उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर कांग्रेस ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं. पार्टी के भीतर राहुल गांधी तीन स्तर की रणनीति पर काम कर रहे हैं. इसमें युवाओं के बीच नई राजनीतिक पकड़ बनाना, उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के संगठन को मजबूत करना और सीट बंटवारे को लेकर किसी भी विवाद से पहले समाजवादी पार्टी (SP) के साथ गठबंधन को अंतिम रूप देना शामिल है.
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, राहुल गांधी 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के तीसरे चरण के लिए प्रयागराज जा रहे हैं. कांग्रेस का मानना है कि प्रयागराज का गांधी परिवार से ऐतिहासिक और भावनात्मक रिश्ता रहा है. पंडित जवाहरलाल नेहरू का आवास रहा आनंद भवन आजादी की लड़ाई के दौरान कांग्रेस का दफ्तर भी रहा था. बाद में इंदिरा गांधी ने 1970 में इसे भारत सरकार को दान कर दिया था.
पार्टी के भीतर यह धारणा है कि संसद से लेकर सड़कों तक छात्रों के मुद्दों पर राहुल गांधी के आक्रामक रुख से Gen-Z और युवाओं के बीच कांग्रेस की पकड़ मजबूत हो रही है. पार्टी के फीडबैक के मुताबिक, जंतर-मंतर छात्र आंदोलन में उत्तर प्रदेश से बड़ी संख्या में युवा पहुंचे थे और कांग्रेस इसी वर्ग को 2027 चुनाव से पहले अपने साथ जोड़ना चाहती है.
SP के साथ जल्द सीट बंटवारे पर जोर
पार्टी सूत्रों ने बताया कि मंगलवार को 10 जनपथ में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की अध्यक्षता में हुई उत्तर प्रदेश के सांसदों की बैठक में समाजवादी पार्टी के साथ सीट बंटवारे को जल्द अंतिम रूप देने पर जोर दिया गया. बैठक में कांग्रेस के सभी छह लोकसभा सांसद और राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी, प्रमोद तिवारी और राजीव शुक्ला मौजूद थे.
सूत्रों के अनुसार, संसद सत्र 13 अगस्त को खत्म हो रहा है और 20 अगस्त तक SP-कांग्रेस के बीच समन्वय की औपचारिक घोषणा हो जानी चाहिए, ताकि सीट बंटवारे की बातचीत समय पर पूरी हो सके. नेताओं का मानना है कि ज्यादा देरी से गठबंधन में भ्रम और कड़वाहट बढ़ सकती है. हालांकि राहुल गांधी और अखिलेश यादव के बीच बेहतर तालमेल है, लेकिन दोनों दलों की दूसरी पंक्ति के नेता सीट बंटवारे को लेकर मीडिया में लगातार बयानबाजी कर रहे हैं.
संगठन मजबूत करने की तैयारी
कांग्रेस ने यह भी तय किया है कि उत्तर प्रदेश में गठबंधन के सहारे नहीं, बल्कि अपने संगठन को मजबूत किया जाए. पार्टी का मानना है कि लखनऊ में मजबूत हुए बिना दिल्ली की सत्ता तक पहुंचना आसान नहीं होगा.
इसी रणनीति के तहत कांग्रेस ने हाल ही में पूर्व AAP मंत्री और अंबेडकरवादी नेता राजेंद्र पाल गौतम को उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया है. सूत्रों के मुताबिक, उन्हें राज्य के दलित मतदाताओं को कांग्रेस से जोड़ने की जिम्मेदारी दी गई है, क्योंकि पार्टी का मानना है कि बसपा प्रमुख मायावती का जनाधार लगातार कमजोर हो रहा है. इसके अलावा प्रियंका गांधी के करीबी माने जाने वाले पुराने AICC सचिवों प्रदीप नरवाल, धीरज गुर्जर और तौकीर आलम की जगह अभिषेक दत्त, कुणाल चौधरी, जगदीश चंद्र जांगिड़, संजीव आर्य, वरुण चौधरी और अब्दुल हन्नान को जिम्मेदारी दी गई है.
बदलाव से नई ऊर्जा
कांग्रेस के एक वर्ग का मानना है कि यह बदलाव लंबे समय से लंबित था और इससे संगठन में नई ऊर्जा आएगी. पार्टी का आकलन है कि 2024 लोकसभा चुनाव के बाद 2027 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव कांग्रेस के पुनरुत्थान का बड़ा मौका है. यदि पार्टी राज्य में अपनी स्थिति मजबूत करती है तो 2029 के लोकसभा चुनाव में उत्तर भारत में भी उसे इसका राजनीतिक लाभ मिल सकता है.