INC
CPM
TTP
नोटा
NOTA
IND
BSP
IND
AAP
SUCI
IND
Kerala Election Result 2026 Live: त्रिपुनिथुरा विधानसभा सीट पर INC ने दोबारा चखा जीत का स्वाद
Kerala Election Results 2026 Live: केरल चुनाव में राजनीतिक गठबंधनों का प्रदर्शन कैसा है?
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त्रिपुनिथुरा (Thrippunithura) विधानसभा क्षेत्र केरल की उन सीटों में है, जहां इतिहास आज भी राजनीति के साथ चलता है. कभी कोचीन राजपरिवार की राजधानी रहा यह इलाका सांस्कृतिक स्मृति, परंपरा और आधुनिक शहरी दबावों का अनोखा संगम है. एर्नाकुलम जिले में स्थित यह सीट एर्नाकुलम लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है और पुराने टाउन सेंटर तथा तेजी से फैलते उपनगरों के बीच एक “ब्रिज” की तरह काम करती है. यही कारण है कि यहां का मतदाता वर्ग जागरूक, मांग करने वाला और राजनीतिक रूप से बेहद सतर्क माना जाता है.
त्रिपुनिथुरा में चुनाव आमतौर पर किसी राज्यव्यापी लहर या नारों से नहीं तय होते. यहां मुकाबला वार्ड-दर-वार्ड, गली-दर-गली, और स्थानीय मुद्दों पर आधारित होता है. मतदाता प्रतिनिधि को बड़े भाषणों के आधार पर नहीं, बल्कि रोजमर्रा के अनुभव के आधार पर परखते हैं, पानी आता है या नहीं, ड्रेनेज ठीक है या नहीं, कचरा उठ रहा है या नहीं, ट्रैफिक का क्या हाल है, सड़कें कितनी सुरक्षित हैं.
इस सीट की भौगोलिक पहचान परतदार है. एक तरफ महल परिसर, मंदिर, पारंपरिक बाजार और सांस्कृतिक केंद्र हैं, तो दूसरी तरफ अपार्टमेंट क्लस्टर, व्यावसायिक गलियारे और ट्रैफिक से भरी सड़कें. शहरीकरण ने कुछ इलाकों में समृद्धि बढ़ाई है, लेकिन साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर पर दबाव भी बढ़ा है. जल निकासी, पीने का पानी, कचरा प्रबंधन, सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक जाम यहां लगातार उठने वाले मुद्दे हैं. मानसून के समय ड्रेनेज की समस्या और बाढ़ जैसी स्थिति भी लोगों की चिंता बढ़ाती है.
त्रिपुनिथुरा का सामाजिक ताना-बाना संतुलित है. यहां हिंदू समुदायों के साथ बड़ी संख्या में ईसाई और मुस्लिम आबादी भी रहती है. कोई एक समुदाय अकेले चुनाव का फैसला नहीं कर सकता, इसलिए हर पार्टी को सभी वर्गों में भरोसा बनाना पड़ता है. मतदाता वर्ग में सरकारी कर्मचारी, प्रोफेशनल, छोटे व्यापारी, सेवा क्षेत्र के कर्मचारी, कारीगर, दिहाड़ी मजदूर और एक मजबूत मध्यवर्ग शामिल है. पहचान का असर जरूर दिखता है, लेकिन अक्सर प्रदर्शन, नेता की उपलब्धता और भरोसा, पारंपरिक निष्ठा से ज्यादा निर्णायक साबित होते हैं.
त्रिपुनिथुरा की राजनीति का मूल चरित्र प्रतिस्पर्धी है. यह सीट लंबे समय से कांग्रेस और वाम दलों के बीच अदला-बदली करती रही है. यहां मतदाता नेताओं को याद रखते हैं, लेकिन उन्हें स्थायी छूट नहीं देते. कांग्रेस के के. बाबू का लंबे समय का प्रभाव और मोहल्लों में मजबूत नेटवर्क रहा है, जबकि CPI(M) के एम. स्वराज ने युवा नेतृत्व के रूप में शहरी मतदाताओं में पकड़ बनाई. यही वजह है कि यहां करीबी मुकाबले सामान्य बात है.
2021 का विधानसभा चुनाव त्रिपुनिथुरा में एर्नाकुलम जिले की सबसे चर्चित लड़ाइयों में शामिल रहा. कांग्रेस ने के. बाबू को उम्मीदवार बनाया और लंबे परिचय, प्रशासनिक अनुभव तथा जमीनी संपर्क को हथियार बनाया. CPI(M) ने मौजूदा विधायक एम. स्वराज को फिर उतारा और निरंतरता तथा संगठनात्मक ताकत पर भरोसा किया. BJP ने के. एस. राधाकृष्णन को मैदान में उतारकर शहरी वोट आधार मजबूत करने की कोशिश की. प्रचार में बहसें पूरी तरह शहरी मुद्दों पर केंद्रित रहीं, ट्रैफिक, ड्रेनेज, कचरा निपटान, पानी की सप्लाई और नगर प्रशासन की कार्यक्षमता. कोविड महामारी ने भी मतदाताओं का ध्यान इस बात पर बढ़ा दिया कि संकट में नेता कितने उपलब्ध रहे.
