कोच्चि विधानसभा सीट (नंबर 80) केरल की सबसे चुनौतीपूर्ण और सबसे ज्यादा निगरानी में रहने वाली शहरी सीटों में गिनी जाती है. एर्नाकुलम जिले में स्थित यह सीट एर्नाकुलम लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है और शहर के भीतर का “इनर कोर” कवर करती है. इसमें फोर्ट कोच्चि और मट्टनचेरी जैसे ऐतिहासिक इलाके, व्यापारिक बाजार, बंदरगाह से जुड़े मोहल्ले, तटीय बस्तियां और घनी रिहायशी कॉलोनियां शामिल हैं. यह सीट पूरी तरह शहरी है, इसलिए यहां चुनाव किसी एक मुद्दे या एक ही वर्ग के आधार पर तय नहीं होते.
कोच्चि की खासियत इसकी बहुस्तरीय अर्थव्यवस्था है. यहां बंदरगाह गतिविधियां, पर्यटन, थोक व्यापार, असंगठित श्रम, छोटे उद्यम और सैलरी वाली नौकरियां, सब एक ही सीमित भूगोल में साथ मौजूद हैं. यही वजह है कि कोच्चि में राजनीति बेहद “तत्काल” और “कठोर” होती है. मतदाता विचारधारा को समझते हैं, लेकिन मतदान के समय उनका मुख्य पैमाना शासन और रोज़मर्रा की सुविधाएं होती हैं.
कोच्चि का भूगोल राजनीतिक जवाबदेही को और तेज कर देता है. सड़कें, ड्रेनेज, कचरा प्रबंधन, ट्रैफिक जाम, आवासीय भीड़ और तटीय इलाकों की संवेदनशीलता, ये सभी समस्याएं लोगों के जीवन में हर दिन सामने आती हैं. यहां प्रशासनिक विफलता छिप नहीं सकती. नागरिक सुविधाओं में छोटी सी चूक भी तुरंत राजनीतिक असंतोष में बदल जाती है. यही कारण है कि कोच्चि में शासन एक “स्थायी परीक्षा” की तरह है, जहाँ जनप्रतिनिधि को हर दिन प्रदर्शन करना पड़ता है.
सामाजिक संरचना के लिहाज से यह सीट संतुलित और मिश्रित है. मुस्लिम और ईसाई मतदाता मिलकर एक बड़ा हिस्सा बनाते हैं, वहीं हिंदू समुदाय भी अलग-अलग जाति और वर्ग के आधार पर फैला हुआ है. अल्पसंख्यक वोटों का एकजुट होना कई बार निर्णायक रहा है, लेकिन कोच्चि में चुनाव सिर्फ इसी आधार पर तय नहीं होते. तटीय मछुआरे, व्यापारी वर्ग, बंदरगाह और परिवहन श्रमिक, पर्यटन से जुड़े कर्मचारी, प्रवासी मजदूर और शहरी पेशेवर, सभी मिलकर चुनावी समीकरण बनाते हैं. पहचान का असर जरूर रहता है, पर उम्मीदवार की विश्वसनीयता, कल्याणकारी योजनाओं की डिलीवरी और स्थानीय मुद्दों पर कामकाज अक्सर निर्णायक बन जाते हैं.
राजनीतिक तौर पर कोच्चि में हमेशा कड़ा मुकाबला रहा है. यह सीट किसी एक गठबंधन की स्थायी जागीर नहीं रही. लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) और यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) के बीच यहां अक्सर अदला-बदली होती रही है. संगठनात्मक ताकत जरूरी है, लेकिन जीत की गारंटी नहीं. बीजेपी ने भी समय के साथ, खासकर कुछ मध्यमवर्गीय इलाकों में, अपना वोट शेयर बढ़ाया है, लेकिन अभी तक वह इस सीट के मूल Left बनाम Congress मुकाबले को तोड़ नहीं पाई है. शहरी मतदाता नए विकल्पों के प्रति भी खुले हैं, इसलिए नए दलों को भी यहां कुछ स्पेस मिलता रहा है.
