CPM
IUML
BJP
SDPI
नोटा
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AAP
SUCI
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गुरुवायूर विधानसभा क्षेत्र केरल के त्रिशूर जिले का एक प्रमुख विधानसभा क्षेत्र है. यह केरल विधानसभा की 140 सीटों में से सीट नंबर 63 है. यह त्रिशूर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 7 विधानसभा सेगमेंट्स में से एक है और यह एक सामान्य (अनारक्षित) सीट है. इस सीट का नाम ऐतिहासिक मंदिर नगर गुरुवायूर के नाम पर रखा गया है, जो इस विधानसभा क्षेत्र का केंद्र बिंदु है और केरल का एक बहुत बड़ा धार्मिक व सांस्कृतिक केंद्र माना जाता है. प्रशासनिक और भौगोलिक रूप से इस विधानसभा क्षेत्र में गुरुवायूर नगर पालिका और आसपास के कई पंचायत क्षेत्र शामिल हैं. इसमें चावक्काड नगरपालिका और चावक्काड तालुक की कडप्पुरम, ओरुमनायूर, पूकोडे, पुन्नायूर, पुन्नायूरकुलम, एंगनडीयूर और वडक्केकाड पंचायतें शामिल हैं.
मतदाता भागीदारी की बात करें तो चुनाव आयोग (Election Commission of India) के अनुसार 2021 के विधानसभा चुनाव में गुरुवायूर में कुल 2,11,447 पंजीकृत मतदाता थे. इस सीट पर आमतौर पर वोटिंग प्रतिशत अच्छा रहता है और यह अक्सर 70% के आसपास रहता है. 2021 में यहां मतदान लगभग 69.41% रहा. राजनीतिक प्रतिनिधित्व और चुनावी इतिहास के लिहाज से गुरुवायूर का इतिहास काफी लंबा और दिलचस्प रहा है. 1957 में गठन के बाद शुरुआती दशकों में यहां अक्सर इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के उम्मीदवार जीतते रहे, बाद में कई चुनावों में वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) खासकर सीपीआई(एम) के उम्मीदवारों का प्रभाव बढ़ा. के. वी. अब्दुल खादर (CPI[M]) 2006 से 2016 तक यहां के प्रमुख प्रतिनिधि रहे, जिन्होंने लगातार कई बार जीतकर इस इलाके में LDF का आधार मजबूत किया. इसके बाद 2021 में सीपीआई(एम) के एन. के. अकबर ने जीत दर्ज करके वाम दल की पकड़ को आगे भी बनाए रखा.
2021 के विधानसभा चुनाव परिणामों की बात करें तो एन. के. अकबर (CPI[M]) ने गुरुवायूर सीट 77,072 वोट लेकर जीती. उनका वोट शेयर लगभग 52.5% रहा और उन्होंने मजबूत बहुमत हासिल किया. उनके सबसे नजदीकी प्रतिद्वंद्वी एडवोकेट के. एन. ए. खादर (IUML) रहे, जिन्हें 58,804 वोट मिले. इस तरह अकबर की जीत का अंतर 18,268 वोट रहा. वहीं SDPI के उम्मीदवार अशरफ वडक्कूट को 2,889 वोट मिले और डेमोक्रेटिक सोशल जस्टिस पार्टी के दिलीप नायर को 6,294 वोट मिले. IUML का वोट बेस यहां अभी भी काफी मजबूत है, लेकिन 2021 का नतीजा यह दिखाता है कि इस क्षेत्र में LDF की संगठनात्मक ताकत मजबूत बनी हुई है और मुकाबला हमेशा प्रतिस्पर्धात्मक रहता है.
सामाजिक-आर्थिक दृष्टि से गुरुवायूर शहर के आसपास के शहरी इलाकों में दुकानदार, सर्विस सेक्टर के कर्मचारी और धार्मिक पर्यटन से जुड़े व्यापार प्रमुख हैं, जबकि आसपास के ग्रामीण पंचायतों में आज भी कृषि और उससे जुड़े रोजगार ज्यादा देखने को मिलते हैं. इस विधानसभा क्षेत्र की अर्थव्यवस्था छोटे व्यापार और दुकानदारी, गांवों में खेती, और धार्मिक पर्यटन व सेवाओं के मिश्रण पर आधारित है. साल भर देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु प्रसिद्ध गुरुवायूर श्रीकृष्ण मंदिर के कारण यहां आते हैं, जिससे होटल, दुकानें, परिवहन और कई तरह के असंगठित रोजगारों को लगातार सहारा मिलता है. मतदाता व्यवहार और चुनावी समीकरणों की बात करें तो गुरुवायूर की राजनीति में लंबे समय से सत्ता और प्रभाव बदलते रहने का पैटर्न देखा गया है, जो अक्सर उम्मीदवारों की छवि, समुदायों के समीकरण और स्थानीय राजनीतिक माहौल से प्रभावित होता है.
