धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता हैं और भारत सरकार में शिक्षा मंत्री रहे हैं. धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई 2026 को इस्तीफा दे दिया. NEET-UG परीक्षा में हुई गड़बड़ी को लेकर देशभर में जारी विवाद और जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच उन्होंने यह फैसला लिया.
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति से की. वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े रहे और बाद में भाजपा के संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां संभालीं. वर्ष 2000 में वह ओडिशा की पल्लाहारा विधानसभा सीट से विधायक चुने गए और 2000 से 2004 तक विधानसभा के सदस्य रहे.
इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई. वर्ष 2004 में ओडिशा की देवगढ़ लोकसभा सीट से सांसद चुने गए. मार्च 2018 में उन्हें मध्य प्रदेश से राज्यसभा के लिए निर्वाचित किया गया. संसद और संगठन दोनों स्तरों पर उन्होंने भाजपा की विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं. अगस्त 2011 में उन्हें झारखंड में पार्टी के कार्यों की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी.
प्रधान 2014 में राज्य मंत्री (Minister of State in 2014) के रूप में शामिल हुए और 2017 में उन्हें कैबिनेट रैंक में पदोन्नत किया गया. उन्हें 2019 में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (Ministry of Petroleum and Natural Gas in 2019) मिला. उन्होंने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार के दूसरे कार्यकाल में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस और इस्पात मंत्री (Minister of Petroleum and Natural Gas and Steel ) के रूप में भी काम किया है.
उन्हें 2011 में पार्टी के महासचिव के रूप में नियुक्त किया गया था और 2018 में मध्य प्रदेश से राज्यसभा के सदस्य (member of Rajya Sabha) के रूप में चुने गए थे. भाजपा के वरिष्ठ नेता अमित शाह (Amit Shah) के करीबी सहयोगी प्रधान ने ओडिशा, उत्तराखंड, कर्नाटक और झारखंड में विभिन्न पार्टी गतिविधियों का भी आयोजन किया है.
उनका जन्म 26 जून 1969 को ओडिशा के तालचेर में हुआ था. उनके पिता डॉ. देबेंद्र प्रधान भी भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्र सरकार में मंत्री रह चुके हैं.
प्रधान ने 1997 में मृदुला प्रधान से शादी की (Wife) और उनके दो बच्चे (Children) हैं.
इनका ऑफिशियल ट्विटर हैंडल @dpradhanbjp नाम से है और फेसबुक पेज का नाम Dharmendra Pradhan है. ये इंस्टाग्राम पर dpradhanbjp नाम से एक्टिव हैं.
MP Datia Bypoll Election Result: मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर कांग्रेस ने जीत दर्ज कर ली है. कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने बीजेपी के आशुतोष तिवारी को 6,016 वोटों से हराया. इस जीत के साथ कांग्रेस ने दतिया सीट अपने कब्जे में बरकरार रखी.
नीट पेपर लीक मामले को लेकर चले आंदोलन के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) अब अपनी अगली रणनीति तैयार करने में जुटी है. 5 अगस्त को महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में संगठन की कोर कमेटी की बैठक प्रस्तावित है. बैठक में आगे के अभियानों, युवाओं से जुड़े मुद्दों और संगठन की आगामी कार्ययोजना पर चर्चा होने की संभावना है. इसके बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस भी आयोजित की जा सकती है.
अभिजीत दिपके ने मराठी माध्यम से पढ़ाई शुरू कर इंजीनियरिंग और फिर अमेरिका में मास्टर्स की पढ़ाई की. उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षा सुधारों के लिए विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया, जिससे पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा. उनकी पार्टी 'कॉकरोच जनता पार्टी' आम जनता के हक की आवाज़ कैसे बन गई, जानिए पूरी कहानी...
CJP प्रमुख अभिजीत दिपके ने NEET आंदोलन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री पद छोड़कर इन्फ्लुएंसर बन जाना चाहिए. उन्होंने छात्रों के उत्पीड़न और पेपर लीक मामलों पर भी सवाल उठाए. उन्होंने पेपर लीक मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट के वादे के क्रियान्वयन पर भी सवाल उठाए और कहा कि लोगों को सिर्फ घोषणाएं नहीं, बल्कि तेज कार्रवाई चाहिए.
छत्रपति संभाजीनगर लौटने के बाद अभिजीत दिपके ने मीडिया से बातचीत में केंद्र सरकार, कानूनों के अमल और छात्र आंदोलनों को लेकर कई बयान दिए. उन्होंने दावा किया कि यदि आंदोलन में शामिल छात्रों और युवाओं के खिलाफ कार्रवाई हुई तो पहले से बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा. साथ ही उन्होंने कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन और प्रशासनिक जवाबदेही पर भी सवाल उठाए.
पेपर लीक पर छात्रों के उपजे गुस्से को शांत करने के लिए बीजेपी ने धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ले लिया है. धर्मेंद्र प्रधान कुर्मी समाज से आते हैं, जिसे ओबीसी की प्रभावशाली जातियों में गिना जाता है. ऐसे में धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा बीजेपी के लिए यूपी में कहीं सियासी वरदान न बन जाए?
केंद्रीय शिक्षा मंत्री रहे धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद उत्तर प्रदेश में जातीय राजनीति फिर से उभर कर सामने आई है. सुभासपा प्रमुख और मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर सवाल दागा है.
'कॉकरोच जनता पार्टी' के उग्र प्रदर्शन ने साबित कर दिया कि सत्ता बहरी नहीं है. दूसरी तरफ E20 ईंधन की जल्दबाजी में सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा का लक्ष्य तो छू लिया, लेकिन पुरानी गाड़ियों के इंजनों और मध्यम वर्ग के भरोसे को दांव पर लगा दिया. ऐसे में सवाल ये है कि सड़क पर उतरी भीड़ के शोर के आगे घुटने टेकती सरकार क्या उस आम नागरिक की शांत पुकार सुन पाएगी, जो हर रोज पेट्रोल पंप पर ठगा सा महसूस कर रहा है?
लोकसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार पर कई मुद्दों को लेकर निशाना साधा. उन्होंने छात्र आंदोलन, पेपर लीक, महिलाओं की सुरक्षा और युवाओं के भरोसे जैसे विषय उठाए. भाषण के दौरान प्रधानमंत्री पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि कैमरे का नहीं बल्कि दिल का एंगल बदलने की जरूरत है. उनके बयान की चर्चा सदन से सोशल मीडिया तक रही.
बिलकिस बानो मामले में दोषियों की रिहाई को लेकर दिए गए पुराने बयान की वजह से शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी विपक्ष के निशाने पर आ गए हैं. कांग्रेस नेताओं राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री मोदी पर तीखा हमला बोला है. राहुल गांधी ने जोशी को 'बलात्कारियों का रक्षक' करार दिया है.
जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट के दौरान जब केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह CJP के प्रतिनिधियों से बात कर रहे थे, तब उन्होंने ये भी प्रस्ताव रखा था कि धर्मेंद्र प्रधान का मंत्रालय बदल देते हैं. सूत्रों की माने तो CJP ने इस प्रस्ताव को नहीं माना था.
पूर्व केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हैं. संसद पहुंचने पर एनडीए सांसदों ने उनका स्वागत किया, जबकि कई वरिष्ठ भाजपा नेता भी उनसे मिलने पहुंचे. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी रणनीति के अनुभव को देखते हुए पार्टी उन्हें आने वाले विधानसभा चुनावों या संगठन में नई जिम्मेदारी दे सकती है. हालांकि, इस पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है.
दिल्ली में हुए आंदोलन को कुछ लोग इसे सिर्फ एक विरोध प्रदर्शन मान रहे हैं, लेकिन सच ये है कि भारत के Gen-Z ने देश को शिक्षा सुधार का एक नया रास्ता दिखा दिया है. आज देश के करोड़ों घरों में सवाल पूछा जा रहा है कि पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर जेन-ज़ी युवाओं का जो आंदोलन हुआ, उससे इस देश को आखिर मिला क्या? देखें ब्लैक एंड व्हाइट.
पेपर लीक के मुद्दे पर जंतर-मंतर में चले छात्र आंदोलन के दौरान कई ऐसे युवा भी प्रदर्शन में शामिल दिखाई दिए, जिन्हें भाजपा और एनडीए से जुड़े नेताओं के परिवारों का बताया जा रहा है. आंदोलन के आयोजकों का दावा है कि इन छात्रों ने भी सरकार के खिलाफ अपनी आवाज उठाई. यह आंदोलन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद समाप्त हुआ.
नीट पेपर लीक आंदोलन का नेतृत्व करने वाली सीजेपी ने आरोप लगाया है कि प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई और एफआईआर जारी रहने पर वह फिर से देशव्यापी आंदोलन शुरू करेगी. संगठन का कहना है कि पहले हुए समझौते का पालन नहीं किया जा रहा. वहीं, कपिल सिब्बल ने प्रदर्शनकारी छात्रों की कानूनी सहायता के लिए एक करोड़ रुपये देने की घोषणा की.
दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का विरोध प्रदर्शन खत्म हो चुका है. छात्रों के विरोध के बाद शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो गया. केंद्र सरकार ने सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक भी संसद में पेश कर दिया. लेकिन इसके बावजूद संसद की तस्वीर नहीं बदली है. विपक्ष अब भी आक्रामक तेवर बनाए हुए. अब उनकी मांग है कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुए हमले पर सरकार जवाब दे. दिल्ली में पैलेट गन का इस्तेमाल और बिहार में एके-47 के इस्तेमाल पर राजनीति गरमाई हुई है.
संसद के चालू मॉनसून सत्र के दूसरे हफ्ते का सोमवार को हंगामेदार आगाज हुआ. नीट पेपर लीक को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी का प्रोटेस्ट समाप्त होने, शिक्षा मंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद ऐसा माना जा रहा था कि दोनों सदनों में कार्यवाही चल सकती है. लेकिन ऐसा हुआ नहीं और बार-बार स्थगित किए जाने के बाद दोनों सदनों की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित करने की घोषणा चेयर को करनी पड़ी.
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास ने बताया कि पार्टी कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात करेगी. वहीं, अभिजीत दिपके ने कहा है कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा.
धर्मेंद्र प्रधान शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफ़ा देने के बाद आज जब पहली बार संसद भवन पहुंचे तो उनके स्वागत के लिए एनडीए सांसदों स्वागत किया. धर्मेंद्र प्रधान के चेहरे पर मुस्कान थी. एक सांसद ने कहा पहली बार है जब किसी मंत्री ने बिना किसी आरोप के ही इस्तीफ़ा दे दिया.
केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद धर्मेंद्र प्रधान पहली बार संसद पहुंचे. यहां कांग्रेस नेता जयराम रमेश से मुलाकात के दौरान उन्होंने खुद को 'सड़क का लड़ाका' बताते हुए प्रतिक्रिया दी. संसद में एनडीए सांसदों ने उनका स्वागत किया. फिलहाल उनकी अगली जिम्मेदारी को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हैं.
Dharmendra Pradhan के इस्तीफा देने के बाद शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी प्रह्लाद जोशी को सौंपी गई है, जो कर्नाटक के धारवाड़ से सांसद हैं. नए और पुराने दोनों दी शिक्षा मंत्री करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं.