रामलीला मैदान में आयोजित मेगा रैली के ठीक अगले दिन से ही कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनावों पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित कर दिया है. उत्तर प्रदेश ऐसा राज्य रहा है जहां चुनावी राजनीति में औपचारिक कदम रखने से बहुत पहले से ही प्रियंका गांधी सक्रिय रही हैं. चुनावी आहट और सियासी तपिश को देखते हुए प्रियंका गांधी ने पार्टी की रणनीति और पदाधिकारियों को सक्रिय करने की कमान खुद संभाल ली है.
यूपी विधानसभा चुनाव के लिए दीपावली के बाद कांग्रेस चुनावी कमेटियों का गठन करने का फैसला लिया गया है. इसके अलावा समाजवादी पार्टी के साथ तालमेल बिठाने के लिए कांग्रेस की कोऑर्डिनेशन कमेटी का भी गठन होगा.
कोऑर्डिनेशन कमेटी में यूपी कांग्रेस से जुड़े नेताओं के अलावा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भी शामिल होंगे. प्रियंका गांधी के आवास पर यूपी कांग्रेस नेताओं की हुई बैठक में यह फैसला लिया गया है. इसके साथ ही प्रियंका गांधी यूपी में सपा के साथ सीट शेयरिंग से लेकर मिशन-2027 को फतह करने की रणनीति तैयार करेंगी.
कांग्रेस दिग्गजों के साथ प्रियंका ने किया मंथन
प्रियंका गांधी ने अपने आवास पर उत्तर प्रदेश कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के साथ एक उच्चस्तरीय बंद कमरे में बैठक की. इस बैठक में UP कांग्रेस के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम, प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा और कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद शामिल हुए. बैठक में यूपी विधानसभा चुनाव के लिए दीपावली के बाद कांग्रेस चुनावी कमेटियों का गठन करने का फैसला लिया गया.
नवंबर की रैली में दिखे शक्ति प्रदर्शन से उत्साहित प्रियंका गांधी ने चुनावी मशीनरी को तेजी से आगे बढ़ाने के स्पष्ट निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि चुनावी तैयारियों के लिए अब समय काफी कम बचा है, इसलिए राज्य-स्तरीय विभिन्न महत्वपूर्ण कमेटियों के गठन और जिम्मेदारियां सौंपने की प्रक्रिया को तुरंत अंतिम रूप दिया जाए. प्रियंका गांधी के साथ हुई बैठक में यूपी चुनाव के ऊपर, मैनेजमेंट कमेटी और स्टेट इलेक्शन कमेटी पर चर्चा की गई.
दिवाली के बाद बनेंगी 4 अहम समितियां
बैठक के दौरान राज्य-स्तरीय चार प्रमुख समितियों के खाके पर गहन चर्चा के बाद नामों को शॉर्टलिस्ट किया गया. यूपी चुनाव के लिए घोषणापत्र समिति, चुनावी प्रबंधन समिति, विधानसभा प्रचार समिति और कोऑर्डिनेशन कमेटी का गठन किया जाएगा. यूपी चुनाव के लिहाज से ये चारों कमेटियां काफी अहम मानी जा रही हैं.
प्रियंका गांधी की बैठक में इन प्रस्तावित सूचियों को अंतिम मंजूरी के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पास भेजा जाएगा. माना जा रहा है कि दिवाली के तुरंत बाद पार्टी की ओर से इन समितियों की आधिकारिक घोषणा कर दी जाएगी. साल 2022 में प्रभारी पद छोड़ने के बाद भी प्रियंका गांधी राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस की प्रमुख प्रचारक रही हैं, लेकिन यूपी पर उनका यह केंद्रित कदम काफी अहम माना जा रहा है.
सपा के साथ सीट शेयरिंग करेंगी प्रियंका गांधी
कांग्रेस की चुनावी तैयारियों का सबसे अहम बिंदु 'गठबंधन समन्वय समिति' का गठन होगा. यह समिति समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीट-बंटवारे, गठबंधन की बैठकों और जमीनी स्तर पर बेहतर तालमेल की देखरेख करेगी. इस बात की पूरी संभावना है कि प्रियंका गांधी खुद इस समिति का हिस्सा होंगी.
कांग्रेस के कैंपेन को किस तरह से आगे ले जाना है, इन तमाम मुद्दों पर बैठक में बात हुई. अभी इंडिया गठबंधन में मुख्य रूप से कांग्रेस और सपा दो दल हैं, लेकिन कुछ अन्य छोटे दलों को लेकर भी दोनों बैठकर बात करेंगे. बहुत सारे ऐसे दल हैं, जिन्हें चुनाव नहीं लड़ना है, बल्कि केवल इंडिया गठबंधन को समर्थन देना है.
सपा प्रमुख अखिलेश यादव के साथ सीधे प्रियंका गांधी संवाद की मुख्य भूमिका निभाएंगी. साल 2024 के लोकसभा चुनावों में भी जब सपा और कांग्रेस के बीच सीटों के पेंच फंसे थे, तब प्रियंका गांधी ने ही आगे आकर अखिलेश यादव से बात की थी और मतभेदों को सुलझाकर गठबंधन का रास्ता साफ किया था.
कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सपा के साथ गठबंधन को लेकर बातचीत पहले ही काफी देरी से चल रही है. ऐसे में प्रियंका गांधी की सीधी एंट्री से प्रक्रिया में तेजी आएगी. समाजवादी पार्टी राज्य में एक बड़ा धड़ा है, इसलिए बातचीत में कई जटिल मुद्दे आएंगे, लेकिन प्रियंका कांग्रेस के लिए एक सम्मानजनक समझौता कराने की क्षमता रखती हैं.
पूर्वांचल से पश्चिमी यूपी तक चार रैलियां
कांग्रेस ने यूपी में चुनावी माहौल बनाने के लिए सूबे के अलग-अलग क्षेत्रों में 4 बड़ी रैलियों का प्लान तैयार किया है. ये रैलियां यूपी के पूर्वांचल, अवध, बुंदेलखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रों में की जाएंगी.
राहुल गांधी और अन्य शीर्ष नेताओं के लिए भी जनसंपर्क कार्यक्रमों और रैलियों का विस्तृत रोडमैप जारी किया जाएगा. संगठनात्मक फेरबदल, सपा के साथ समन्वय और एक आक्रामक प्रचार रणनीति के साथ प्रियंका गांधी एक बार फिर उत्तर प्रदेश के चुनावी संग्राम में कांग्रेस की सबसे बड़ी रणनीतिकार बनकर सामने आई हैं.