हाल के चुनावों में LDF (मुख्य रूप से CPI[M]) ने अपने संगठनात्मक नेटवर्क के जरिए समर्थन को मजबूत किया है. वहीं UDF (जिसमें IUML एक अहम घटक है) अब भी एक मजबूत चुनौती बना हुआ है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां कांग्रेस-समर्थित राजनीति का पुराना प्रभाव रहा है. कई बार छोटे दल और निर्दलीय उम्मीदवार भी कुछ वोट खींच लेते हैं, जिससे चुनाव में बहुकोणीय (multi-cornered) मुकाबले की स्थिति बन जाती है. स्थानीय मुद्दों की बात करें तो यहां प्रमुख समस्याओं में इन्फ्रास्ट्रक्चर और शहरी विकास, रोजगार व आजीविका समर्थन, और विरासत व पर्यटन प्रबंधन शामिल हैं.
चूंकि गुरुवायूर धार्मिक पर्यटन का बड़ा केंद्र है, इसलिए भीड़ प्रबंधन, सुविधाओं का विकास, ट्रैफिक, स्वच्छता और पर्यटन से जुड़े रोजगारों की स्थिरता जैसे मुद्दे अक्सर चुनावी चर्चा में रहते हैं.
पर्यटन स्थलों में सबसे प्रमुख गुरुवायूर श्रीकृष्ण मंदिर, पुन्नथुर कोट्टा, देवस्वोम म्यूज़ियम, चावक्काड बीच, और पलायूर स्थित सेंट थॉमस चर्च शामिल हैं, जो इस क्षेत्र को धार्मिक, ऐतिहासिक और पर्यटन के लिहाज से विशेष पहचान देते हैं.
(श्रेया प्रसाद)
Adv.k N A Khader
IUML
Dileep Nair
DSJP
Asharaf Vadakkoot
SDPI
Nota
NOTA
Antony
IND
M.kumar
SUCI
केरलम में कांग्रेस अब तक मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला नहीं ले पाई है. दिल्ली में लगातार बैठकों और नेताओं को तलब किए जाने के बीच सस्पेंस और गहरा गया है. पार्टी के भीतर अलग-अलग दावे, सहयोगी दलों की बेचैनी और समय का दबाव हाईकमान के सामने नई चुनौती है.
केरल के कोट्टायम में कांग्रेस कार्यकर्ता ने वी.डी. सतीशन को मुख्यमंत्री बनाए जाने की मांग करते हुए आत्महत्या की कोशिश की. उसने सार्वजनिक रूप से खुद पर पेट्रोल छिड़क लिया, लेकिन पुलिस ने समय रहते उसका लाइटर छीनकर बड़ा हादसा टाल दिया. घटना के बाद उसे हिरासत में ले लिया गया.
केरलम विधानसभा चुनाव 2026 में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ ने वामपंथी गढ़ को तोड़ते हुए बड़ी जीत हासिल की है. इस चुनाव में कांग्रेस ने एकजुट होकर काम किया और जीत हासिल की.
केरलम में कांग्रेस की यह जीत राहुल की संगठनात्मक पकड़ और प्रियंका की जन-संवाद शैली का एक सफल प्रयोग है. राहुल गांधी ने जहां पार्टी के भीतर की राजनीति को संभाला और नैरेटिव सेट किया, वहीं प्रियंका गांधी ने जमीनी स्तर पर मतदाताओं को प्रभावित कर UDF के लिए निर्णायक बढ़त सुनिश्चित की.
शशि थरूर के तिरुवनंतपुरम क्षेत्र में 7 में से 4 सीटें यूडीएफ को मिलीं, जबकि 3 सीटें अन्य दलों के खाते में गईं. कांग्रेस ने नैय्याट्टिनकारा, वट्टियूरकावु और कोवलम जीतीं, जबकि बीजेपी और सीपीआई(एम) को भी सफलता मिली. 2021 के मुकाबले यूडीएफ ने बेहतर प्रदर्शन किया है. थरूर ने स्टार प्रचारक के रूप में अहम भूमिका निभाई. हालांकि बीजेपी का बढ़ता जनाधार और संगठनात्मक चुनौतियां कांग्रेस के लिए आगे भी चिंता का विषय बनी रहेंगी.
पश्चिम बंगाल में चुनावी जीत के साथ ही, भारतीय जनता पार्टी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में मिली अधूरी सफलता का चक्र पूरा कर लिया है. ब्रांड मोदी के जरिए तेजी से रफ्तार भर रही बीजेपी के लिए केरल और तमिलनाडु के नतीजों ने भी रास्ता आसान कर दिया है.
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केरल में UDF की जीत के बाद कांग्रेस के अंदर मुख्यमंत्री पद को लेकर खींचतान तेज हो गई है. वीडी सतीशन, केसी वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला के बीच मुकाबला है, जबकि अंतिम फैसला हाई कमान और CLP बैठक के बाद होगा.
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