कुन्नाथुनाड विधानसभा सीट केरल की उन चुनिंदा सीटों में है जहां सामाजिक इतिहास और आज का तेज बदलाव एक साथ दिखाई देता है. यह सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है, इसलिए यहां की राजनीति में सम्मान, बराबरी, अधिकार और प्रतिनिधित्व की लड़ाई की गहरी छाप रही है. दूसरी ओर, यह क्षेत्र लगातार कोच्चि के फैलते शहरी आर्थिक प्रभाव में भी आता जा रहा है. एर्नाकुलम जिले में स्थित कुन्नाथुनाड चालाकुडी लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है और इसकी पहचान न पूरी तरह ग्रामीण है, न पूरी तरह शहरी. यह एक “ट्रांजिशनल” सीट है, जहां मतदाता बदलाव को अपनाते हुए भी सामाजिक हाशिए की राजनीतिक स्मृति को नहीं भूलते.
यहां चुनाव आमतौर पर किसी एकतरफा लहर से तय नहीं होते. कुन्नाथुनाड में मुकाबले का फैसला संगठन की पकड़, समुदायों का भरोसा और उम्मीदवार की स्थानीय मौजूदगी से होता है. सामाजिक न्याय की भाषा यहाँ केवल नारा नहीं रहती, मतदाता उसे रोज़मर्रा के शासन, सेवा और हस्तक्षेप के रूप में देखना चाहते हैं. यही कारण है कि इस सीट पर प्रतिनिधित्व एक सतत परीक्षा की तरह काम करता है, न कि चुनाव के समय का वादा भर.
कुन्नाथुनाड का भूगोल बदलाव की कई परतें दिखाता है. पारंपरिक गांव, खेती वाले इलाके और छोटे बाजार कस्बे यहां मौजूद हैं, लेकिन इनके साथ-साथ औद्योगिक इकाइयां, नई हाउसिंग कॉलोनियां और कम्यूटर बस्तियां भी तेजी से बढ़ी हैं. कई जगह सड़कें धान के खेतों को काटती हुई निकलती हैं और पुराने मोहल्लों के बिल्कुल पास नए विकास कॉरिडोर उभर आए हैं. यह असमान बदलाव प्रशासनिक चुनौतियां पैदा करता है. पानी की सप्लाई, ड्रेनेज, सड़कें, परिवहन और सार्वजनिक सेवाएं पूरे क्षेत्र में समान नहीं हैं. इसलिए मतदाता विकास को केवल “काम हुआ” के रूप में नहीं, बल्कि “सबके लिए बराबर हुआ या नहीं” के रूप में परखते हैं.
SC आरक्षण के कारण जाति न्याय कुन्नाथुनाड की राजनीति का केंद्र है. लेकिन सीट का सामाजिक ताना-बाना बहुस्तरीय है, यहां OBC समुदाय, सवर्ण वर्ग और धार्मिक अल्पसंख्यक भी महत्वपूर्ण संख्या में हैं. इसलिए कोई एक समुदाय अकेले नतीजा तय नहीं कर सकता. आजीविका के स्तर पर भी यह सीट विविध है. कृषि मजदूर, छोटे किसान, कारीगर, व्यापारी, औद्योगिक कामगार, सेवा क्षेत्र के कर्मचारी और कोच्चि की ओर रोजाना आने-जाने वाले लोग, सभी मिलकर मतदाता बनाते हैं. इस विविधता के कारण यहां पहचान राजनीति प्रभावी जरूर है, लेकिन अंततः जीत अक्सर विश्वसनीयता, संपर्क और निष्पक्षता पर टिकती है.
कुन्नाथुनाड में कांग्रेस का ऐतिहासिक प्रभाव मजबूत रहा है, जो लंबे समय से संगठनात्मक नेटवर्क और स्थानीय नेतृत्व के आधार पर टिका रहा. लेकिन यह पकड़ स्थायी प्रभुत्व में नहीं बदली. वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF), खासकर CPI(M), ने वर्षों में यहां मजबूत संगठन तैयार किया है, विशेष रूप से कामकाजी वर्ग और हाशिए पर रहने वाले समुदायों के बीच. आरक्षित सीट होने के कारण मुकाबला केवल विकास के दावों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह भी देखा जाता है कि कौन समावेशन, अवसर और सरकारी संसाधनों तक पहुंच जैसे मुद्दों पर ठोस काम करता है. यहां नेतृत्व का मूल्यांकन इस कसौटी पर होता है कि वह संरचनात्मक असमानता को कितना “दिखाई देने वाले तरीके” से संबोधित करता है.
