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Devikulam (Sc) Vidhan Sabha Election Results Live: देवीकुलम विधानसभा का रिजल्ट घोषित, INC ने CPM को हराया
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देवीकुलम विधानसभा सीट की राजनीति जमीन, मजदूरी और लंबे समय से चले आ रहे हाशिएकरण के इतिहास से गहराई से जुड़ी है. इडुक्की जिले के हाई रेंज इलाकों में फैली यह सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है. इसके अंतर्गत चाय के बड़े एस्टेट, जंगलों की सीमाओं पर बसे गांव, आदिवासी बस्तियां और पहाड़ी कस्बे आते हैं, जिनकी सामाजिक और आर्थिक पहचान प्लांटेशन व्यवस्था, पलायन और श्रम आंदोलनों से बनी है. एर्नाकुलम जैसे अर्ध-शहरी क्षेत्रों की तुलना में देविकुलम की राजनीति “विकास” के सामान्य वादों से ज्यादा “जीवन, सम्मान और अधिकार” के सवालों पर टिकती है. यहां चुनाव सिर्फ दलों के बीच मुकाबला नहीं होते, बल्कि यह तय करते हैं कि कौन उन समुदायों की असली आवाज बनेगा जो ऐतिहासिक रूप से सत्ता के किनारे पर रहे हैं.
देवीकुलम का भूगोल विशाल और कठिन है. पहाड़ी रास्ते, घुमावदार सड़कें, सीमित सार्वजनिक परिवहन और बिखरी हुई बस्तियां यहां की रोजमर्रा की हकीकत हैं. कई इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और बाजारों तक पहुंच असमान बनी हुई है. चाय बागानों में काम करने वाले मजदूर आज भी स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, जबकि आदिवासी समुदायों की आजीविका जंगल और उसके संसाधनों पर निर्भर रहती है. कुछ हिस्सों में सीमांत खेती भी होती है, लेकिन रोजगार असुरक्षा एक स्थायी चिंता है. इसके साथ जलवायु बदलाव का असर, मानव-वन्यजीव संघर्ष और संरक्षण नियमों से जुड़ी पाबंदियां लगातार लोगों के जीवन को प्रभावित करती हैं. इस कारण देविकुलम में प्रतिनिधित्व से अपेक्षा भी अलग है. यहां जनता चाहती है कि उनका विधायक जमीन पर मौजूद रहे, प्रशासन से टकराने की क्षमता रखे और हाशिए के समुदायों के पक्ष में खुलकर बोले.
इस सीट की सामाजिक बनावट बहुस्तरीय है. यहां बड़ी संख्या में अनुसूचित जाति समुदाय हैं, खासकर प्लांटेशन मजदूरों के बीच. इसके अलावा अनुसूचित जनजाति (ST) आबादी भी महत्वपूर्ण है और अलग-अलग जगहों से आए प्रवासी मूल के लोग भी बड़ी संख्या में रहते हैं. तमिल भाषी दलित मजदूर, विभिन्न आदिवासी समूह और मलयालम बोलने वाले बसने वाले लोग मिलकर एक जटिल सामाजिक ताना-बाना बनाते हैं, जहां वर्ग, भाषा और जातीय पहचान राजनीति को प्रभावित करती है. यहां जाति केवल पहचान का मुद्दा नहीं, बल्कि रोजमर्रा के अनुभव से जुड़ी है, मजदूरी, आवास, कल्याण योजनाओं तक पहुंच और जमीन के अधिकार में. राजनीतिक mobilization कई बार पार्टी शाखाओं से ज्यादा ट्रेड यूनियनों, एस्टेट कमेटियों और समुदाय संगठनों के जरिए होता है.
राजनीतिक इतिहास में देविकुलम लंबे समय से वामपंथ का गढ़ रहा है. CPI(M) और उससे जुड़े ट्रेड यूनियनों ने प्लांटेशन मजदूर आंदोलनों, कल्याणकारी हस्तक्षेपों और निरंतर जमीनी मौजूदगी के जरिए यहां मजबूत आधार बनाया. कांग्रेस कई बार चुनौती देती रही है, खासकर जब स्थानीय नेतृत्व मजबूत रहा या समुदाय-आधारित एकीकरण हुआ. फिर भी, वामपंथ की संगठनात्मक ताकत आमतौर पर उसे बढ़त देती रही है. चूंकि यह आरक्षित सीट है, इसलिए यहां नेतृत्व की विश्वसनीयता इस बात से भी जुड़ी रहती है कि प्रतिनिधि को लोग हाशिए के समुदायों का “असली” प्रतिनिधि मानते हैं या केवल पार्टी टिकट से आगे बढ़ा व्यक्ति.
