उत्तर प्रदेश में आठ वर्षों से संघर्षरत 68,500 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों के प्रतिनिधिमंडल ने 2 अक्टूबर को अहिंसा दिवस के अवसर पर केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल से मिलकर ज्ञापन सौंपा. अभ्यर्थियों ने अपना दल (एस) की प्रमुख के सामने आरक्षण प्रक्रिया की अनियमितताओं का मुद्दा उठाया. प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, पूर्व में बेसिक और माध्यमिक शिक्षा मंत्रियों की बैठक में आरक्षण में हुई गड़बड़ी की बात स्वीकार की जा चुकी है. अभ्यर्थियों ने केंद्रीय मंत्री से अनुरोध किया कि वे इस संवेदनशील विषय को सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने उठाकर पारदर्शी समाधान निकलवाएं.
आश्वासन और अभ्यर्थियों का पक्ष
मुलाकात के दौरान अभ्यर्थी आशुतोष ने बताया कि शांति दिवस होने के कारण उन्होंने कोई उग्र प्रदर्शन या घेराव नहीं किया. अभ्यर्थियों ने एक परिवार और समाज के नाते अपनी समस्याएं सामने रखीं. केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने अभ्यर्थियों को आश्वस्त किया है कि इस मुद्दे को मजबूती से उठाकर उचित कार्रवाई कराई जाएगी.
23,000 खाली पदों पर नियुक्ति की मांग
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि वे बीते आठ सालों से सिर्फ आश्वासनों के भरोसे जी रहे हैं. इस भर्ती प्रक्रिया में अभी भी 23000 से अधिक सीटें खाली पड़ी हैं. इनमें अकेले 9000 से अधिक पद ओबीसी वर्ग के हैं, जबकि अन्य पद दिव्यांग, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और भूतपूर्व सैनिकों के लिए आरक्षित हैं.
आरक्षण विसंगतियों पर आरपार की लड़ाई
69000 सहायक शिक्षक भर्ती से जुड़े अभ्यर्थियों का आरोप है कि आरक्षित वर्ग को निर्धारित छूट का उचित लाभ नहीं मिला है. अभ्यर्थियों की मांग है कि पिछड़ा वर्ग आयोग की संस्तुतियों को लागू कर संशोधित चयन सूची जारी की जाए. अभ्यर्थियों ने साफ कर दिया है कि जब तक नियुक्ति पत्र और आधिकारिक शेड्यूल जारी नहीं होता, उनका संघर्ष जारी रहेगा और जरूरत पड़ने पर वे आमरण अनशन भी करेंगे.