उत्तर प्रदेश की राजनीति में बसपा एक बड़े रणनीतिक बदलाव के दौर से गुजर रही है. बसपा प्रमुख मायावती यूपी विधानसभा चुनावों को देखते हुए अपने सियासी समीकरण को साधने में जुट गई हैं. बलिया की रसड़ा सीट से लगातार तीन बार बसपा विधायक रहे दिवंगत उमाशंकर सिंह के बेटे प्रिंस युकेश सिंह की सीधे राजनीति में एंट्री कराकर, उन्हें पहली पंक्ति में जगह दे दी गई है.
मायावती ने सोमवार को लखनऊ में बसपा नेताओं की बैठक बुलाई थी, जिसमें दिवंगत विधायक उमाशंकर सिंह को 2 मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई. यही नहीं, उमाशंकर सिंह के बेटे प्रिंस युकेश सिंह भी इस बैठक में शामिल हुए और उन्हें पहली पंक्ति में लगी कुर्सी पर बैठाया गया.
बसपा की बैठक में युकेश सिंह की मौजूदगी को राजनीतिक नजरिए से अहम माना जा रहा है. उमाशंकर सिंह की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के साथ-साथ, बैठक में युकेश सिंह की उपस्थिति ने यह साफ कर दिया है कि बसपा का उन्हें पार्टी का नया 'ठाकुर Gen-Z चेहरा' बनाकर पेश करने का प्लान है.
उमाशंकर सिंह की विरासत संभालेंगे युकेश सिंह
बलिया की रसड़ा विधानसभा सीट पूर्वांचल में बसपा का मजबूत गढ़ रही है. 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जब बसपा सिर्फ एक सीट जीत पाई थी, तब उमाशंकर सिंह ही एकमात्र विधायक थे जिन्होंने बसपा का झंडा फहराया था. 2012 से लेकर 2022 तक उमाशंकर सिंह लगातार तीन बार रसड़ा सीट से विधायक रहे. उमाशंकर सिंह के निधन के बाद अब उनके बेटे प्रिंस युकेश सिंह सियासी वारिस के तौर पर आगे आए हैं.
युकेश सिंह 2027 के विधानसभा चुनाव में बसपा के टिकट पर रसड़ा सीट से चुनाव मैदान में उतर सकते हैं. युकेश सिंह पहली बार सोमवार को बसपा की किसी बड़ी बैठक में शामिल हुए.
मायावती ने कहा था कि उमाशंकर सिंह ने हर विपरीत परिस्थिति में पूरी वफादारी से पार्टी का साथ दिया. अगर परिवार की इच्छा होगी, तो वह उनके बेटे युकेश सिंह को राजनीति में पूरा अवसर और सम्मान देंगी. ऐसे में युकेश की मौजूदगी को उनके राजनीतिक पदार्पण के संकेत के रूप में देखा जा रहा है.
बसपा का सहानुभूति और समर्थन का दांव
मायावती दिवंगत उमाशंकर सिंह को अपना भाई मानती थीं और उन्हें हर साल राखी बांधती थीं. उमाशंकर सिंह के निधन के बाद मायावती ने स्वयं उनके परिवार से मिलकर ढांढस बंधाया था और सार्वजनिक रूप से यह घोषणा की थी कि यदि परिवार चाहेगा, तो वह उनके बेटे युकेश सिंह को राजनीति में पूरा समर्थन देकर आगे बढ़ाएंगीय मायावती ने इसी के तहत युकेश सिंह को बैठक में बुलाया और पहली पंक्ति में जगह देकर सियासी संदेश देने की कवायद की है.
युकेश सिंह ने बताया कि बैठक के दौरान बसपा अध्यक्ष मायावती ने उनसे मुलाकात कर ढांढस बंधाया और रसड़ा में राजनीतिक विरासत संभालते हुए 'मिशन-2027' को आगे बढ़ाने की बात कही. इस संदेश के बाद युकेश की राजनीतिक भूमिका को लेकर क्षेत्र में चर्चाएं और तेज हो गई हैं. हालांकि, बसपा की तरफ से उन्हें प्रत्याशी बनाए जाने की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है, लेकिन मायावती की तरफ से उन्हें हरी झंडी मिल चुकी है.
इसे उमाशंकर सिंह के निधन से उठी सहानुभूति का समर्थन हासिल करने का दांव माना जा रहा है. हालांकि, उमाशंकर सिंह की छवि एक जमीनी और सुलभ नेता की थी. ऐसे में युकेश के लिए कॉर्पोरेट डेस्क से निकलकर कार्यकर्ताओं और आम जनता के बीच वही पकड़ बनाना सबसे बड़ी परीक्षा होगी.