2021 का विधानसभा चुनाव इसी संवेदनशील माहौल में लड़ा गया. वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) ने CPI(M) के एडवोकेट ए. राजा को उम्मीदवार बनाया, जिन्हें संगठन में मजबूत पकड़ वाला नेता माना जाता है और जिनकी छवि आदिवासी तथा प्लांटेशन मजदूर मुद्दों पर आक्रामक प्रतिनिधित्व करने वाले नेता की रही है. कांग्रेस ने डी. कुमार को मैदान में उतारा, जिन्होंने शासन से असंतुष्ट प्लांटेशन मजदूरों और दलित मतदाताओं के कुछ हिस्सों को जोड़कर मजबूत चुनौती पेश की. एक स्वतंत्र उम्मीदवार गणेशन एस भी मैदान में थे, जिनकी मौजूदगी स्थानीय नाराजगी और पहचान-आधारित राजनीति का संकेत मानी गई.
कुल 1,68,875 मतदाताओं में से 1,14,967 वोट पड़े और मतदान प्रतिशत 68.56% रहा. मतदान 06 अप्रैल 2021 को हुआ, जबकि मतगणना और नतीजे 02 मई 2021 को घोषित हुए. नतीजों में CPI(M) के ए. राजा को 59,049 वोट मिले, जो 51.4% वोट शेयर थाय. कांग्रेस के डी. कुमार को 51,201 वोट मिले, यानी 44.5% वोट शेयर. स्वतंत्र उम्मीदवार गणेशन एस को 4,717 वोट मिले, जो 4.1% था. ए. राजा 7,848 वोटों के अंतर से जीते, जो 6.9% की बढ़त थी. यह जीत वामपंथ की पकड़ को दिखाती है, लेकिन साथ ही यह भी बताती है कि सीट के भीतर असंतोष और दबाव मौजूद है.
2021 के परिणाम ने यह स्पष्ट किया कि देविकुलम आज भी वामपंथ के साथ जुड़ा है, लेकिन मतदाता अपेक्षाएं बढ़ा रहे हैं. कांग्रेस का मजबूत प्रदर्शन संकेत था कि प्लांटेशन मजदूरों और दलित मतदाताओं के कुछ हिस्से कल्याण योजनाओं की असमान डिलीवरी, जमीन अधिकार और स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली से संतुष्ट नहीं थे. वहीं, ए. राजा की जीत ने साबित किया कि देविकुलम में आक्रामक नेतृत्व, संगठन और वैचारिक स्पष्टता अभी भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं, खासकर जहां सरकार का रोल नियोक्ता, नियामक और कल्याण प्रदाता के रूप में रोजमर्रा की जिंदगी का केंद्र है.
चुनावी दृष्टि से बड़े चाय एस्टेट और मजदूर बस्तियां सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं. यहां मजदूरी समझौते, आवास, श्रमिक अधिकार और यूनियन राजनीति सीधे वोटिंग को प्रभावित करती है. आदिवासी बस्तियां और जंगल किनारे के गांव जमीन के छीने जाने, जंगल तक पहुंच, मानव-वन्यजीव संघर्ष और संरक्षण नियमों पर संवेदनशील हैं. पहाड़ी कस्बे और मिश्रित बस्तियां दूसरे स्तर की लड़ाई बनती हैं, जहाँ सड़क, परिवहन, स्कूल, अस्पताल और सरकारी सेवाएं निर्णायक होती हैं.
देवीकुलम में चुनावी मुद्दे बार-बार मजदूरी, आवास, जमीन अधिकार और कल्याण योजनाओं तक पहुंच के इर्द-गिर्द घूमते हैं. स्वास्थ्य, शिक्षा और परिवहन की समस्याएं भौगोलिक अलगाव के कारण लगातार बनी रहती हैं. पर्यावरण और संरक्षण से जुड़ी पाबंदियां अब तेजी से राजनीतिक बहस का हिस्सा बन रही हैं. यहां विधायक से उम्मीद यह रहती है कि वह केवल योजनाएं दिलाने तक सीमित न रहे, बल्कि खुले तौर पर संघर्ष करे. देवीकुलम की राजनीति में चुप्पी को अक्सर “छोड़ देना” माना जाता है, जबकि मुखरता और टकराव की क्षमता को समर्थन मिलता है.
इसी वजह से देवीकुलम अनुभव और प्रतिरोध के साथ वोट करता है. यह अपने शोषण के इतिहास को याद रखता है, वर्तमान को मजदूरी और कल्याण के पैमाने से तौलता है और ऐसे नेताओं को चुनता है जो कमजोर समुदायों और उदासीन व्यवस्था के बीच खड़े हो सकें. 2021 का फैसला इसी प्रवृत्ति का उदाहरण था, वामपंथ की निरंतरता बनी रही, लेकिन यह संदेश भी साफ था कि प्रतिनिधित्व को जमीन से जुड़ा, दिखाई देने वाला और जवाबदेह रहना होगा.
(ए के शाजी)
D. Kumar
INC
Ganesan. S
IND
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केरलम में कांग्रेस अब तक मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला नहीं ले पाई है. दिल्ली में लगातार बैठकों और नेताओं को तलब किए जाने के बीच सस्पेंस और गहरा गया है. पार्टी के भीतर अलग-अलग दावे, सहयोगी दलों की बेचैनी और समय का दबाव हाईकमान के सामने नई चुनौती है.
केरल के कोट्टायम में कांग्रेस कार्यकर्ता ने वी.डी. सतीशन को मुख्यमंत्री बनाए जाने की मांग करते हुए आत्महत्या की कोशिश की. उसने सार्वजनिक रूप से खुद पर पेट्रोल छिड़क लिया, लेकिन पुलिस ने समय रहते उसका लाइटर छीनकर बड़ा हादसा टाल दिया. घटना के बाद उसे हिरासत में ले लिया गया.
केरलम विधानसभा चुनाव 2026 में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ ने वामपंथी गढ़ को तोड़ते हुए बड़ी जीत हासिल की है. इस चुनाव में कांग्रेस ने एकजुट होकर काम किया और जीत हासिल की.
केरलम में कांग्रेस की यह जीत राहुल की संगठनात्मक पकड़ और प्रियंका की जन-संवाद शैली का एक सफल प्रयोग है. राहुल गांधी ने जहां पार्टी के भीतर की राजनीति को संभाला और नैरेटिव सेट किया, वहीं प्रियंका गांधी ने जमीनी स्तर पर मतदाताओं को प्रभावित कर UDF के लिए निर्णायक बढ़त सुनिश्चित की.
शशि थरूर के तिरुवनंतपुरम क्षेत्र में 7 में से 4 सीटें यूडीएफ को मिलीं, जबकि 3 सीटें अन्य दलों के खाते में गईं. कांग्रेस ने नैय्याट्टिनकारा, वट्टियूरकावु और कोवलम जीतीं, जबकि बीजेपी और सीपीआई(एम) को भी सफलता मिली. 2021 के मुकाबले यूडीएफ ने बेहतर प्रदर्शन किया है. थरूर ने स्टार प्रचारक के रूप में अहम भूमिका निभाई. हालांकि बीजेपी का बढ़ता जनाधार और संगठनात्मक चुनौतियां कांग्रेस के लिए आगे भी चिंता का विषय बनी रहेंगी.
पश्चिम बंगाल में चुनावी जीत के साथ ही, भारतीय जनता पार्टी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में मिली अधूरी सफलता का चक्र पूरा कर लिया है. ब्रांड मोदी के जरिए तेजी से रफ्तार भर रही बीजेपी के लिए केरल और तमिलनाडु के नतीजों ने भी रास्ता आसान कर दिया है.
Rajeev Chandrasekhar Vidhan Sabha Chunav Result Updates: निमोम विधानसभा सीट पर 25 राउंड की मतगणना पूरी होने के बाद केरल बीजेपी अध्यक्ष राजीव चन्द्रशेखर ने शानदार जीत दर्ज की. उन्होंने CPI के सिवनकुट्टी को 4,978 वोटों से हराया. सिवनकुट्टी को कुल 52,214 वोट मिले, जबकि चंद्रशेखर को 57,192 वोट प्राप्त हुए. परिणाम के साथ ही इस सीट पर बीजेपी ने बड़ी राजनीतिक बढ़त हासिल की.
केरल में UDF की जीत के बाद कांग्रेस के अंदर मुख्यमंत्री पद को लेकर खींचतान तेज हो गई है. वीडी सतीशन, केसी वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला के बीच मुकाबला है, जबकि अंतिम फैसला हाई कमान और CLP बैठक के बाद होगा.
Election Results 2026 Updates: देश के चार राज्यों बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे सोमवार को घोषित हो गए. पश्चिम बंगाल और असम के साथ ही पुडुचेरी में बीजेपी एनडीए की जीत हुई है. तमिलनाडु में विजय की टीवीके ने डीएमके को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाया, वहीं केरलम में कांग्रेस ने लेफ्ट गठबंधन को हराकर 10 साल का सत्ता का वनवास खत्म किया.
Kerala Election Results 2026 Winning Candidates List: 9 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनाव में UDF ने 102 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया और राज्य की राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ फिर से साबित कर दी. इस जीत के साथ ही कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) (CPI-M) के नेतृत्व वाले लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) की लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटने की कोशिश पर रोक लग गई.