शिक्षा (Education) किसी भी राष्ट्र की प्रगति की आधारशिला होती है. भारत जैसे विशाल और विविधता से भरे देश में शिक्षा का महत्व और भी बढ़ जाता है. शिक्षा न केवल व्यक्ति के ज्ञान और सोच को विकसित करती है, बल्कि समाज और देश के समग्र विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.
प्राचीन काल से ही भारत शिक्षा का केंद्र रहा है. तक्षशिला और नालंदा जैसे विश्वविख्यात विश्वविद्यालयों में देश-विदेश से विद्यार्थी ज्ञान प्राप्त करने आते थे. उस समय शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, नैतिकता और जीवन मूल्यों का विकास था. समय के साथ शिक्षा प्रणाली में कई बदलाव आए और आधुनिक शिक्षा ने विज्ञान, तकनीक और अनुसंधान को बढ़ावा दिया.
वर्तमान भारत में शिक्षा का विस्तार तेजी से हुआ है. प्राथमिक शिक्षा को अनिवार्य बनाने के लिए सर्व शिक्षा अभियान और मिड-डे मील योजना जैसी योजनाएँ चलाई गईं. हाल ही में लागू की गई नई शिक्षा नीति 2020 का उद्देश्य रटने की बजाय समझ पर आधारित शिक्षा देना, कौशल विकास को बढ़ावा देना और विद्यार्थियों की रचनात्मक क्षमता को निखारना है.
हालांकि, भारत में शिक्षा के क्षेत्र में कुछ चुनौतियां भी हैं. ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता में अंतर, स्कूल छोड़ने की समस्या, डिजिटल सुविधाओं की कमी और शिक्षकों की अपर्याप्त संख्या जैसी समस्याएँ अभी भी मौजूद हैं. इसके बावजूद सरकार और समाज मिलकर इन समस्याओं को दूर करने का प्रयास कर रहे हैं.
हो सकता है शर्मा जी का लड़का 22 साल की उम्र में नौकरी करने लगा हो. लेकिन साइंस कहती है कि मायने उम्र का नहीं, सही बैलेंस का था. और हम बाकी लोग? हमें कैलेंडर से रेस लगाने की जरूरत नहीं है. असल फोकस इस बात पर होना चाहिए कि हम कब तैयार हैं.