उत्तर प्रदेश में शिक्षक और स्नातक कोटे की एमएलसी चुनाव में बीजेपी और समाजवादी पार्टी में कांटे की टक्कर देखने को मिली. बीजेपी अभी तक छह सीट जीत चुकी है, जबकि समाजवादी पार्टी चार सीटें जीत चुकी है और एक सीट पर अभी भी गिनती चल रही है. वाराणसी की स्नातक एमएलसी सीट पर गिनती जारी है, जहां से सपा के प्रत्याशी आशुतोष सिन्हा आगे चल रहे हैं.
विधान परिषद की जिन 11 एमएलसी सीटों पर चुनाव हुए हैं, उसमें 5 स्नातक कोटे की सीटें हैं और छह शिक्षक कोटे की सीटें हैं. शिक्षक कोटे की सीटों में बीजेपी ने चार सीटें जीती हैं, तो सपा के खाते में दो सीटें आई हैं. स्नातक कोटे की सपा दो सीटें जीत चुकी है और एक सीट पर आगे है. बीजेपी ने दो सीटें जीती हैं.
स्नातक क्षेत्र की जिन एमएलसी सीटों पर चुनाव हुए हैं, उसमें आगरा, मेरठ, इलाहाबाद-झांसी, लखनऊ और वाराणसी-मिर्जापुर खंड की सीटें शामिल हैं. इसी तरह से शिक्षक कोटे की जिन एमएलसी सीटों पर चुनाव हुए हैं, उसमें आगरा, मेरठ, बरेली-मुरादाबाद, लखनऊ, वाराणसी और गोरखपुर-फैजाबाद खंड की सीटें हैं.
एमएलसी चुनाव में बीजेपी ने कौन-सी सीटें जीतीं
बीजेपी लखनऊ की शिक्षक सीट जीत चुकी है; पार्टी के उमेश द्विवेदी तीसरी बार एमएलसी बने हैं. मेरठ की शिक्षक और स्नातक दोनों विधान परिषद सीटें बीजेपी ने जीत ली हैं. मेरठ शिक्षक सीट से श्रीचंद शर्मा दूसरी बार बीजेपी से जीते हैं और स्नातक सीट पर दिनेश गोयल ने जीत दर्ज की है. बरेली-मुरादाबाद की शिक्षक कोटे वाली सीट पर बीजेपी प्रत्याशी डॉ. हरि सिंह ढिल्लों ने जीत दर्ज की है.
आगरा की स्नातक सीट बीजेपी के प्रत्याशी डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह जीते हैं. सीएम योगी के गृहक्षेत्र गोरखपुर की शिक्षक एमएलसी सीट बीजेपी ने जीत ली है. ध्रुव त्रिपाठी बीजेपी से एमएलसी चुने गए हैं, हालांकि इस सीट पर काफी कांटे की टक्कर देखने को मिली है.
एमएलसी चुनाव में सपा ने कौन-सी सीटें जीतीं
समाजवादी पार्टी ने वाराणसी-मिर्जापुर की शिक्षक सीट जीत ली है और स्नातक सीट पर समाजवादी पार्टी आगे चल रही है. शिक्षक सीट पर लाल बिहारी यादव जीते हैं. स्नातक सीट पर आशुतोष सिन्हा आगे चल रहे हैं. झांसी की स्नातक एमएलसी सीट पर सपा के डॉ. मान सिंह यादव ने जीत दर्ज की है.
लखनऊ की स्नातक सीट समाजवादी पार्टी ने भाजपा को हराकर छीन ली है. सपा की कांति सिंह एमएलसी चुनाव जीती हैं. आगरा की शिक्षक सीट भी समाजवादी पार्टी ने जीत ली है; यहां से डॉ. आकाश अग्रवाल ने जीत दर्ज की है. वह दूसरी बार एमएलसी बने हैं. सपा अगर वाराणसी सीट भी जीत लेती है, तो उसका आंकड़ा 5 सीटों पर पहुंच जाएगा.
बीजेपी को लगा एमएलसी चुनाव में डबल झटका
विधान परिषद चुनाव में बीजेपी को दो बड़े झटके लगे हैं. पहला झटका यह कि लखनऊ की स्नातक सीट बीजेपी हार गई, जो पहले उसके पास थी. कांति सिंह पटेल ने बीजेपी के अवनीश कुमार सिंह को हरा दिया है. दूसरी तरफ आगरा से शिक्षक कोटे वाली सीट पर आकाश अग्रवाल समाजवादी पार्टी से जीत गए हैं. आकाश पहले बीजेपी में थे और पिछला चुनाव निर्दलीय जीते थे.
