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मराठी मीडियम से बोस्टन यून‍िवर्स‍िटी, फिर आंदोलन से झुकाई सरकार! जानिए कौन हैं अभिजीत दिपके

अभिजीत दिपके ने मराठी माध्यम से पढ़ाई शुरू कर इंजीनियरिंग और फिर अमेरिका में मास्टर्स की पढ़ाई की. उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षा सुधारों के लिए विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया, जिससे पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा. उनकी पार्टी 'कॉकरोच जनता पार्टी' आम जनता के हक की आवाज़ कैसे बन गई, जान‍िए पूरी कहानी...

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मराठी माध्यम के स्कूल से पढ़ाई की शुरुआत करके बोस्टन यूनिवर्सिटी तक पहुंचने और अब भारत की राजनीति में एक चर्चित चेहरा बनने वाले अभिजीत दिपके ने एक लंबा सफर तय किया है. वे वही चेहरा हैं जिन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर उस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया, जिसके दबाव में आकर देश के पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा था. लेकिन आखिर उन्होंने क्या पढ़ाई की है और कैसे उनके विचारों ने यह रूप लिया? आइए जानते हैं.

भारत के पूर्व शिक्षा मंत्री ने कुछ ही दिन पहले अपने पद से इस्तीफा दिया है. जंतर-मंतर पर हुए जिस प्रदर्शन ने पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद छोड़ने पर मजबूर किया, उसकी अगुवाई कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके कर रहे थे. इस पार्टी का गठन मई में देश के मुख्य न्यायाधीश द्वारा की गई एक टिप्पणी के बाद हुआ था.

मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणी के तुरंत बाद विवाद खड़ा हो गया, जिसके बाद अमेरिका से जनसंपर्क की पढ़ाई करके लौटे दिपके ने कॉकरोच के नाम पर इस पार्टी को बनाने का ऐलान कर दिया. पार्टी के मुताबिक, 'कॉकरोच' नाम उन आम लोगों का प्रतीक है जो सिस्टम द्वारा पूरी तरह नजरअंदाज किए जाने के बावजूद अपना अस्तित्व बचाए रखते हैं.

पार्टी बनाने के तुरंत बाद, दिपके ने अपना पूरा ध्यान शिक्षा सुधारों पर केंद्रित कर दिया और दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन का ऐलान कर दिया. उनकी मांग थी कि परीक्षाओं में हो रही धांधली से लेकर सरकारी शिक्षा की गिरती गुणवत्ता जैसे मुद्दों पर शिक्षा मंत्रालय अपनी जवाबदेही तय करे.

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कैसे शुरू हुआ जंतर-मंतर का आंदोलन?
यह प्रदर्शन जंतर-मंतर के बाहर दिपके और उनके समर्थकों की एक छोटी सी सभा के रूप में शुरू हुआ था. शुरुआती दिनों में सोशल मीडिया और जनसभाओं के जरिए मिली अपीलों के बाद छात्र, शिक्षक, अभिभावक और शिक्षा कार्यकर्ता इससे जुड़ते चले गए. दिपके रोज इस सभा को संबोधित करते थे और उनका मुख्य तर्क यही था कि देश के शिक्षा तंत्र को कामचलाऊ उपायों की नहीं, बल्कि बुनियादी और व्यापक सुधारों की सख्त जरूरत है.

जैसे-जैसे दिन बीतते गए, अलग-अलग राज्यों से और अधिक छात्र इस आंदोलन में शामिल होते गए, जिसने इसे एक राष्ट्रीय स्तर के बड़े प्रदर्शन में बदल दिया और इस मुद्दे को देश की सुर्खियों में बनाए रखा. लगातार बढ़ते इस दबाव के सामने आखिरकार सरकार को झुकना पड़ा और धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा आ गया.

जंतर-मंतर पर इस आंदोलन की अगुवाई करने वाले दिपके इससे पहले अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के साथ भी काम कर चुके हैं. औरंगाबाद के रहने वाले दिपके कई मौकों पर भारतीय शिक्षा व्यवस्था की खुलकर आलोचना कर चुके हैं और इसमें बड़े बदलावों की वकालत करते रहे हैं.

