जब कोई सामान्य अभ्यर्थी प्रतियोगिता परीक्षा पास करता है, तो पूरे मोहल्ले में मिठाइयां बंटती हैं. लेकिन झारखंड के JSSC CGL परीक्षा के वायरल नतीजों को देखकर लगता है कि यहां किसी एक परिवार के लिए ही 'सरकारी नौकरी की स्कीम' चल रही थी!
शुरुआत में सीआईडी (CID) जांच में सगे भाई और पत्नी की संलिप्तता सामने आई थी. लेकिन रांची की सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों द्वारा जारी किए गए इंफोग्राफिक ने पूरे सिस्टम को हिलाकर रख दिया है. छात्रों का दावा है कि अभय तिवारी के सगे ही नहीं, बल्कि दूर-दराज के रिश्तेदारों की भी इस परीक्षा में लॉटरी लगी है! वहीं दूसरी तरफ सालों से तैयारी कर रहे अभ्यर्थी धूल धूप में धक्के खाकर अपनी किस्मत चमकने का इंतजार ही करते रहे. आज रांची की सड़कों पर दिख रहे इस आक्रोश के पीछे सड़े हुए सिस्टम की ये नजीर भी है. आइए जानते हैं कि वायरल हो रहे रिश्तेदारों की लिस्ट के पीछे का क्या सच है.
छात्रों के वायरल पोस्टर में रिश्तेदारी का 'गणित'
सोमवार को विधानसभा मार्ग पर प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने जो पोस्टर लहराया, उसमें ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर (BSO) की लिस्ट में शामिल एक ही कुनबे के चेहरों को उजागर किया गया. आइए जानते हैं उसमें कौन-कौन था.
सगे रिश्तेदार: खुद अभय तिवारी, उनका सगा भाई, साला, भाभी और साली, ये सब BSO पद की मेरिट लिस्ट में बताए जा रहे हैं.
दूर के नाते-रिश्तेदार (छात्रों के पोस्टर के अनुसार)
उपेन्द्र मिश्रा (BSO रैंक 51): ममेरा भाई
तेजनारायण पंडित (BSO रैंक 68): चाचा के साढू का बेटा
बापी कुमार मिश्रा (BSO रैंक 124): मौसा के भाई का बेटा
बिक्रम पांडेय (BSO रैंक 127): साले का मौसेरा भाई
सुमित कुमार तिवारी (BSO रैंक 143): बहनोई का भागना (भांजा)
अब सोचकर देखिए जिस परीक्षा में 0.25 नंबर से अभ्यर्थी बाहर हो जाते हैं, वहां दूर-दूर के 10 रिश्तेदारों का एक साथ सिलेक्ट होना छात्रों के गले नहीं उतर रहा है.
CID पूछताछ: ₹40 लाख का 'रेट कार्ड' और बोकारो की क्लास
सीआईडी रिमांड में चल रहे मास्टरमाइंड अभय तिवारी से हुई पूछताछ में भी बड़े खुलासे हुए हैं. खुलासे के अनुसार गारंटीड सिलेक्शन के नाम पर 25 से 40 लाख रुपये वसूले जाने के आरोप हैं.यही नहीं करीब 15 अभ्यर्थियों को बोकारो ले जाकर परीक्षा से पहले 65 सवाल और जवाब रटवाए जाने का दावा किया गया है. प्रिंटिंग और परीक्षा संचालन एजेंसी 'वेबेल' के अधिकारियों की भूमिका भी अब जांच की रडार पर है.
आक्रोश की असली वजह
जब 10x10 के कमरे में 18 घंटे घिसने वाले अभ्यर्थियों ने देखा कि 'चाचा के साढू के बेटे' की लॉटरी लग गई है, तो उनका धैर्य टूट गया.रांची की सड़कों पर आज जो हजारों छात्रों का हुजूम लाठीचार्ज और वाटर कैनन झेल रहा है, वह सिर्फ एक परीक्षा रद्द कराने नहीं आया है. वे उस सड़े हुए सिस्टम से जवाब मांगने आए हैं, जिसने 'योग्यता' को दरकिनार कर 'रिश्तेदारी और पैसे' के दम पर नौकरियों की रेवड़ियां बांटी हैं.