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Adhir Ranjan Chowdhury Election Result 2026 LIVE: बहरामपुर में त्रिकोणीय मुकाबला; कांग्रेस, BJP और TMC के बीच कांटे की टक्कर

Adhir Ranjan Chowdhury Vidhan Sabha Chunav Result Live Updates: 2026 के विधानसभा चुनाव में अधीर रंजन चौधरी का अपनी पारंपरिक राजनीति को विधानसभा स्तर पर आजमाना मुर्शिदाबाद की राजनीति का सबसे बड़ा आकर्षण बना हुआ है.

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बहरामपुर सीट से अधीर रंजन चौधरी का रिजल्ट 2026
बहरामपुर सीट से अधीर रंजन चौधरी का रिजल्ट 2026

बहरामपुर पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले का प्रशासनिक मुख्यालय और राज्य का सातवां सबसे बड़ा शहर है. यह सीट हमेशा से पश्चिम बंगाल की राजनीति में 'कांग्रेस का प्रवेश द्वार' मानी जाती रही है.

Live Updates:-

06:55 AM:- बहरामपुर सीट के लिए वोटों की गिनती सुबह 8 बजे शुरू होगी

06:40 AM:- काउंटिंग सेंटर के बाहर भारी सुरक्षा बल तैनात.

06:30 AM:- मतगणना केंद्र के बाहर BJP और TMC नेताओं की भीड़ जमा होनी शुरू हुई. 

इतिहास और विरासत

ऐतिहासिक केंद्र: यह भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी का पहला केंद्र था और 1857 के सिपाही विद्रोह की शुरुआती चिंगारी यहीं बरहमपुर कैंटोनमेंट में भड़की थी.

सांस्कृतिक पहचान: कोसिमबाजार का मलमल और यहां की पारंपरिक मिठाइयां जैसे 'चनाबोरा' और 'मनोहरा' इस शहर की विश्वव्यापी पहचान हैं.

चुनावी इतिहास: कांग्रेस का दबदबा और भाजपा का उदय

1951-2006: कांग्रेस ने यहां 8 बार जीत दर्ज की. 2011 में परिसीमन के बाद इसका नाम बहरामपुर कर दिया गया.

मनोज चक्रवर्ती का युग: कांग्रेस के मनोज चक्रवर्ती ने 2011 और 2016 में भारी अंतर से जीत हासिल की थी, लेकिन 2021 के चुनाव में BJP के सुब्रत मैत्रा ने पहली बार यहां 'कमल' खिलाकर सबको चौंका दिया.

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अधीर रंजन चौधरी का दांव: 2024 के लोकसभा चुनाव में भले ही यूसुफ पठान ने बहरामपुर लोकसभा जीती हो, लेकिन विधानसभा स्तर पर कांग्रेस यहां भाजपा से 6,927 वोटों से आगे रही थी. इसी बढ़त को जीत में बदलने के लिए अधीर रंजन खुद इस बार विधानसभा के रण में उतरे हैं.

वोटर प्रोफाइल और समीकरण
बहरामपुर मुख्य रूप से एक शहरी सीट है (71.88% शहरी). यहां करीब 25.10% मुस्लिम मतदाता और 12.28% अनुसूचित जाति के वोटर हैं. 2024 में यहां कुल 2,67,792 रजिस्टर्ड वोटर थे, और टर्नआउट करीब 79.35% रहा था.

2026 की चुनौती: साख की लड़ाई
2026 का चुनाव अधीर रंजन चौधरी के लिए सिर्फ एक सीट की जीत नहीं, बल्कि बंगाल में कांग्रेस के अस्तित्व की लड़ाई है. तृणमूल कांग्रेस जहां अपना खाता खोलने के लिए बेताब है, वहीं भाजपा अपने 2021 के प्रदर्शन को दोहराना चाहती है. क्या अधीर रंजन अपनी 'जमीनी नेता' की छवि के दम पर कांग्रेस की वापसी कराएंगे?

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