2021 के विधानसभा चुनाव में कुन्नाथुनाड ने अपनी प्रतिस्पर्धी प्रकृति को पूरी तरह दिखाया. CPI(M) ने एडवोकेट पी. वी. श्रीनिजिन को उतारा, जिनकी ताकत संगठन और स्थानीय मुद्दों पर निरंतर मौजूदगी रही. कांग्रेस ने वी. पी. सजींद्रन को मैदान में उतारा, जो सीट में लंबे समय से पहचाना चेहरा और मजबूत जमीनी पकड़ वाले नेता रहे हैं. चुनाव में तीसरा बड़ा आयाम Twenty20 Party एलायंस के उम्मीदवार डॉ. सुजित पी. सुरेंद्रन के रूप में सामने आया. उनकी अपील खासकर उन अर्ध-शहरी और बदलते इलाकों में दिखी जहां पारंपरिक राजनीति से असंतोष बढ़ रहा था. BJP ने रेनू सुरेश को उतारा, जबकि SDPI भी मुकाबले में मौजूद रही.
नतीजों में CPI(M) के श्रीनिजिन ने 52,351 वोट (33.9%) के साथ जीत दर्ज की. कांग्रेस के सजींद्रन को 49,636 वोट (32.2%) मिले. Twenty20 एलायंस के डॉ. सुजित पी. सुरेंद्रन को 42,701 वोट (27.7%) मिले, जो इस चुनाव का सबसे बड़ा संकेत माना गया. BJP को 7,218 वोट (4.7%) और SDPI को 1,294 वोट (0.8%) मिले. जीत का अंतर केवल 2,715 वोट (1.7%) रहा, जिसने साबित किया कि यह सीट बहुत बारीकी से तय होती है.
CPI(M) की जीत ने दिखाया कि आरक्षित सीट पर संगठन की गहराई और लगातार जमीनी संपर्क कितना निर्णायक होता है. कांग्रेस का बेहद करीबी दूसरा स्थान बताता है कि पारंपरिक समर्थन अभी भी मौजूद है, लेकिन अब वह अकेला पर्याप्त नहीं. Twenty20 एलायंस का 27.7% वोट शेयर इस सीट की बदलती मानसिकता का सबसे बड़ा प्रमाण रहा. इससे संकेत मिला कि कुन्नाथुनाड के मतदाता, खासकर तेजी से बदल रहे इलाकों में वैकल्पिक मंच को गंभीरता से अपनाने के लिए तैयार हैं. BJP और SDPI निर्णायक नहीं रहे, लेकिन उनकी मौजूदगी ने मुकाबले को खंडित किया, जिससे जीत का अंतर और छोटा बना.
SC आबादी वाले गांव केंद्र अभी भी राजनीतिक mobilization के मुख्य आधार हैं. वहां कल्याण योजनाओं की डिलीवरी, आवास, रोजगार और सामाजिक न्याय निर्णायक मुद्दे रहते हैं. दूसरी तरफ अर्ध-शहरी और कम्यूटर बस्तियां स्विंग जोन हैं, जहां सड़क, जल निकासी, सार्वजनिक परिवहन, प्रशासनिक जवाबदेही और जीवन-स्तर से जुड़े सवाल वोटिंग को प्रभावित करते हैं. इस सीट पर मतदाता विकास को “निष्पक्षता” के चश्मे से देखते हैं. नेता की विश्वसनीयता भी इसी से तय होती है, क्या वह उपलब्ध है, समस्या पर हस्तक्षेप करता है, और रोजमर्रा के मामलों में साथ खड़ा दिखता है?
कुन्नाथुनाड ऐसी सीट है जहां सामाजिक न्याय और आधुनिक संक्रमण साथ-साथ चलते हैं. यह सीट किसी एक दल को स्थायी बढ़त नहीं देती, बल्कि हर चुनाव में संगठन, भरोसा और स्थानीय प्रदर्शन की परीक्षा लेती है. 2021 का फैसला प्रभुत्व का नहीं, बल्कि संतुलित और सावधानीपूर्ण चयन का संकेत था और यही कुन्नाथुनाड की राजनीतिक पहचान है.
(ए के शाजी)
V.p.sajeendran
INC
Dr. Sujith.p.surendran
TTPty
Renu Suresh
BJP
Krishnan Eranhikal
SDPI
Sujith.k.surendran
IND
Nota
NOTA
Manikuttan.a.t
BSP
Velayudhan.v.k
IND