरे को पहली औपचारिक द्विपक्षीय यात्रा माना जा रहा है. भारत ने जुलाई में ही शाह को भारत आने का औपचारिक निमंत्रण दिया था.
प्रस्तावित दौरे के दौरान कनेक्टिविटी, ऊर्जा, व्यापार, बुनियादी ढांचे और बाढ़ के बाद पुनर्निर्माण जैसे मुद्दों पर जोर रहने की संभावना है. नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले की हालिया भारत यात्रा में भी आर्थिक, ऊर्जा और कनेक्टिविटी सहयोग पर चर्चा हुई थी. 23-25 नवंबर की तारीखें गुरु नानक देव की जयंती यानी गुरुपर्व के आसपास पड़ रही हैं. 2026 में गुरु नानक जयंती 24 नवंबर को है.
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रेल से बिजली परियोजनाओं तक कई मुद्दे एजेंडे में
बालेन्द्र शाह के दौरे में रक्सौल-काठमांडू ब्रॉडगेज रेल लिंक को लेकर अहम प्रगति की संभावना है. जून 2026 में दोनों देशों के अधिकारियों ने इसकी फाइनल लोकेशन सर्वे रिपोर्ट पर चर्चा की थी. जनकपुर-अयोध्या यात्री रेल सेवा शुरू करने के लिए एसओपी पर भी बातचीत हो चुकी है. ऐसे में दोनों परियोजनाओं को लेकर आगे की घोषणा हो सकती है.
ऊर्जा क्षेत्र में 750 मेगावाट पश्चिम सेती जलविद्युत परियोजना और 450 मेगावाट सेती नदी-6 परियोजना भी अहम हैं. दोनों की संयुक्त क्षमता 1,200 मेगावाट है और इनके विकास में भारत की सरकारी कंपनी एनएचपीसी जुड़ी है. हालांकि नवंबर में निर्माण समझौते पर हस्ताक्षर की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है.
सीमा और व्यापारिक कनेक्टिविटी से जुड़ी दोधारा-चांदनी इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट, महाकाली नदी पर मोटरेबल पुल और भैरहवा इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट भी संभावित कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं. नेपाल पुलिस एकेडमी का उद्घाटन भी भारत के सहयोग से तैयार परियोजनाओं में शामिल है.
भोटेकोशी बाढ़ में भारत ने दी बड़ी मदद
नेपाल की हालिया भोटेकोशी बाढ़ से हुए नुकसान के बाद पुनर्निर्माण के लिए भारत की ओर से विशेष पैकेज पर भी चर्चा हो सकती है. हालांकि पैकेज की राशि और स्वरूप की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है.
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दोनों देशों के बीच हवाई कनेक्टिविटी बढ़ाने पर भी बातचीत हो सकती है. प्रस्तावित एजेंडे में पटना और देहरादून जैसे शहरों के साथ नेपाल की सीधी हवाई कनेक्टिविटी बढ़ाने की संभावना बताई जा रही है. इसके अलावा बिजली व्यापार, नए ट्रांसमिशन लिंक और हरित ऊर्जा सहयोग पर भी चर्चा हो सकती है.
पहली औपचारिक द्विपक्षीय विदेश यात्रा होने के कारण शाह का भारत दौरा दोनों देशों के रिश्तों के लिहाज से अहम माना जा रहा है. हालांकि अंतिम कार्यक्रम और समझौतों की सूची दोनों सरकारों की आधिकारिक घोषणा के बाद ही पूरी तरह साफ होगी.