युकेश सिंह को Gen-Z चेहरा बनाएगी बसपा
दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन के बाद से बसपा का फोकस Gen-Z वोटों पर है, जिसे लेकर मायावती आए दिन अपनी बात रखती नजर आती हैं. मायावती अपने भतीजे आकाश आनंद को पहले ही आगे करके Gen-Z वोटों को साधने की कवायद में जुटी हैं. इसी कड़ी में अब उमाशंकर सिंह के बेटे युकेश सिंह का नाम भी जुड़ गया है. प्रिंस युकेश सिंह पारंपरिक नेताओं से काफी अलग छवि रखते हैं.
विदेश से पढ़ाई पूरी करने के बाद युकेश पारिवारिक व्यवसाय से जुड़ गए थे. वे अपने पिता की कंपनी में बतौर सीईओ (CEO) कार्यभार संभाल रहे हैं. युकेश सिंह की शादी उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री दिनेश प्रताप सिंह के भतीजे (बृजेश सिंह) की बेटी से हुई है. इस नाते उनका राजनीतिक नेटवर्क प्रशासनिक और सरकारी गलियारों तक फैला हुआ है.
मायावती ने अपनी बैठकों में स्पष्ट किया है कि प्रदेश के युवा (Gen-Z) विरोधी दलों से नाराज हैं. ऐसे में एक पढ़ा-लिखा, आधुनिक और तकनीकी समझ रखने वाला युवा चेहरा बसपा को नए वर्ग से जोड़ सकता है. माना जा रहा है कि इसी रणनीति के तहत युकेश सिंह को आगे कर आकाश आनंद की युवा टीम तैयार करने की कोशिश की जा रही है.
युकेश सिंह को ठाकुर चेहरा बनाने का प्लान
बसपा की राजनीति में हमेशा दलित, ओबीसी और ब्राह्मण प्रमुख वोटर हुआ करते थे. मायावती अपनी इसी सोशल इंजीनियरिंग की बदौलत 2007 में सरकार बनाने में सफल रही थीं. इसी फॉर्मूले को वह 2027 में भी जमीन पर उतारने का काम कर रही हैं, लेकिन साथ में ठाकुर वोट भी जोड़ने का प्लान बनाया गया है. इसके लिए वह पहले उमाशंकर सिंह को आगे बढ़ा रही थीं, लेकिन अब उनके निधन के बाद उनके बेटे युकेश सिंह को आगे कर ठाकुर समुदाय को सियासी संदेश देने का दांव चला गया है.
पूर्वांचल में ठाकुर वोटों का बड़ा प्रभाव है. उमाशंकर सिंह ने अपने इलाके में जातिगत सीमाओं से परे जाकर लोकप्रियता हासिल की थी. इसीलिए युकेश सिंह को आगे करके बसपा इस सवर्ण वोट बैंक को अपने पाले में बनाए रखना चाहती है. ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि युकेश सिंह किस तरह से ठाकुर वोटों को बसपा के सियासी पाले में लाने का काम करते हैंय
आकाश आनंद के साथ युकेश सिंह की केमिस्ट्री
बसपा के नेशनल कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद को मायावती का सियासी उत्तराधिकारी माना जा रहा है. मायावती उन्हें अपने सियासी वारिस के तौर पर आगे बढ़ा रही हैं आकाश आनंद राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की कमान संभाल रहे हैं और बसपा में नंबर-दो की हैसियत रखते हैं. ऐसे में आकाश आनंद के बाद युकेश सिंह पार्टी का दूसरा सबसे चर्चित युवा चेहरा बनकर उभर सकते हैं.
आकाश आनंद जहां दलित और पिछड़ी जाति के युवाओं को जोड़ रहे हैं, वहीं युकेश सवर्ण और Gen-Z वर्ग को साधने का काम कर सकते हैं. लखनऊ की बैठक में प्रदेश के सभी 75 जिलों के अध्यक्षों के सामने युकेश सिंह की उपस्थिति यह संकेत देती है कि उन्हें आगे करना मायावती का एक दूरगामी मास्टरस्ट्रोक है.
आधुनिक सोच और मजबूत पारिवारिक पृष्ठभूमि वाले युकेश सिंह के जरिए बसपा यह संदेश देना चाहती है कि वह युवाओं और सवर्ण वर्ग को साथ लेकर अपने 'सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय' के फॉर्मूले को नए कलेवर में लागू करने के लिए पूरी तरह तैयार है.