पंजाब की राजनीति में शिरोमणि अकाली दल की मौजूदा स्थिति और आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी महासचिव बिक्रम सिंह मजीठिया ने ‘पंचायत आजतक पंजाब’ में खुलकर अपनी बात रखी. बीजेपी के साथ संभावित गठबंधन, किसान आंदोलन, पंजाब की कानून-व्यवस्था और आम आदमी पार्टी सरकार के कामकाज पर उन्होंने कई सवाल उठाए.
पंजाब विधानसभा चुनाव में अकाली दल के बेहद कमजोर प्रदर्शन पर मजीठिया ने कहा कि 2022 के चुनाव को अलग नजरिए से देखने की जरूरत है, उनके मुताबिक, उस समय पंजाब के लोगों ने बदलाव की उम्मीद में आम आदमी पार्टी को बड़ा जनादेश दिया, उन्होंने कहा कि किसान, युवा, कर्मचारी, उद्योग और सीमावर्ती राज्य होने जैसे कई मुद्दों पर पारंपरिक पार्टियां लोगों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पा रही थीं, ऐसे में लोगों को लगा कि आम आदमी पार्टी इसका समाधान हो सकती है और उसे 90 से अधिक सीटों का बड़ा जनादेश मिला.
मजीठिया ने कहा कि उस चुनाव में कांग्रेस और अकाली दल अलग-अलग चुनाव लड़े थे और दोनों के वोट प्रतिशत में बहुत ज्यादा अंतर नहीं था, उन्होंने यह भी कहा कि अकाली दल और बीजेपी ने जब-जब गठबंधन में चुनाव लड़ा, तब-तब पंजाब में सरकार बनाने में सफलता मिली.
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बीजेपी से गठबंधन पर क्या बोले मजीठिया?
बीजेपी और अकाली दल के दोबारा साथ आने की संभावना पर मजीठिया ने कहा कि वह बीजेपी की ओर से फैसला लेने की स्थिति में नहीं हैं, गठबंधन होगा या नहीं, इसका फैसला दोनों पार्टियों का नेतृत्व करेगा. हालांकि उन्होंने दोनों दलों के पुराने रिश्ते और चुनावी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि अगर बीजेपी और अकाली दल के वोट प्रतिशत को साथ जोड़कर देखा जाए तो दोनों एक मजबूत स्थिति में दिखाई देते हैं.
मजीठिया ने बीजेपी-अकाली गठबंधन को लेकर कहा कि उनके लिए पंजाब के मुद्दे सबसे पहले हैं, उन्होंने कहा कि दोनों पार्टियों का साथ केवल चुनावी फायदे के लिए नहीं था, बल्कि पंजाब में हिंदू-सिख भाईचारे और स्थिरता से भी जुड़ा रहा है, उन्होंने 1990 के दशक के पंजाब का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौर में राज्य में बेहद खराब हालात थे, उनके मुताबिक, प्रकाश सिंह बादल और तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने हिंदू-सिख एकता और पंजाब में स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
मजीठिया ने कहा कि अकाली दल के लिए किसी भी गठबंधन में पंजाब के हित सबसे ऊपर रहेंगे, उन्होंने इसे एक तरह से ‘पंजाब फर्स्ट’ की राजनीति बताया.
कृषि कानूनों पर गठबंधन टूटने का दिया कारण
बीजेपी और अकाली दल का गठबंधन क्यों टूटा, इस सवाल पर मजीठिया ने कहा कि पंजाब के किसानों की भावनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता था, उन्होंने कहा कि अकाली दल ने कृषि कानूनों का विरोध किया था और हरसिमरत कौर बादल ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दिया था,
मजीठिया के मुताबिक, अकाली दल ने संसद में भी इस मुद्दे पर अपना विरोध दर्ज कराया और बाद में केंद्र सरकार ने कृषि कानून वापस ले लिए, उन्होंने इसे इस बात का प्रमाण बताया कि पार्टी ने उस समय पंजाब के किसानों के मुद्दे पर सही रुख अपनाया था.
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भगवंत मान पर मजीठिया का हमला
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान पर निशाना साधते हुए मजीठिया ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार के फैसलों में दिल्ली का प्रभाव है, उन्होंने दावा किया कि पंजाब सरकार का वास्तविक नियंत्रण मुख्यमंत्री के बजाय दिल्ली के नेताओं के हाथ में है.
हालांकि ये मजीठिया के राजनीतिक आरोप हैं और उन्होंने इसके समर्थन में अपने दावे पेश किए. मजीठिया ने पंजाब की कानून-व्यवस्था को लेकर भी सरकार पर गंभीर सवाल उठाए, उन्होंने राज्य में बम धमाकों, पुलिसकर्मियों की हत्या और आतंकी गतिविधियों का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार यह दावा नहीं कर सकती कि पंजाब में सब कुछ ठीक है.
मजीठिया ने मुख्यमंत्री भगवंत मान की कार्यशैली और सार्वजनिक व्यवहार को लेकर भी तीखी टिप्पणी की, उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री तीन करोड़ से अधिक पंजाबियों के लिए जिम्मेदार होते हैं और इसलिए उनसे एक अलग स्तर की जिम्मेदारी की उम्मीद की जाती है.
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मजीठिया ने अपने खिलाफ दर्ज मामलों का भी जिक्र किया, उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ ड्रग्स, आय से अधिक संपत्ति और अन्य मामलों में केस दर्ज किए गए हैं, उन्होंने दावा किया कि उनके खिलाफ कार्रवाई राजनीतिक दबाव में की गई. उन्होंने कहा कि इन मामलों के बावजूद वह अपने विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतते रहे हैं और उन्हें जनता का भरोसा हासिल है.
‘अरविंद केजरीवाल ने मुझसे माफी मांगी’
मजीठिया ने आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल के साथ अपने पुराने विवाद का भी जिक्र किया, उन्होंने कहा कि केजरीवाल ने उनसे माफी मांगी थी और उन्होंने उन्हें माफ कर दिया. मजीठिया ने कहा कि अगर उन्हें किसी बात का डर होता तो वह पंजाब के मुद्दों पर इतनी बेबाकी से सरकार को घेर नहीं पाते.