आइए अब नजर डालते हैं उनकी पढ़ाई-लिखाई और उस विचारधारा पर, जिसने उन्हें राजनीतिक अवसर को पहचानकर अपनी पार्टी बनाने की दिशा में मोड़ा.

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शुरुआती जीवन और स्कूली शिक्षा
महाराष्ट्र में साल 1996 में जन्मे दिपके महज एक साल के अंतर से जनरेशन-ज़ी यानी Gen-Z का हिस्सा बनने से चूक गए, लेकिन वे बार-बार कहते आए हैं कि वे इसी पीढ़ी के मुद्दों और आवाज का प्रतिनिधित्व करते हैं. पार्टी की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, वे एक मध्यमवर्गीय मराठी भाषी परिवार से ताल्लुक रखते हैं.

उनके पिता राज्य के बिजली विभाग में इंजीनियर के रूप में कार्यरत थे, जबकि उनकी मां घर पर ही एक छोटा होम ट्यूशन सेंटर चलाती हैं.

दिपके ने कक्षा 10वीं तक की पढ़ाई मराठी मीडियम स्कूल से पूरी की, जिसके बाद उन्होंने 11वीं और 12वीं की पढ़ाई के लिए सीबीएसई इंग्लिश मीडियम स्कूल का रुख किया. पार्टी की वेबसाइट के मुताबिक, उन्होंने 12वीं बोर्ड में 92% अंक हासिल किए थे और उनके पास फिजिक्स, केमिस्ट्री व मैथ्स विषय थे.

हालांकि, पार्टी की ही वेबसाइट पर इसको लेकर थोड़ा भ्रम भी नजर आता है. एक तरफ जहां वेबसाइट कहती है कि उन्होंने 11वीं और 12वीं की पढ़ाई सीबीएसई इंग्लिश मीडियम स्कूल से की, वहीं आगे यह भी लिखा है किउन्होंने 12वीं की बोर्ड परीक्षा महाराष्ट्र स्टेट बोर्ड में फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स विषय के साथ 92% अंक प्राप्त किए. वेबसाइट के ये दोनों दावे आपस में मेल नहीं खाते और विरोधाभासी लगते हैं.

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इंजीनियरिंग और अमेरिका में छात्र जीवन
अभिजीत दिपके ने साल 2018 में शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज, औरंगाबाद से कंप्यूटर इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन की डिग्री पूरी की.

वे अपने कॉलेज की डिबेट सोसायटी और स्टूडेंट काउंसिल के सक्रिय सदस्य थे. कॉलेज के दिनों में उन्होंने टियर-2 इंजीनियर नाम से एक ब्लॉग भी लिखा था, जो काफी पढ़ा और शेयर किया गया था. इस ब्लॉग के जरिए वे आईआईटी और एनआईटी सिस्टम से बाहर पढ़ने वाले इंजीनियरिंग छात्रों के सामने आने वाली ढांचागत समस्याओं और असमानताओं पर लिखते थे.

ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद, दिपके ने पुणे की दो स्टार्टअप कंपनियों में चार साल तक बैकएंड डेवलपर के रूप में काम किया. इसके बाद साल 2023 में उन्हें बोस्टन यूनिवर्सिटी के पार्डी स्कूल ऑफ ग्लोबल स्टडीज में दाखिला मिल गया.

यहाँ वे दक्षिण एशियाई राजनीतिक अर्थव्यवस्था पर ध्यान केंद्रित करते हुए अंतरराष्ट्रीय संबंध में मास्टर्स की पढ़ाई कर रहे हैं. पार्टी की वेबसाइट के अनुसार, उन्हें आंशिक छात्रवृत्ति मिली हुई है और वे मई 2026 से स्टूडेंट वीजा पर वहां रह रहे हैं.

दिपके का शैक्षणिक सफर काफी विविध रहा है. उन्होंने पहले मराठी मीडियम में पढ़ाई, फिर सीबीएसई स्कूल में बदलाव, उसके बाद इंजीनियरिंग और फिर मास्टर्स प्रोग्राम की शुरुआत. आज वे भारतीय राजनीति का एक चर्चित चेहरा बन चुके हैं, जिसकी शुरुआत उन्होंने भारत के शिक्षा मंत्री को पद से हटाने और देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग के साथ की है.

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