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NCERT ने बदली पॉलिटिकल साइंस की किताबें बनाने वाली टीम, RSS से जुड़े चार नाम शामिल

एनसीईआरटी ने 11वीं और 12वीं कक्षा की राजनीतिक विज्ञान की नई किताबें बनाने के लिए 20 सदस्यों की टीम बनाई है. इसमें जेएनयू, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी और इग्नू जैसे संस्थानों के प्रोफेसर शामिल हैं. टीम के चार सदस्य आरएसएस से जुड़े हैं. नई किताबें राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2023 के अनुसार तैयार की जाएंगी.

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NCERT ने पॉलिटिकल साइंस की किताबें बनाने वाली नई टीम का गठन किया है. इसमें नई टीम में RSS संघ से जुड़े चार नाम शामिल है. (फोटो प्रतीकात्मक है)
NCERT ने पॉलिटिकल साइंस की किताबें बनाने वाली नई टीम का गठन किया है. इसमें नई टीम में RSS संघ से जुड़े चार नाम शामिल है. (फोटो प्रतीकात्मक है)

एनसीईआरटी ने 11वीं और 12वीं क्लास की राजनीतिक विज्ञान यानी पॉलिटिकल साइंस की नई किताबें बनाने के लिए एक नई टीम बनाई है. इसमें बीस लोगों को शामिल किया गया है. पिछले साल यानी जून 2025 में जो पुरानी टीम बनाई गई थी, उसे अब पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है. नई टीम राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2023 के हिसाब से नया सिलेबस और पढ़ाई की सामग्री तैयार करेगी.

इस बीस लोगों की टीम का मुखिया निट्टे यूनिवर्सिटी के वाइस प्रेसिडेंट प्रोफेसर संदीप शास्त्री को बनाया गया है. उनके साथ डॉ. वंथांगपुई खोबुंग और डॉ. सुभाष सिंह को कॉर्डिनेटर बनाया गया है. ये दोनों लोग एनसीईआरटी के नियमों और बैठकों की जानकारी पूरी टीम को देंगे.

इस टीम में जेएनयू, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, चाणक्य यूनिवर्सिटी और इग्नू जैसे बड़े संस्थानों के प्रोफेसरों के अलावा कुछ स्कूलों के टीचर भी शामिल हैं.

टीम के चार सदस्यों काआरएसएस से पुराना नाता

इस नई टीम में चार ऐसे लोग हैं, जिनके तार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस या उससे जुड़े संगठनों से जुड़े रहे हैं. शिक्षा मंत्रालय में सलाहकार यदुनाथ देशपांडे का पुराना नाता एबीवीपी से रहा है. वह महाराष्ट्र में एबीवीपी के बड़े पद पर काम कर चुके हैं.

वहीं पुणे की संस्था ज्ञान प्रबोधिनी से जुड़े डॉ. प्रशांत दिवेकर भी इस टीम में हैं. इस संस्था को 1962 में एक आरएसएस प्रचारक ने ही शुरू किया था.

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इसके अलावा जेएनयू की प्रोफेसर वंदना मिश्रा भी इस टीम में शामिल हैं, जो पहले एबीवीपी की राष्ट्रीय सचिव रह चुकी हैं. जेएनयू के ही एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रवि रमेशचंद्र शुक्ला भी इस लिस्ट में हैं. वह आरएसएस से जुड़े संगठन रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी के एक जर्नल के संपादकीय बोर्ड में हैं. इन लोगों के नाम आने के बाद से इस पर चर्चा शुरू हो गई है.

यह भी पढ़ें: NCERT की 8वीं की किताब से हिटलर गायब, सावरकर शामिल! पार्ट‍िशन पर कांग्रेस का स्टैंड बदला

नई टीम को साफ निर्देश दिए गए हैं कि वे किताबों में भारतीय ज्ञान प्रणाली और अपनी संस्कृति को खास जगह दें. इसे पॉलिटिकल साइंस की किताबों का अहम हिस्सा बनाया जाएगा. इसके अलावा किताबों में समानता, सबको साथ लेकर चलना, अच्छी शिक्षा और तकनीक जैसी बातें भी जोड़ी जाएंगी.

टीम को काम करने से पहले एनसीईआरटी के दूसरे विशेषज्ञों से भी सलाह लेनी होगी. एक कोर ग्रुप हर चैप्टर की बारीकी से जांच करेगा.

इस टीम के सभी बीस सदस्य मिलकर चैप्टर लिखने, उनके चित्र तैयार करने और भाषा सुधारने का काम करेंगे. हर सदस्य को लिखने से पहले उस विषय पर पूरी पढ़ाई और रिसर्च करनी होगी.
तय किए गए प्लान के मुताबिक, ग्यारहवीं क्लास की नई पॉलिटिकल साइंस की किताब 30 नवंबर 2026 तक तैयार हो जानी चाहिए. वहीं बारहवीं क्लास की किताब को 30 जुलाई 2027 तक बाजार में लाने का लक्ष्य रखा गया है.

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NSUI ने नई टीम के गठन पर जताई आपत्ति

छात्र संगठन एनएसयूआई (NSUI) ने एनसीईआरटी (NCERT) द्वारा गठित नई राजनीतिक विज्ञान पाठ्यपुस्तक विकास समिति में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े सदस्यों की मौजूदगी पर तीखा विरोध जताया है. संगठन का कहना है कि देश के छात्रों की पढ़ाई और उनके भविष्य से जुड़े विषयों की किताबें तैयार करने वाली समिति में इस तरह के सदस्यों का होना बेहद गंभीर सवाल खड़े करता है.

एनएसयूआई ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा व्यवस्था को किसी भी कीमत पर वैचारिक प्रयोगशाला बनाने की कोशिश को स्वीकार नहीं किया जाएगा. संगठन ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में छात्रों की आवाज को दबने न देने का संकल्प लेते हुए कहा है कि शिक्षा में संघ की दखलंदाजी के खिलाफ हर कैंपस में मजबूती से आवाज उठाई जाएगी.


 

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