उत्तर प्रदेश में चुनावी बिसात बिछने से पहले ही बयानों के तीर चलने लगे हैं. कानपुर रैली में AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के 2 अक्टूबर वाले अल्टीमेटम के बाद अब इस पर तीखा सियासी पलटवार हुआ है. आजतक के साथ बातचीत में इमरान मसूद ने ओवैसी की सियासत पर हमला बोला. उन्होंने बिहार का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर यूपी में भी AIMIM चुनाव लड़ती है और कुछ सीटें जीतती है, तो इसका फायदा बीजेपी को हो सकता है.
मसूद ने कहा कि मान लीजिए ओवैसी की पार्टी यूपी में 8-10 सीटें जीत भी जाए, लेकिन सरकार बीजेपी की बन सकती है. यानी उनका तर्क यह था कि कुछ सीटें जीतना अलग बात है, मगर चुनाव का बड़ा असर सत्ता के समीकरण पर पड़ता है.
इमरान मसूद ने चुनावी गणित समझाते हुए कहा कि सिर्फ मुसलमानों के एकजुट होने भर से बीजेपी को मात नहीं दी जा सकती. उनका कहना था कि बीजेपी ने यह भ्रम पूरी तरह तोड़ दिया है कि अल्पसंख्यकों के बिना सरकार नहीं बन सकती. ऐसे में अलग राह पकड़ने का मतलब सीधे तौर पर वोटों का बिखराव करना है.
मसूद की बात का जोर इस पर था कि चुनाव में सिर्फ एक समुदाय के वोट के भरोसे बीजेपी को चुनौती नहीं दी जा सकती. इसके लिए व्यापक राजनीतिक समर्थन की जरूरत होती है.
सांप्रदायिकता पर पाकिस्तान का उदाहरण
बातचीत के दौरान मसूद ने सांप्रदायिकता पर भी अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि सांप्रदायिकता चाहे हिंदू पक्ष से हो या मुस्लिम पक्ष से, दोनों ही खतरनाक हैं. इसी बात को समझाने के लिए उन्होंने पाकिस्तान का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि दोनों तरफ से होने वाली सांप्रदायिकता से बचना जरूरी है. उनके बयान का केंद्र यह था कि राजनीति को धर्म के आधार पर टकराव की तरफ नहीं ले जाना चाहिए.
कानपुर रैली में ओवैसी ने क्या कहा था?
यह पूरा मामला 20 सितंबर को कानपुर में हुई ओवैसी की रैली से जुड़ा है. उन्होंने कहा था कि जो दल बीजेपी को उत्तर प्रदेश में दोबारा सरकार बनाने से रोकना चाहते हैं, वे AIMIM के साथ आएं. ओवैसी ने कहा था कि वह 2 अक्टूबर तक गठबंधन का इंतजार करेंगे, इसके बाद अपनी पार्टी के गठबंधन को लेकर फैसला बताएंगे.
अब इमरान मसूद ने इसी प्रस्ताव पर सवाल खड़े किए हैं. उनके मुताबिक, अगर AIMIM अलग से चुनाव लड़ती है तो कुछ सीटें जीतने के बावजूद उसका असर सरकार बनाने वाले चुनावी गणित पर पड़ सकता है. यही वजह है कि उनका निशाना ओवैसी के गठबंधन वाले प्रस्ताव पर है.