2021 का विधानसभा चुनाव महामारी के दबाव, शहरी प्रशासन की चुनौतियों और आर्थिक अनिश्चितता के बीच हुआ. LDF ने CPI(M) के के. जे. मैक्सी को मैदान में उतारा, जो मौजूदा विधायक थे और नगर निगम से जुड़े कामों तथा नागरिक मुद्दों पर सक्रियता के लिए पहचाने जाते थे. UDF ने कांग्रेस के टोनी चम्मनी को उम्मीदवार बनाया, जो अनुभवी नेता हैं और व्यापारिक, अल्पसंख्यक तथा नागरिक नेटवर्क में मजबूत पकड़ रखते हैं. चुनाव बहुकोणीय बन गया क्योंकि ट्वेंटी 20 पार्टी भी मैदान में उतर आई, जबकि बीजेपी ने भी अपना संगठन बनाए रखा. प्रचार में कचरा प्रबंधन, ड्रेनेज, भीड़भाड़ वाला आवास, तटीय सुरक्षा, कोविड के दौरान राहत और जनप्रतिनिधि की उपलब्धता जैसे मुद्दे केंद्र में रहे.
2021 के नतीजों में कुल 1,81,842 मतदाता थे. मतदान प्रतिशत 70.78 रहा और 1,28,703 वैध वोट पड़े. NOTA को 474 वोट मिले. केजे मैक्सी ने 54,632 वोट हासिल कर जीत दर्ज की, जो 42.45 प्रतिशत था. टोनी चम्मनी को 40,553 वोट मिले यानी 31.51 प्रतिशत. ट्वेंटी 20 की उम्मीदवार शाइनी एंटनी को 19,676 वोट मिले (15.29 प्रतिशत), जिससे यह संकेत मिला कि शहरी सीट में गैर-पारंपरिक राजनीतिक प्लेटफॉर्म के लिए जगह बन रही है. बीजेपी के सी. जी. राजगोपाल को 10,991 वोट मिले (8.54 प्रतिशत). दो निर्दलीयों को मिलाकर करीब 2,300 से अधिक वोट मिले. मैक्सी की जीत का अंतर 14,079 वोट रहा, जो इस सीट के इतिहास में आमतौर पर देखे जाने वाले करीबी मुकाबलों की तुलना में काफी निर्णायक था.
इस नतीजे ने दिखाया कि कोच्चि में “वेलफेयर-संकट प्रबंधन-अल्पसंख्यक समर्थन” का संयोजन LDF के लिए फायदेमंद हो सकता है, खासकर तब जब विधायक की मौजूदगी स्थानीय स्तर पर दिखाई देती हो. वहीं कांग्रेस का वोट शेयर यह भी बताता है कि UDF अब भी मजबूत चुनौती बना हुआ है. ट्वेंटी 20 का उभार यह संकेत देता है कि शहरी मतदाता प्रशासनिक परेशानियों से नाराज होकर विकल्प तलाश सकते हैं. बीजेपी का वोट शेयर सीमित रहा, लेकिन कई इलाकों में यह मुकाबले के मार्जिन को प्रभावित करने वाला कारक बना रहा.
कोच्चि में चुनावी “हॉटस्पॉट” तटीय वार्ड और पारंपरिक बाजार क्षेत्र हैं, जहां आजीविका, आवासीय सुरक्षा और बंदरगाह से जुड़ी नीतियां निर्णायक मुद्दे होते हैं. अल्पसंख्यक बहुल इलाके भी महत्वपूर्ण हैं. वहीं मध्यमवर्गीय कॉलोनियाँ और मिश्रित व्यावसायिक क्षेत्र स्विंग जोन हैं, जहां सड़क, कचरा, ड्रेनेज और ट्रैफिक जैसे मुद्दे वोटिंग तय करते हैं.
कोच्चि एक ऐसी सीट है जहाँ जनादेश किसी भावनात्मक लहर से नहीं, बल्कि रोजमर्रा के शासन से तय होता है. यहां मतदाता न तो राजनीतिक विरासत से प्रभावित होकर वोट देते हैं, न ही नई राजनीति की ओर अंधाधुंध दौड़ते हैं. कोच्चि प्रदर्शन को पुरस्कृत करता है, लेकिन सत्ता को लगातार चेतावनी भी देता है, कि यहां जीत अंतिम नहीं, बल्कि हर दिन दोबारा साबित करनी पड़ती है.
(ए के शाजी)
Tony Chammany
INC
Shiny Antony
TTPty
C.g.rajagopal
BJP
Nipun Cherian
IND
Nota
NOTA
Rajaneesh Babu
IND
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