त्रिपुनिथुरा में 2021 में 73.88% मतदान हुआ. कुल 2,11,581 मतदाताओं में से 1,56,307 वैध वोट पड़े. NOTA को 1,099 वोट मिले. मुकाबला बेहद करीबी रहा. कांग्रेस के के. बाबू को 65,875 वोट (42.14%) मिले, जबकि CPI(M) के एम. स्वराज को 64,883 वोट (41.51%). BJP के उम्मीदवार को 23,756 वोट (15.20%) मिले. के. बाबू सिर्फ 992 वोटों से जीते, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि यह सीट कितनी बारीक संतुलन वाली है.
2021 का नतीजा इसलिए भी अहम था क्योंकि राज्य में LDF को भारी जनादेश मिला, लेकिन त्रिपुनिथुरा ने अलग फैसला किया. यह सीट बार-बार दिखाती है कि यहां मतदाता राज्य की लहर से अलग होकर स्थानीय नेतृत्व का मूल्यांकन करते हैं. यहां पारंपरिक टाउन सेंटर और सांस्कृतिक वार्ड निर्णायक भूमिका निभाते हैं. अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में संगठित वोटिंग पैटर्न मार्जिन को प्रभावित करते हैं. वहीं अपार्टमेंट और उपनगरीय रिहायशी इलाके “स्विंग जोन” हैं, जहां इंफ्रास्ट्रक्चर और शहरी सेवाओं के प्रदर्शन पर तेज प्रतिक्रिया होती है.
हालांकि त्रिपुनिथुरा में मुख्य मुकाबला कांग्रेस और वाम दलों के बीच ही है, लेकिन BJP ने एक स्थिर शहरी वोट बेस बनाया है, खासकर मध्यवर्ग के कुछ हिस्सों में. यह जीत में नहीं बदला, लेकिन मार्जिन को प्रभावित कर रहा है और मुकाबले को ज्यादा प्रतिस्पर्धी बना रहा है.
(ए के शाजी)
Adv. M. Swaraj
CPI(M)
Dr. K. S. Radhakrishnan
BJP
Nota
NOTA
Arun Babu. P. C.
SHS
Rajesh Pairoad
IND
C. B. Ashokan
SUCI
K. P. Ayappen
IND
केरलम में कांग्रेस अब तक मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला नहीं ले पाई है. दिल्ली में लगातार बैठकों और नेताओं को तलब किए जाने के बीच सस्पेंस और गहरा गया है. पार्टी के भीतर अलग-अलग दावे, सहयोगी दलों की बेचैनी और समय का दबाव हाईकमान के सामने नई चुनौती है.
केरल के कोट्टायम में कांग्रेस कार्यकर्ता ने वी.डी. सतीशन को मुख्यमंत्री बनाए जाने की मांग करते हुए आत्महत्या की कोशिश की. उसने सार्वजनिक रूप से खुद पर पेट्रोल छिड़क लिया, लेकिन पुलिस ने समय रहते उसका लाइटर छीनकर बड़ा हादसा टाल दिया. घटना के बाद उसे हिरासत में ले लिया गया.
केरलम विधानसभा चुनाव 2026 में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ ने वामपंथी गढ़ को तोड़ते हुए बड़ी जीत हासिल की है. इस चुनाव में कांग्रेस ने एकजुट होकर काम किया और जीत हासिल की.
केरलम में कांग्रेस की यह जीत राहुल की संगठनात्मक पकड़ और प्रियंका की जन-संवाद शैली का एक सफल प्रयोग है. राहुल गांधी ने जहां पार्टी के भीतर की राजनीति को संभाला और नैरेटिव सेट किया, वहीं प्रियंका गांधी ने जमीनी स्तर पर मतदाताओं को प्रभावित कर UDF के लिए निर्णायक बढ़त सुनिश्चित की.
शशि थरूर के तिरुवनंतपुरम क्षेत्र में 7 में से 4 सीटें यूडीएफ को मिलीं, जबकि 3 सीटें अन्य दलों के खाते में गईं. कांग्रेस ने नैय्याट्टिनकारा, वट्टियूरकावु और कोवलम जीतीं, जबकि बीजेपी और सीपीआई(एम) को भी सफलता मिली. 2021 के मुकाबले यूडीएफ ने बेहतर प्रदर्शन किया है. थरूर ने स्टार प्रचारक के रूप में अहम भूमिका निभाई. हालांकि बीजेपी का बढ़ता जनाधार और संगठनात्मक चुनौतियां कांग्रेस के लिए आगे भी चिंता का विषय बनी रहेंगी.
पश्चिम बंगाल में चुनावी जीत के साथ ही, भारतीय जनता पार्टी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में मिली अधूरी सफलता का चक्र पूरा कर लिया है. ब्रांड मोदी के जरिए तेजी से रफ्तार भर रही बीजेपी के लिए केरल और तमिलनाडु के नतीजों ने भी रास्ता आसान कर दिया है.
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