वह बाद में बीजेपी में शामिल हो गए थे, लेकिन इस बार जब बीजेपी ने उन्हें टिकट नहीं दिया, तो वह समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़ गए और बीजेपी को आगरा सीट पर हरा दिया. इन्हीं दोनों सीटों पर समाजवादी पार्टी की जीत के बाद भाजपा के भीतर भी चिंता की लहर दौड़ गई है. डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा है कि समाजवादी पार्टी वहां जीत गई, जहां उन्हें नहीं जीतना चाहिए था. हम इस चुनाव की समीक्षा करेंगे; यानी बीजेपी को भी मालूम है कि इस चुनाव में उन्हें बड़ा झटका लगा है.
गोरखपुर सीट पर बीजेपी को करना पड़ा संघर्ष
गोरखपुर की शिक्षक एमएलसी सीट पर ध्रुव त्रिपाठी काफी मशक्कत के बाद जीत दर्ज कर सके. उन्हें निर्दलीय प्रत्याशी राजीव यादव से कड़ा मुकाबला करना पड़ा. बहुत मामूली बढ़त, दूसरे राउंड की काउंटिंग और द्वितीय वरीयता के आधार पर जीत मिली है. बीजेपी गोरखपुर की सीट जीतकर अपने पिछले आंकड़े के बराबर पहुंच गई है.
वाराणसी क्षेत्र की शिक्षक सीट एक बार फिर बीजेपी हार गई और स्नातक सीट पर भी हार के कगार पर खड़ी है. यह हार बीजेपी के लिए किसी झटके से कम नहीं है. वाराणसी से सपा के लाल बिहारी यादव जीते हैं, जबकि समाजवादी पार्टी के ही आशुतोष सिन्हा स्नातक सीट पर आगे चल रहे हैं. इतना ही नहीं, लखनऊ स्नातक सीट पर बीजेपी कुर्मी कैंडिडेट उतारने के बाद भी सपा की कुर्मी उम्मीदवार से जीत नहीं सकी.
एमएलसी चुनाव से सपा के हौसले बुलंद
सपा 2020 के एमएलसी चुनाव में 3 सीटें ही जीत सकी थी, लेकिन इस बार उसे दो सीटों का फायदा मिलता दिख रहा है. लखनऊ स्नातक सीट से कांति सिंह पटेल समाजवादी पार्टी की स्नातक सीट जीत गई हैं, जबकि आगरा से आकाश अग्रवाल ने सपा के लिए शिक्षक सीट जीत ली है. समाजवादी पार्टी इस जीत से उत्साहित है.
सपा ने पिछली बार 3 सीटें जीती थीं, इस बार 5 सीटें जीतकर उसने माहौल बना दिया है. अखिलेश यादव ने अपने कार्यकर्ताओं को बधाई दी है और कहा है कि कोई जश्न या जुलूस नहीं निकलना चाहिए, नहीं तो बीजेपी के लोग हंगामा खड़ा कर समाजवादी पार्टी को बदनाम करेंगे. ऐसी ही बात शिवपाल यादव ने भी अपने कार्यकर्ताओं को जीत की बधाई देते हुए कही है कि अब 2027 की बारी है.
6-5 के नतीजे के सियासी मायने क्या हैं?
शिक्षक और स्नातक सीटों के चुनाव परंपरागत रूप से केवल आम जनता के नहीं, बल्कि शिक्षकों, वकीलों, डॉक्टरों, प्रोफेसरों और स्नातकों के वोट बैंक का प्रतिनिधित्व करते हैं. बीजेपी ने 11 एमएलसी सीटों में से 6 सीटें जीत ली हैं. इसके बाद भी बीजेपी खेमे में मायूसी दिखाई दे रही है, क्योंकि समाजवादी पार्टी ने इस चुनाव में भाजपा को लखनऊ और आगरा में हराया है, जो बीजेपी का गढ़ माना जाता है.
बीजेपी ने अपने पारंपरिक सवर्ण (ब्राह्मण, राजपूत) और वैश्य आधार को साधे रखने के साथ-साथ ओबीसी उम्मीदवारों पर दांव लगाया था. सपा ने अपने 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले के तहत यादव, कुर्मी/अन्य ओबीसी, ब्राह्मण और मुस्लिम प्रत्याशी को मैदान में उतारकर अपने सामाजिक दायरे को विस्तार देने का प्रयास किया था.
जातीय समीकरणों के लिहाज से बीजेपी से तीन ब्राह्मण जीते हैं, जबकि एक ठाकुर, एक सिख और एक वैश्य समुदाय से जीते हैं. बीजेपी के 6 एमएलसी जीतकर आए हैं, जबकि समाजवादी पार्टी में दो यादव, एक कुर्मी, एक कायस्थ और एक वैश्य समुदाय से जीतकर आए हैं. मुस्लिम समुदाय से सपा ने एक प्रत्याशी उतारा था, लेकिन वह जीत नहीं सके.